इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी से पूछा है कि एफआईआर में संदिग्धों की जाति का उल्लेख करने की क्या जरूरत है? कोर्ट ने कहा कि जाति का उल्लेख करने से समाज में भेदभाव और पूर्वाग्रह को बढ़ावा मिल सकता है. इस पर चिंता जताते हुए जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा कि पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि एफआईआर में जाति लिखने से किसे फायदा होता है और इससे क्या लाभ होता है. कोर्ट ने डीजीपी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर इस पर जवाब देने का आदेश दिया है. क्या है पूरी खबर, क्या कहा कोर्ट ने, जानने के लिए देखें पूरा वीडियो.
एफआईआर में जाति का जिक्र किया तो High Court ने UP DGP से क्या पूछ लिया?
कोर्ट ने कहा कि जाति का उल्लेख करने से समाज में भेदभाव और पूर्वाग्रह को बढ़ावा मिल सकता है.
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