बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से हिंदुओं समेत अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले बढ़े हैं. पिछले दिनों एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू चंद्र दास की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. अब बांग्लादेश पुलिस ने एक्शन लेते हुए मामले के मुख्य आरोपी यासीन अराफात (Yasin Arafat) को गिरफ्तार कर लिया है.
दीपू चंद्र दास की हत्या के मुख्य आरोपी यासीन ने उस रात क्या-क्या किया था? गिरफ्तार हो गया है
दीपू दास की हत्या के बाद यासीन फरार हो गया था. उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 21 हो गई है. बांग्लादेशी पुलिस अधिकारी घटना में शामिल दूसरे संदिग्धों की पहचान करने में जुटे हैं.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यासीन अराफात एक टीचर है. वह स्थानीय मस्जिद में पढ़ाता था. अधिकारियों के मुताबिक, उसने ही इस हमले की साजिश रची और दूसरे लोगों को दास पर हमला करने के लिए उकसाया. पुलिस ने आगे बताया कि उसने न केवल भीड़ को उकसाया, बल्कि दास को घसीटकर एक चौराहे पर ले आया, जहां पेड़ से लटका कर उनके शव को आग लगा दी गई.
दीपू दास की हत्या के बाद यासीन उस इलाके से फरार होकर दूसरी जगह जाकर छिप गया था. उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 21 हो गई है. बांग्लादेशी पुलिस के अधिकारी घटना में शामिल दूसरे संदिग्धों की पहचान करने में जुटे हैं.
भारत ने दीपू चंद्र दास समेत कई हिंदुओं की हत्या का जिक्र करते हुए इसकी निंदा की थी. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्ध समेत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर की गई थी. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में ये भी कहा,
अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 2,900 से ज्यादा घटनाएं अलग-अलग मीडिया सोर्सेज ने दर्ज की हैं. इन घटनाओं को केवल मीडिया की बढ़ा चढ़ाकर की गई रिपोर्टिंग बताकर या राजनीतिक हिंसा कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
लेकिन बांग्लादेश ने भारत की ओर से जारी बयान को खारिज करते हुए इसे 'टारगेटेड स्टेटमेंट' करार दिया था. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की ओर से कही गई बातें बांग्लादेश के वास्तविक हालात को बयान नहीं करती हैं.
पिछले दिनों बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले के भालुका में कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी. भलुका पुलिस स्टेशन के ड्यूटी ऑफिसर रिपन मियां ने बीबीसी को बताया था कि 18 दिसंबर को रात करीब 9 बजे कुछ उत्तेजित लोगों ने पैगंबर का अपमान करने के आरोप में दीपू दास को पकड़ लिया और उनकी पिटाई की. फिर उन्होंने उनके शव को एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी.
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