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WWE देखकर बनीं रेसलर, ट्रायल्स में ओलंपियन अंतिम पंघाल को कर दिया चित

अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियन, वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट और ओलंपियन अंतिम पंघाल को एशियन चैंपियनशिप ट्रायल्स में मीनाक्षी से हार का सामना करना पड़ा. मीनाक्षी ने पहली बार अंतिम को हराया.

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मीनाक्षी सीनियर स्तर पर पहली बार किसी टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी. (Photo-PTI)

दिल्ली का केडी जाधव स्टेडियम. कुछ देक तक यहां रेसलर्स, उनके परिवार और कोचेज का शोर साफ सुनाई दे रहा था. हर कोई अपने चहेते रेसलर के लिए चीयर कर रहा था. लेकिन अचानक यह शोर सन्नाटे में बदल गया. लोगों के चेहरों पर हैरानी का भाव था. स्कोरबोर्ड पर समय अभी बाकी था, लेकिन मैट पर चल रहा मुकाबला खत्म हो चुका था. अंडर20 वर्ल्ड चैंपियन, वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट और ओलंपियन अंतिम पंघाल (Antim Panghal) आंखों पर हाथ रखे जमीन पर लेटी थीं. मानो वह सबकुछ गंवा चुकी होंं, जितनी हैरानी और निराशा अंतिम को इस हार की थी, उतनी ही खुशी और चमक उन्हें हराने वाली मीनाक्षी की आंखों में थी. 

दोनों के बीच हुए मुुुुुुकाबले में शुरू से ही टक्कर देखने को मिली. मुकाबले के दौरान मीनाक्षी ने कई बार अंतिम के साथ हेड लॉक किया और उन्हें अग्रेसिव खेलने नहीं दिया. शुरुआत में अंतिम ने मीनाक्षी के दोनों पैरों को जकड़ने की कोशिश की, लेकिन उनकी यह चाल नाकाम हो गई. मीनाक्षी ने मुकाबले की शुरुआत में अंतिम को मैट पर पटककर बढ़त बनाई. वहीं, अंतिम ने उन्हें मैट से बाहर करके बराबरी की. पुश-आउट से अंतिम ने स्कोर 2-2 कर लिया. दूसरे पीरियड में मीनाक्षी ने लगातार टेकडाउन करते हुए स्कोर 6-2 कर लिया. मुकाबले के आखिरी नौ सेकेंड में उन्होंने मजबूत पकड़ के साथ अंतिम को चित कर दिया.

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मीनाक्षी की क्या थी रणनीति?

अंतिम को यकीन नहीं हुआ और वह वहीं मैट पर उसी तरह लेटी रहीं. मीनाक्षी ने हाथ बढ़ाकर उन्हें उठाया. वहीं, मैच की रणनीति‍ को लेकर मीनाक्षी ने बताया, 

''कई दिन नहीं सालों से मैं तैयारी कर रही थी. मुझे 53 किलो में फिट होना था. मैंने अपने डिफेंस पर बहुत ज्यादा काम किया. मैं जानती थी कि वह अटैक करेगी, मेरा आईडिया था कि मैं डिफेंस करके काउंटर अटैक करूंगी. मैं बस अपनी कुश्ती करना चाहती थी.'' 

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मीनाक्षी ने बताया कि वह कई बार अंतिम से हारी हैं. वह तीन बार की इस एशियन चैंपियन से 10-0 से भी हार चुकी हैं. मीनाक्षी ने बताया, 

''अंतिम के साथ चार बार खेली हूं. कई बार हारी हूं मैं. 6-7, 5-7, 10-0 से भी हारे थे. पहली बार हराया. लोग चाहते थे कि हम खेलें. जैसे मैंने एक पॉइंट लिया, तभी चित करने की कोशिश की. तब दबाव था. अपने भाई और कोच की आवाज सुन रही थी. वह मेरा पैर नहीं पकड़ पा रही थी.''

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दो बार की नेशनल चैंपियन मीनाक्षी को ट्रायल के समय काफी दबाव महसूस होता और अकसर इसका असर खेल पर भी होता था. मीनाक्षी कभी सीनियर ट्रायल नहीं जीत पाई थीं. उन्होंने बताया,

''मेरा ट्रायल बहुत गंदा जाता था. इसका बहुत दबाव होता है. मैंने खुद को मोटिवेट किया कि मैं कर सकती हूं. मेरे परिवार ने भी कहा कि ‘घबरा कर मत लड़ा कर. हार जा कोई नहीं हम कुछ नहीं कहेंगे, लेकिन अपनी कुश्ती कर.’' 

WWE देखकर शुरू हुआ मीनाक्षी का सफर

जींद जिले के किसान की बेटी मीनाक्षी ने बताया कि वह अपने घर की पहली रेसलर हैं. उनके रेसलिंग की शुरुआत WWE से हुई. मीनाक्षी ने हंसते हुए बताया,

''मैं तो WWE देखती थी, तब मैं जॉन सीना की बड़ी फैन थी. उन्हें लड़ते हुए देखकर मुझे लगता था कि मैं भी यही करूंगी. पापा को बोला कि मुझे यह करना है.  उन्होंने कहा कि इसका सेंटर दिल्ली में है. इतनी दूर कैसे छोड़ेंगे. कैसे अकेली रहूंगी. लेकिन इसके बाद किसी ने बताया कि घर के पास निराड़ी में भी रेसलिंग होती है. मैं वहां गई. रेसलिंग करते हुए मुझे मजा आने लगा.'' 

मीनाक्षी ने चोटिल होने के बावजूद यह ट्रायल्स जीता. 25 साल की खिलाड़ी नेशनल कैंप के जरिए अब इंटरनेशनल एक्सपोजर चाहती हैं. उन्होंने कहा,

''ट्रायल्स से पहले चोट लगी थी, सोच रही थी कि छोड़ दूं. एशियन गेम्स हैं. लेकिन, फिर सोचा पहले भी चोट में खेला है तो एक बार और सही. मैं कई दिन से ट्रायल जीत नहीं पा रही थी पर अब जीत गई हूं तो खुश हूं. मैं बाहर जाकर सीनियर लेवल पर खेलने का एक्सपोजर चाहती हूं.''

चैंपियनशिप में जाने वाली टीम

एशियाई चैंपियनशिप 6 से 11 अप्रैल तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होगी. ट्रायल्स के बाकी विजेता-

53 किग्रा- मीनाक्षी
57 किग्रा- मनीषा भानवाला 
55 किग्रा- हंशिका  
59 किग्रा- नेहा सांगवान  
62 किग्रा - मानसी अहलावत  
65 किग्रा- मोनिका
68 किग्रा- मानसी लाठेर 
72 किग्रा - हर्षिता  
76 किग्रा- काजल 

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