मोटापे कम करने के दो रास्ते सबसे कॉमन हैं. लाइफस्टाइल में बदलाव. या फिर वेट लॉस सर्जरी. लेकिन नई दवाओं की आमद ने बीच का एक रास्ता बनाया है. डॉक्टरों के मुताबिक, GLP-1 (Glucon like Peptide-1) बेस्ड दवाएं मोटापा कम करने में असरदार साबित हो रही हैं. लेकिन कुछ जरूरी सावधानियां हैं, जिनका दवाओं के इस्तेमाल के साथ ध्यान रखना जरूरी है. ऐसी ही पांच जरूरी सावधानियों के बारे में हम आपको बताएंगे.
इन पांच कारणों से चाहकर भी वजन नहीं घटा पाते भारतीय
वेट लॉस मैनेजमेंट से जुड़ी ये सावधानियां और सलाह हमने 'द वेट लॉस रेवोल्यूशन' नाम की किताब से ली है. इस किताब के लेखक डॉ. अंबरीश मिथल और शिवम विज हैं. केंद्रीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने इस किताब का लोकार्पण किया था.


डॉक्टरों की मानें तो इन दवाओं से मरीज अपने वजन का लगभग 15 से 16 फीसदी कम कर सकते हैं. ये उन लोगों के लिए रामबाण साबित हो सकती हैं जो मोटापे से परेशान हैं, लेकिन सर्जरी का ऑप्शन नहीं चुनना चाहते.
साउथ एशियन लोगों को 'TOFI' का खतरा
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दक्षिण एशियाई लोगों में एक खास किस्म का खतरा डॉयग्नोज किया गया है. इसे Thin Outside, Fat Outside कहा जाता है. शॉर्ट में ‘TOFI’. इसका मतलब है कि व्यक्ति बाहर से दुबला दिखाई देगा, लेकिन शरीर के भीतर, खासकर पेट के आसपास खतरनाक ढंग से फैट जमा हो सकता है.
यह अंदरूनी फैट शरीर में सूजन बढ़ाता है. अगर आदमी नहीं संभले तो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीयों के लिए आम तौर पर बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के पैमाने कई बार भ्रम में डालने वाले हो सकते हैं. BMI आपकी ऊंचाई के अनुपात में वजन का माप है. यह शरीर में मौजूद फैट का अनुमान लगाता है.
तेजी से वजन घटाने के भी हैं खतरे
इस पर एक किताब मेडिकल एक्सपर्ट्स के हवाले से बताती है कि कोई व्यक्ति तेजी से वजन घटाता है तो शरीर से सिर्फ फैट ही नहीं बल्कि Muscle भी कम होता है. लेकिन जब वजन दोबारा बढ़ता है तो आम तौर पर फैट ही ज्यादा बढ़ता है. इससे शरीर के पहले से ज्यादा कमजोर होने का खतरा होता है.
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेहद जरूरी
डॉक्टर्स बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति 10 किलो वजन कम करता है तो इस दौरान 2 से 3 किलोग्राम मांसपेशियों (Muscle) का हिस्सा होता है. इसलिए जो भी व्यक्ति वजन घटाने वाली दवाओं का इस्तेमाल कर रहा है, उसे Muscle बनाए रखने के लिए इन दवाओं के साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, ज्यादा प्रोटीन वाला खाना और ज्यादा फाइबर लेना चाहिए.
यह कॉस्मेटिक नहीं मेडिकल ट्रीटमेंट है
डॉक्टर्स बताते हैं कि इन दवाओं का इस्तेमाल सिर्फ कुछ किलो वजन कम करने या फिर किसी शादी समारोह में फिट दिखने के लिए नहीं करना चाहिए. इनका मकसद मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों का इलाज करना है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ इन दवाओं के भरोसे मोटापा जाने से रहा. इसके लिए सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज और स्वास्थ्य से जुड़ी अच्छी आदतों को अपनाना चाहिए.
साइड इफेक्टस भी हो सकते हैं
डॉक्टर्स के मुताबिक इन दवाओं से कुछ साइड इफेक्टस भी हो सकते हैं. ये दवाएं भूख लगने की प्रक्रिया को स्लो कर देती हैं. यानी भूख कम लगती है. लेकिन इसके कुछ साइट इफेक्टस भी हैं. जिसमें उल्टी होना और पेट से जुड़ी कुछ दिक्कतें शामिल हैं. लेकिन ये दिक्कतें धीरे-धीरे ठीक हो जाती हैं.
डॉक्टर की निगरानी जरूरी
एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये दवाएं काफी असरदार है. लेकिन इन्हें केवल डॉक्टरों की सलाह और निगरानी में ही लेना चाहिए. सही डाइट और एक्सरसाइज के साथ इस्तेमाल करने पर ही इनका पूरा फायदा मिल सकता है.
वेट लॉस मैनेजमेंट से जुड़ी ये सावधानियां और सलाह हमने 'द वेट लॉस रेवोल्यूशन' नाम की किताब से ली है. इस किताब के लेखक डॉ. अंबरीश मिथल और शिवम विज हैं. केंद्रीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने इस किताब का लोकार्पण किया था.
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