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तेजस्वी ने राज्यसभा सीट के लिए बसपा, AIMIM से कर ली बात, पर 'अपने' ने ही मौके पर गच्चा दे दिया

Rajya Sabha Election Result: कम वोट मिलने के डर से Tejashwi Yadav ने हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की BSP से सपोर्ट मांगा था. लेकिन वोटिंग के दौरान बड़ा झटका लगा.

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राज्यसभा की 11 सीटों पर चुनाव के नतीजे आए. (PTI)

16 मार्च 2026 को हुए राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बिहार, ओडिशा और हरियाणा से कुल 9 सीटों पर जीत हासिल की. बिहार में तो NDA ने महागठबंधन को ऐसा सताया कि सभी 5 सीटें जीत लीं. ओडिशा में BJP ने 2 सीटें जीतीं, जबकि 1 सीट पर BJP समर्थित आजाद उम्मीदवार ने जीत हासिल की. हरियाणा में भी BJP के खाते में 1 सीट आई. मतदान से दूरी और क्रॉस वोटिंग ने कई सीटों पर विपक्ष का गेम बिगाड़ दिया.

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राज्यसभा के लिए 37 सीटें खाली थीं, जिनमें से 11 सीटों पर चुनाव हुआ. ये 11 सीटें बिहार, ओडिशा और हरियाणा की थीं, जिन पर सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच मुकाबाल था. बाकी 26 सीटों पर निर्विरोध उम्मीदवार चुने गए.  

बिहार में NDA की शानदार जीत

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बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए. यहां NDA ने महागठबंधन को करारा झटका देते हुए पांचों सीटों पर कब्जा जमाया. विपक्षी खेमे के 4 विधायक मतदान से दूर रहे, जिसने NDA की जीत आसान कर दी. NDA के सभी 202 विधायकों ने वोट किया, जबकि महागठबंधन से केवल 37 विधायकों ने अपना मत दिया.

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष तेजस्वी यादव के लिए यह एक बड़ा झटका है. उनकी पार्टी ने पांच में से सिर्फ एक सीट के लिए उम्मीदवार खड़ा किया था. कम वोट मिलने के डर से तेजस्वी ने हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) से सपोर्ट मांगा था.

AIMIM के पांच विधायकों और BSP के एक विधायक ने RJD कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह के पक्ष में वोट दिया, लेकिन तेजस्वी अपने ही विधायक से वोट नहीं दिला पाए. इंडिया टुडे से जुड़े शशि भूषण ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि RJD विधायक फैसल रहमान और कांग्रेस के तीन विधायक मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज बिस्वास ने वोट नहीं दिया.

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बिहार से जिन पांच उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, उनमें BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और शिवेश कुमार, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर, और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं.

राज्यसभा चुनाव में BJP के शिवेश कुमार और RJD के अमरेंद्र धारी सिंह के बीच कड़ा मुकाबला था. पहली वरीयता की वोटिंग में 37 वोटों के साथ अमरेंद्र आगे थे, जबकि शिवेश को केवल पहली वरीयता के 30 वोट मिले. लेकिन दूसरी वरीयता के वोट में गेम पूरी तरह बदल गया.

विपक्ष के चार विधायकों की गैर-मौजूदगी ने BJP का काम आसान कर दिया. शिवेश को दूसरी वरीयता के वोट मिले, जबकि अमरेंद्र को दूसरी वरीयता में एक भी वोट नहीं मिला. इस तरह BJP के शिवेश कुमार ने RJD के अमरेंद्र धारी सिंह को दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर हराया. शिवेश को मिले वोट की कुल वैल्यू 4,202 थी, जबकि अमरेंद्र को मिले वोट की कुल वैल्यू मात्र 3,700 थी.

ओडिशा में भी BJP की जीत

NDA ने ओडिशा में भी शानदार जीत हासिल की. ​​इस गठबंधन ने राज्यसभा की 4 में से 3 सीटों पर जीत दर्ज की. BJP के ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल ने आसानी से जीत हासिल की. ​​पार्टी के ही मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ऊपरी सदन के लिए फिर से चुने गए.

वहीं, BJP के समर्थन से चुनाव लड़ रहे निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय ने भी जीत हासिल की. ​​कुल मिलाकर, NDA को 4 में से 3 सीटों पर सफलता मिली. बाकी बची 1 सीट पर बीजू जनता दल (BJD) के संतृप्त मिश्रा ने जीत हासिल की.

ओडिशा में क्रॉस-वोटिंग का काफी असर देखने को मिला. आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस वजह से निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय और BJP के लिए जीत का रास्ता आसान हो गया. BJD के सूत्रों ने बताया कि पार्टी के लगभग 8 विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की, जिसकी वजह से NDA खेमा 4 में से 3 सीटें जीतने में कामयाब रहा.

हरियाणा में विवाद और देर से गिनती

हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुआ, लेकिन चुनावी गिनती में देरी हुई. BJP और कांग्रेस दोनों ही दलों ने चुनाव को लेकर आपत्ति जताई. BJP ने कांग्रेस के दो विधायकों पर वोट की गोपनीयता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. वहीं कांग्रेस ने भी BJP के एक विधायक पर ऐसा ही आरोप लगाया.

आखिर में BJP के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्ध को विजेता घोषित किया गया. सतीश नांदल निर्दलीय मैदान में थे, जो हार गए. हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं, जिनमें से 88 ने वोट डाले. इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के अर्जुन चौटाला और आदित्य देवीलाल वोटिंग से दूर रहे, जिससे जीत के लिए जरूरी वोट की संख्या घटकर 30 रह गई.

90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में सत्ताधारी BJP के 48 विधायक हैं, कांग्रेस के 37, INLD के 2 और 3 विधायक निर्दलीय हैं. INLD के वोटिंग से हटने से BJP और कांग्रेस के बीच 1-1 सीट बंट गई.

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