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बंगाल SIR में 90 लाख से ज्यादा वोट कटे, 'बाबरी मस्जिद' वाले जिले में सबसे ज्यादा नाम गायब

West Bengal SIR: जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें आगे ट्रिब्यूनल में अपील करने का मौका मिलेगा, लेकिन अभी तक ये ट्रिब्यूनल पूरी तरह शुरू नहीं हुए हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या पहले चरण यानी 23 अप्रैल को वोटिंग से पहले इनके मामलों का निपटारा हो सकेगा या नहीं.

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चुनाव आयोग ने पहली बार पश्चिम बंगाल का जिलेवार डेटा जारी किया. (X @CEOWestBengal)
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इंद्रजीत कुंडू

पश्चिम बंगाल में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ज्यूडिशियल रिव्यू के बाद नई वोटर लिस्ट जारी कर दी है. रिव्यू में 60 लाख से ज्यादा नाम हट गए हैं. पूरे SIR की बात करें, तो अब तक करीब 90.66 लाख मतदाताओं का नाम लिस्ट से बाहर हो चुका है. ज्यूडिशियल रिव्यू का सबसे ज्यादा असर मुर्शिदाबाद जिले में देखा गया, जहां सबसे ज्यादा नाम काटे गए. मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर 'बाबरी मस्जिद' का निर्माण करा रहे हैं.

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सोमवार, 6 अप्रैल की देर रात चुनाव आयोग ने ज्यूडिशियल रिव्यू के बाद की फाइनल सप्लीमेंटरी लिस्ट जारी की. ज्यूडिशियल रिव्यू में जिन जिलों में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए, उनमें मुर्शिदाबाद (4,55,137), नॉर्थ 24 परगना (3,25,666), मालदा (2,39,375), साउथ 24 परगना (2,22,929) और पूर्व बर्धमान (2,09,805) शामिल हैं.

आजतक से जुड़े इंद्रजीत कुंडू की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में ज्यूडिशियल रिव्यू के बाद 27 लाख नाम हटाए गए हैं. इससे पहले दिसंबर 2025 में SIR के पहले फेज के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58.2 लाख नाम हटा दिए गए थे. इसके बाद फरवरी 2026 में फाइनल लिस्ट आने तक 5.46 लाख और नाम हटे. इस तरह कुल मिलाकर 90 लाख से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हट चुके हैं.

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ECI ने बताया कि SIR के बाद ज्यूडिशियल रिव्यू के लिए 60,06,675 मामले आए. इनमें से 59,84,512 मामलों का निपटारा हो चुका है. इनमें 32,68,119 लोगों के नाम लिस्ट में फिर से जोड़ दिए गए, जबकि 27,16,393 लोगों के नाम हटा दिए गए.

चुनाव आयोग के एक सीनियर अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "जिन लोगों के नाम ज्यूडिशियल रिव्यू के बाद हटा दिए गए हैं, वे इसे ट्रिब्यूनल में चुनौती दे सकते हैं."

इस पूरी प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या भी कम हो गई है. SIR शुरू होने से पहले यह संख्या 7.66 करोड़ थी, जो अब घटकर 6.77 करोड़ रह गई है. यानी करीब 11.62% (89 लाख वोटर्स) की कमी आई है.

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SIR के बाद ज्यूडिशियल रिव्यू के लिए सबसे ज्यादा मामले मुर्शिदाबाद (करीब 11 लाख) में आए. इसके बाद मालदा (8.28 लाख), साउथ 24 परगना (5.22 लाख) और नॉर्थ 24 परगना (5 लाख) का स्थान रहा. वहीं झाड़ग्राम और कालिम्पोंग में सबसे कम मामले सामने आए. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो नादिया में सबसे ज्यादा (77.86%) नाम हटाए गए. इसके बाद हुगली (70.33%), पूर्व बर्धमान (57.4%), नॉर्थ 24 परगना (55.08%) और पश्चिम बर्धमान (53.72%) शामिल हैं.

अल्पसंख्यक बहुल मालदा (28.91%), मुर्शिदाबाद (41.33%), उत्तर दिनाजपुर (36.84%) और साउथ 24 परगना (42.70%) में ज्यूडिशियल रिव्यू के मामलों की संख्या सबसे ज्यादा थी. लेकिन प्रतिशत के हिसाब से इन जिलों में कम नाम हटे हैं.

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ECI के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया 705 न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में पूरी की गई. सुप्रीम कोर्ट की भी इस पर नजर रही. 294 सदस्यों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा. वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी.

जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें आगे ट्रिब्यूनल में अपील करने का मौका मिलेगा, लेकिन अभी तक ये ट्रिब्यूनल पूरी तरह शुरू नहीं हुए हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या पहले चरण यानी 23 अप्रैल को वोटिंग से पहले इनके मामलों का निपटारा हो सकेगा या नहीं.

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