उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बकरीद के पहले एक पुरानी ‘बकरा मंडी’ को सील कर दिया गया है. ये मंडी सालों पुरानी है, जहां जानवरों का व्यापार होता था. लेकिन अब नगर निगम ने बकरीद से ठीक पहले यहां जानवरों की बिक्री पर रोक लगा दी है. इसके खिलाफ व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन भी किया. उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना के ये कार्रवाई की गई है.
बकरीद से ऐन पहले वाराणसी में पुरानी बकरा मंडी क्यों सील की गई?
रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार शुरू होने के मात्र चार दिनों के भीतर ही नगर निगम की ओर से बाजार को सील कर दिया गया. कहा जा रहा है कि ऐसे भी संकेत दिए गए कि बाजार को परमानेंट बंद किया जा सकता है.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बकरा मंडी विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वाराणसी के साथ-साथ पास के जिलों- जौनपुर, गाजीपुर, भदोही, मऊ और गोरखपुर से भी व्यापारी यहां जानवरों का व्यापार करने आते हैं.
बकरा मंडी सील करने पर नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि पहले मंडी में व्यापार करने की परमिशन दी गई थी, लेकिन बाद में इस फैसले को रद्द कर दिया गया. मामले पर वाराणसी के कमिश्नर हिमांशु नागपाल का भी बयान सामने आया है. हिमांशु के मुताबिक, मंडी को लेकर स्वच्छता से जुड़ीं शिकायतें मिली थीं. नगर निगम के अधिकारियों ने यहां का निरीक्षण किया था, जिसके बाद ही बेनियाबाग बाजार के परमिशन को रद्द किया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार शुरू होने के मात्र चार दिनों के भीतर ही नगर निगम की ओर से बाजार को सील कर दिया गया. कहा जा रहा है कि ऐसे भी संकेत दिए गए कि बाजार को परमानेंट बंद किया जा सकता है.
जाहिर है मंडी के व्यापारी इससे नाराज हैं. उन्होंने नगर निगम पर आरोप लगाया कि उन्हें बाजार को बंद करने से पहले कोई सूचना नहीं दी गई थी. उनका कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें मात्र आधे घंटे के भीतर मंडी परिसर को खाली करने का फरमान दे दिया था.
उधर वाराणसी के PRO (जनसंपर्क अधिकारी) नंदन सोनथलिया ने व्यापारियों के आरोपों को खारिज कर दिया. नंदन ने बताया कि बेनियाबाग में एक सार्वजनिक पार्क के इलाके में चलाए जा रहे बाजार को खाली करने के लिए 3 दिन पहले ही निर्देश दिया गया था. इसके बाद शुक्रवार, 22 मई को पहले से दी गई परमिशन को रद्द किया गया.
बकरीद के पहले इस बकरा मंडी के बंद होने से व्यापारी काफी परेशान हैं. उनका कहना है कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होगा.
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