The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Madhya Pradesh CM Mohan Yadav family purchased 168 acres land plots roads highways Ujjain

जहां CM मोहन यादव के परिवार ने खरीदी 168 एकड़ जमीन, वहीं सरकार बना रही हाईवे-सड़कें

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव नए विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उज्जैन में उनके परिवार ने 168 एकड़ जमीन खरीदी. इसमें से 111 एकड़ जमीन ऐसी जगहों पर है जहां बाद में बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट आए.

Advertisement
pic
23 जून 2026 (पब्लिश्ड: 02:53 PM IST)
Mohan Yadav, cm Mohan Yadav, madhya pradesh, Mohan Yadav land purchase, land use, ujjain, ujjain property
'सिंहस्थ' की तैयारी के लिए प्लान दिखाते सीएम मोहन यादव. (X @DrMohanYadav51)
Quick AI Highlights
Click here to view more

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के परिवार ने उनके सीएम बनने के बाद उज्जैन और उसके आसपास 168 एकड़ जमीन खरीदी. अब दावा किया जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर प्लॉट ऐसी जगहों पर है, जहां बाद में उनकी ही सरकार ने सड़कें, हाईवे और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का ऐलान किया. यानी कम दामों पर खरीदी गई जमीनों के दाम कुछ ही वक़्त में आसमान तक पहुंचने लगे. यही वजह है कि अब ये खरीदारी राजनीतिक और नैतिक बहस का मुद्दा बन गई है.

इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार जय मजूमदार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने क बाद से दिसंबर 2025 तक मोहन यादव के परिवार और संबंधियों से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने 137 प्लॉट खरीद लिए हैं. इनका कुल एरिया करीब 168 एकड़ है और इनकी खरीद के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसमें परिवार के 2026 के जमीन के लेन-देन (अगर कोई हों) शामिल नहीं हैं, क्योंकि जमीन के सरकारी रिकॉर्ड तुरंत अपडेट नहीं किए जाते हैं.

परिवार और परिवार से जुड़ी कंपनियों के नाम जमीन

रिपोर्ट के मुताबिक, ये खरीदारी मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, बेटे वैभव यादव की पत्नी शालिनी यादव, भाइयों – नंदलाल और नारायण यादव, नारायण यादव की पत्नी रेखा यादव, उनके बेटे अभय यादव, और कजिन- गोविंद यादव और नीलेश यादव के नाम पर हुई. इसके अलावा परिवार से जुड़ी चार रियल एस्टेट कंपनियों ने भी जमीनें खरीदीं.

रिपोर्ट कहती है कि डॉक्टर मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद, परिवार की खरीदी 168 एकड़ जमीन में से लगभग 111 एकड़ जमीन ऐसी जगहों पर है, जहां बाद में सरकार की तरफ से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आए. इनमें नई सड़कें, रोड चौड़ीकरण, रिंग रोड और हाईवे जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं.

उज्जैन मास्टर प्लान - 2035

खुद सीएम मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं, और उज्जैन भी इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है. साल 2028 में होने वाले ‘सिंहस्थ कुंभ’ को देखते हुए शहर में कई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं. इसके अलावा ‘उज्जैन मास्टर प्लान - 2035’ के तहत भी शहर का विस्तार किया जा रहा है. ऐसे में जमीनों की कीमत आसमान छूना तय माना जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि गंगेड़ी इलाके में परिवार और उससे जुड़ी कंपनियों ने अप्रैल 2024 के बाद 38 प्लॉट में लगभग 51 एकड़ जमीन खरीदी. ये इलाका उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-बडनगर हाईवे के जंक्शन के करीब पड़ता है. बाद में इस इलाके के आसपास सड़क और कनेक्टिविटी से जुड़े प्रोजेक्ट सामने आए. इसी तरह उन्हेल, चंदेसरा, जयवंतपुरा, कराड़िया और करौंदिया जैसे इलाकों में भी जमीन खरीदी गईं.

जमीन का लैंड यूज बदला

रिपोर्ट के अनुसार, सीएम मोहन यादव के परिवार ने कम से कम 37 एकड़ ऐसी जमीन खरीदी, जिनका इस्तेमाल (Land Use) बाद में बदला गया. उदाहरण के रूप में समझें तो, जो जमीन पहले कृषि भूमि थी, उसे बाद में रिहायशी या कमर्शियल इस्तेमाल के लिए मार्क कर दिया गया. पंड्याखेड़ी इलाके में मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने लगभग 18 एकड़ जमीन खरीदी. ‘उज्जैन मास्टर प्लान - 2035’ में इस इलाके को कमर्शियल जोन के तौर पर चिह्नित किया गया है.

हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि मोहन यादव के परिवार का रियल एस्टेट से रिश्ता नया नहीं है. मुख्यमंत्री बनने से पहले भी उनके परिवार के पास 108 प्लॉट में फैली करीब 179 एकड़ जमीन थी. इनमें से 85 एकड़ जमीन 2021 से 2023 के बीच खरीदी गई थी. उस वक्त मोहन यादव राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री थे.

मगर गौर करने वाली बात ये है कि ‘मुख्यमंत्री’ बनने के बाद खरीदारी की रफ्तार और तेज होती दिखाई दे रही है. सिर्फ 2025 में ही परिवार ने 62 प्लॉट में फैली 92 एकड़ जमीन खरीद ली. यानी महज दो साल के अंदर जितनी जमीन खरीदी गई, उसका बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही साल में खरीद लिया गया. 

इसके अलावा, इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में मोहन यादव परिवार से जुड़े कारोबारों की भी पड़ताल की है. रिपोर्ट के मुताबिक, मोहन यादव के कजिन गोविंद यादव और उनके सहयोगियों ने गंगेड़ी इलाके में 41 एकड़ जमीन खरीदी. बाद में इस जमीन को इंदौर के ‘शांति महालोक बिल्डर्स’ को डेवलपमेंट के लिए दे दिया गया.

Mohan Yadav Kailash Vijayvargiya
(X @DrMohanYadav51)

जबकि मुख्यमंत्री के अन्य कजिन नीलेश यादव, ‘सांवरिया’ ब्रांड नेम से कई हाउजिंग प्रोजेक्ट विकसित कर रहे हैं. अक्टूबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच, MP RERA (Madhya Pradesh Real Estate Regulatory Authority) में चार नए प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हुए. इनमें ‘श्री सांवरिया धाम’, ‘सांवरिया ड्रीम्स’, ‘सांवरिया ग्रीन’ और ‘सांवरिया रेजिडेंसी’ शामिल हैं.

अब एक और गौर करने वाली बात. 2025 में जब ‘सिंहस्थ 2028’ की तैयारियों के लिए जमीनों के इस्तेमाल के खिलाफ किसानों का विरोध चल रहा था, उसी दौरान सीएम मोहन यादव के परिवार वालों और उनकी कंपनियों ने करीब 92 एकड़ जमीन खरीदी, जैसा रिपोर्ट में कहा गया है.

यह भी पढ़ें: खान सर की कोचिंग बंद हो जाएगी? फायर सेफ्टी को लेकर दो बार जांच, फिर मिला नोटिस

हालांकि यहां ये भी समझा जाना है कि इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी किसी काम के ‘गैरकानूनी’ होने का इल्जाम नहीं लगाया है. मगर ये रिपोर्ट मुख्यतौर पर 'कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (Conflict of Interest) यानी 'हितों के टकराव' और 'नैतिकता' से जुड़े सवाल उठाती है.

CM मोहन यादव से सवाल

ये सवाल अपने आप में बहुत बड़े हैं. इसलिए इनके जवाब के लिए इंडियन एक्सप्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके कार्यालय को सवाल भेजे. रिपोर्ट तैयार होने तक उन्होंने इन सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया. हालांकि, उनके कजिन गोविंद यादव और नीलेश यादव की तरफ से जरूर जवाब आया है. दोनों की तरफ से गोविंद के बेटे अनंत यादव ने जवाब देते हुए कहा कि हमारा परिवार साल 2010 से इस कारोबार में है. फिर वो सवाल करते हैं,

"क्या सिर्फ इसलिए कि मुख्यमंत्री हमारे परिवार से हैं, हम अपना कारोबार बंद कर दें?"

यानी एक तरफ मुख्यमंत्री के परिवार के काम-काज पर सवाल उठ रहे हैं. दूसरी तरफ परिवार सवाल उठा रहा है कि मुख्यमंत्री हमारे परिवार से चुन लिए जाने से हम अपना बिजनेस ही छोड़ दें क्या?

लेकिन इस रिपोर्ट से कुछ बड़े सवाल तो जरूर खड़े हो गए हैं. क्या ये महज संयोग है कि परिवार ने ज्यादातर जमीनें उन्हीं इलाकों में खरीदीं, जिनके आसपास बाद में डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पहुंच गए? और अगर सबकुछ पूरी तरह नियमों के दायरे में भी हुआ हो, तब भी क्या ऐसी परिस्थितियों में ट्रांसपेरेंसी और जवाबदेही के मानक और ज्यादा ऊंचे नहीं होने चाहिए? इन सवालों के जवाब तब मिलेंगे जब इस पर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव कोई प्रतिक्रिया देंगे.

वीडियो: यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश यादव ने लखनऊ में लगी आग पर क्या बताया?

Advertisement

Advertisement

()