दिल्ली की एक अदालत ने 19 मई को उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी. कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बजाज ने उमर खालिद की 15 दिनों की अंतरिम जमानत की मांग ठुकरा दी. कोर्ट ने कहा कि अंतरिम जमानत के लिए उमर खालिद की तरफ से दी गई वजह उचित और संतोषजनक नहीं है.
उमर खालिद ने मां की सर्जरी के लिए बेल मांगी, कोर्ट ने क्या बोलकर खारिज कर दी?
Umar Khalid interim bail plea: दिल्ली की एक अदालत ने 19 मई को उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी. कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बजाज ने पूर्व JNU नेता उमर खालिद की 15 दिनों की अंतरिम जमानत की मांग ठुकरा दी.


उमर खालिद दिल्ली दंगों की ‘साजिश’ रचने के आरोप में कई सालों से जेल में कैद हैं. इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक, उमर खालिद ने दो वजहों से अंतरिम जमानत मांगी थी.
पहली- चाचा के निधन के बाद होने वाली चेहल्लुम रस्म में शामिल होने के लिए.
दूसरी- 2 जून को निर्धारित मां की सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल के लिए.
मगर कोर्ट का मानना है कि याचिका में बताई गई परिस्थितियां अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनतीं. अदालत ने चाचा के चेहल्लुम में शामिल होने वाली मांग पर माना कि रस्म में शामिल होना उतना जरूरी नहीं है.
अदालत ने दोनों मांगों को ठुकराया
कोर्ट के मुताबिक, अगर यह रस्म किसी ऐसे व्यक्ति की होती, जिसका अर्जी देने वाले से काफी करीबी रिश्ता है, तब बात कुछ और थी. और अगर रिश्ता काफी करीबी और गहरा है, तो अर्जी देने वाला अपने चाचा की मौत के समय ही अपनी रिहाई की मांग कर सकता था. इतना लेट नहीं. इसलिए कोर्ट इस वजह को सही नहीं मानता.
मां की सर्जरी और देखभाल से जुड़ी मांग पर कोर्ट ने कहा कि अर्जी देने वाले ने खुद कहा है कि उसकी पांच बहने हैं. वो उनके पास नहीं रहतीं, लेकिन उनसे यह उम्मीद की जा सकती है कि वे अपनी मां की मदद के लिए आएंगी. और पिता भी उनकी सहायता करने में सक्षम हैं.
दिल्ली पुलिस ने अंतरिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि उमर खालिद की रिहाई का असर सार्वजनिक व्यवस्था और प्रशासन पर पड़ सकता है. क्योंकि मामला काफी संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाला है.
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद मामले पर क्या कहा?
कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला ऐसे समय पर आया है, जब एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को जमानत देने से इनकार करने वाले अपने ही पिछले फैसले पर आपत्ति जताई थी. कहा था कि उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने का फैसला ठीक नहीं था. और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर किसी व्यक्ति को बेमियादी समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता.
अदालत सैयद इफ्तिखार अंद्राबी से जुड़े नार्को- टेररिज्म मामले पर सुनवाई कर रही थी. इस दौरान कोर्ट ने माना कि UAPA से जुड़े केस में भी 'जमानत नियम है, जेल अपवाद है' का सिद्धांत लागू होता है.
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उमर खालिद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से जेल में हैं. उन्होंने जमानत के लिए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 6 बार याचिका लगाई है, लेकिन अब तक उनको राहत नहीं मिली है. दिल्ली में फरवरी 2020 में हिंसा भड़की थी, जिसमें 53 लोग मरे थे और 250 से ज्यादा घायल हुए थे.
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