The Lallantop

ट्रेन यात्रा के बाद बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी ने कहा, 'भगवान इस देश की रक्षा करे'

Sivasri Skandaprasad train journey post: संगीत कलाकार शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपनी एक ट्रेन जर्नी के बारे में बताया जिसे उन्होंने ‘ट्रॉमेटिक’ कहा है. उन्होंने बताया कि कुछ लोग पूरी ट्रेन में जोर-जोर से बात कर रहे थे. इससे उन्हें परेशानी हुई.

Advertisement
post-main-image
शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपना ट्रेन अनुभव एक्स पर साझा किया. (Courtesy-इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • संगीत कलाकार शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपने ट्रेन सफर के दौरान 40 लोगों के एक ग्रुप की तरफ से सार्वजनिक जगह में शोर मचाने और असभ्य व्यवहार करने का अनुभव साझा किया।
  • यह घटना तब हुई जब एक बड़ा समूह ट्रेन में सीटों की कमी के बावजूद लगातार जोर-जोर से बात कर रहा था और अन्य यात्रियों की सहूलियत का ध्यान नहीं रख रहा था।
  • इस अनुभव के बाद शिवश्री ने आम जनता में सिविक सेंस बढ़ाने पर जोर दिया और सामाजिक व्यवहार में सुधार की आवश्यकता जताई है।

जानी-मानी संगीत कलाकार शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपने 'ट्रॉमैटिक' ट्रेन एक्सपीरियंस को साझा किया है. उनके मुताबिक, कुछ लोगों का एक ग्रुप कोच में शोर मचाते हुए गया. उन्होंने इस बात का भी ध्यान नहीं रखा कि दूसरे यात्रियों को परेशानी हो सकती है. पब्लिक प्लेस की रस्पेक्ट नहीं की. जब उन्हें टोका गया, तो उन्होंने तेज आवाज में ‘बॉलीवुड’ गाने बजाने शुरू कर दिए.

Advertisement

शिवश्री के पति बेंगलुरु दक्षिण से भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद तेजस्वी सूर्या हैं. उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि 40 लोगों के एक ग्रुप ने सिविक सेंस की ‘धज्जियां’ उड़ा दीं. गुरुवार, 24 सितंबर को शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपनी ट्रेन जर्नी के एक्सपीरियंस के बारे में बताते हुए लिखा,

“आज ट्रेन यात्रा का मेरा अनुभव काफी बुरा रहा. यह देखकर बहुत दुख होता है कि लोग सार्वजनिक जगहों का कितना कम सम्मान करते हैं. जब हम पब्लिक जगहों पर हों, तो हमें चिल्लाना या जोर-जोर से बात नहीं करनी चाहिए. दूसरों के पर्सनल स्पेस का सम्मान करना चाहिए.”

Advertisement

उन्होंने आगे लिखा,

“कलाकार होने के नाते, हमारे दिमाग में बहुत सारे विचार चल रहे होते हैं. हमें शांति पसंद होती है. ट्रेन में बड़े ग्रुप के साथ सफर करते समय शुरुआती उत्साह को कोई भी समझ सकता है. लेकिन जरा सोचिए, 40 अधेड़ उम्र के लोगों का एक ग्रुप 56 सीटों वाली बोगी में हो. वे 5 घंटे तक लगातार जोर-जोर से बातें कर रहे हों.”

शिवश्री स्कंदप्रसाद ने कहा कि भारत में दिक्कत यही है कि उन लोगों से कोई सवाल नहीं कर सकता. यह एक अनकहा नियम है कि ग्रुप का हिस्सा न होने वाले बाकी 16 लोगों को बस उन्हें बर्दाश्त करना पड़ता है.

Advertisement

कलाकार ने बताया कि उन्होंने TTE से रिक्वेस्ट भी की थी कि क्या उन्हें दूसरे कोच में सीट मिल सकती है. लेकिन पूरी ट्रेन भरी हुई थी. इसलिए उसी बोगी की दूसरी सीट पर जाकर वो बैठ गईं. उन्होंने बताया कि अब तक वो ग्रुप सिर्फ बातें कर रहा था. लेकिन उनमें से 8 लोग फिर UNO खेलने लगे. स्कंदप्रसाद ने आगे पोस्ट में लिखा,

“मैंने फिर TTE से अनुरोध किया कि क्या कुछ किया जा सकता है. TTE ने उनसे रुकने के लिए कहा और वे तुरंत रुक गए. लेकिन कुछ मिनटों के बाद TTE वापस आया और उसने उन लोगों से मजाक में पूछा, ‘आप लोग हंगामा क्यों कर रहे हैं?’. फिर वे सब हंसे. ग्रुप के लोगों ने उनसे (TTE) से कहा 'सर नीवु बन्नी, अडोना' (सर आप भी शामिल हो जाइए, चलिए खेलते हैं).”

उन्होंने आगे कहा कि यहां चिंता इस बात की नहीं है कि कौन जीता. लेकिन मैं भी, उनके साथ, एक भारतीय के तौर पर सिविक सेंस के इस खेल में हार गई. एक देश के तौर पर हम अपने सार्वजनिक व्यवहार में कब सुधार करेंगे?

उन्होंने आगे अलग से लिखा,

'बाद में उन्होंने जानबूझकर बॉलीवुड गाने बजाना शुरू कर दिया. 'गॉड सेव दिस कंट्री' भगवान इस देश की रक्षा करे.'

पोस्ट पर यूजर्स ने क्या कहा?

शिवश्री स्कंदप्रसाद की पोस्ट पर काफी यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी. उन्होंने इस बात से सहमति जताई कि सिविक सेंस पर बात करना बहुत जरूरी है. कई बार बच्चे ट्रेन में पढ़ते हुए जाते हैं. लोगों को देखना चाहिए कि रेल में वे कैसे व्यवहार कर रहे हैं.  

ये भी पढ़ें: आजमगढ़: पत्नी-बेटे और पुजारियों के हत्यारे की बच्चियों को SSP अनिल कुमार ने गोद लिया

एक यूजर ने लिखा लिखा,

“ये काफी परेशान करने वाला और थकाऊ है. ऐसे लोगों को लगता है कि ट्रेन पर उनका हक है.”

sivasri_skandaprasad_train_journey_post
(Courtesy-एक्स)

शिव नाम के शख्स ने सिविक गेम हारने पर लिखा,

“हम इसे हारे नहीं है, हमने कभी इसमें भाग ही नहीं लिया. हमें पता ही नहीं कि ये खेल क्या है.”

sivasri_skandaprasad_train_journey_post
(Courtesy-एक्स)

अभिषेक नाम के शख्स ने लिखा,

"मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं. अब स्कूल में सिविक सेंस का सब्जेक्ट पढ़ाया जाना चाहिए."

एक यूजर ने 'ट्रॉमेटिक' शब्द पर कहा कि ये इरिटेटिंग सिचुएशन थी. परेशान करने वाली थी. मगर ट्रॉमेटिक जैसा इसमें क्या था? एक ने लिखा कि सिर्फ ट्रेन ही नहीं, कई बार फ्लाइट में भी ऐसा होता है.
 

वीडियो: UNGA में नेतन्याहू के भाषण पर वॉकआउट, भड़के इजरायली PM ने क्या कहा?

Advertisement