बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन करीब 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं. रविवार, 2 अगस्त को उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट पर अपनी राय दी. उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को 2024 के बांग्लादेश छात्र आंदोलन से जोड़ा. तसलीमा नसरीन ने कहा कि CJP प्रोटेस्ट और स्टूडेंट्स की अगुवाई वाला बांग्लादेश आंदोलन एक जैसे हैं. उन्होंने सलाह दी कि भारतीयों को उनके देश बांग्लादेश में जो हुआ, उससे सीखना चाहिए.
बांग्लादेश में जो हुआ वो भारत के लिए वॉर्निंग... CJP प्रोटेस्ट पर तस्लीमा नसरीन का सरकार को मैसेज
CJP Protest पर बोलते हुए Tasleema Nasreen ने Bangladesh के हालात पर चर्चा की. उन्होंने दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट को 2024 के बांग्लादेश छात्र आंदोलन से जोड़ा.

कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए तसलीमा नसरीन ने कहा कि बांग्लादेश को एक वॉर्निंग की तरह लेना चाहिए. 2024 में बांग्लादेश का छात्र आंदोलन सत्ता विरोधी प्रदर्शन में तब्दील हो गया. तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी. इसके बाद बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ.
इससे एक दिन पहले 1 अगस्त को कोलकाता के रवींद्र भवन में तसलीमा नसरीन का सम्मान समारोह हुआ था. कुछ लोगों ने थोड़ी देर के लिए कार्यक्रम में रुकावट डाली थी.
इंडिया टुडे से जुड़े अनुपम मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को तसलीमा नसरीन ने भारत के छात्र आंदोलन और बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा,
शेख हसीना की पैरवी की"मुझे लगा कि यहां जो (CJP प्रोटेस्ट) हुआ है, वह जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए स्टूडेंट मूवमेंट जैसा ही है. लोगों को बेवकूफ बनाया गया. बांग्लादेश में इसका नतीजा अच्छा नहीं रहा है. जिहादियों ने वहां सत्ता पर कब्जा कर लिया है."
तसलीमा नसरीन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग की आलोचक हैं. इसके बावजूद, उन्होंने माना कि आज के बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी के बजाय अवामी लीग को ही मुख्य विपक्षी पार्टी होना चाहिए. उन्होंने यह भी मांग की कि भारत में निर्वासन झेल रहीं शेख हसीना को सुरक्षित रूप से बांग्लादेश लौटने की इजाजत दी जाए.
तसलीमा ने कहा कि शेख हसीना के समय भी बांग्लादेश में हिंदुओं को टॉर्चर किया जाता था. लेकिन उनका दावा है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार बड़े पैमाने पर बढ़ा. उन्होंने इसके लिए शिक्षा की कमी और धार्मिक संस्थानों के बढ़ते असर को जिम्मेदार ठहराया.
बांग्लादेशी लेखिका ने सामाजिक बदलाव पर जोर दिया. उन्होंने सरकार को धर्म से अलग रखने की पैरवी की. इसके अलावा उन्होंने मदरसा एजुकेशन की आलोचना की. आरोप लगाया कि इससे सांप्रदायिक सोच को बढ़ावा मिलता है. उन्होंने बांग्लादेश को सेक्युलर एजुकेशन पर फोकस करने के लिए कहा.
CM शुभेंदु अधिकारी के लिए क्या कहा?पश्चिम बंगाल की सत्ता में अलग-अलग पार्टियों के दौरान अपने निर्वासन पर तसलीमा नसरीन ने कहा,
"एक सरकार ने मुझ पर रोक लगाई, एक सरकार ने मुझे बाहर निकाला और एक सरकार ने मुझे बुलाया."
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उनका यह बयान साफ तौर पर लेफ्ट फ्रंट, तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी की ओर इशारा था. इस बीच उन्होंने कोलकाता दौरे के दौरान अपनी सुरक्षा का भरोसा दिलाने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का भी धन्यवाद किया.
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