The Lallantop

सूरत में 100 घर किसके आदेश पर गिरे? नगर निगम ने 'घोस्ट डिमोलिशन' पर दिया जवाब

Surat Ghost Demolition: सूरत के नसीरनगर में लगभग 100 घरों को गिरा दिया गया. इस कार्रवाई पर निगम अधिकारियों और प्रशासन ने कहा था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. अब निगम कमिश्नर ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए कमेटी बनाने की बात कही है.

Advertisement
post-main-image
लोगों ने दावा किया कि बिना किसी नोटिस दिए ये कार्रवाई की गई. (फोटो-इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • सूरत के नसीरनगर इलाके की झुग्गी बस्ती में लगभग 100 घरों को 30 मई को बिना कानूनी नोटिस के तोड़ा गया, इस कार्रवाई को 'घोस्ट डिमोलिशन' कहा गया है।
  • नगर निगम अधिकारियों ने इस कार्रवाई में अपनी भूमिका से इनकार किया जबकि वीडियो में उनके अधिकारी और पुलिस मौजूद थे, जिससे यह विवाद बढ़ गया है।
  • म्युनिसिपल कमिश्नर ने जांच समिति गठित की है और परिणाम आने पर जरुरी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है, जबकि प्रभावित परिवारों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

सूरत शहर के नसीरनगर इलाके की एक झुग्गी बस्ती में लगभग 100 घरों को कुछ दिन पहले गिरा दिया गया था. इस घटना को ‘घोस्ट डिमोलिशन’ नाम दिया गया. क्योंकि ये तोड़फोड़ नगर निगम के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई. मगर स्थानीय अधिकारियों ने इस कार्रवाई में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया था. इसके बाद से सवाल उठ रहे हैं कि नगर निगम नहीं, तो किसने ये ऑर्डर दिया?

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

मई में हुई घटना पर अब सूरत नगर निगम (SMC) के अधिकारियों ने अपना-अपना बयान दिया. लेकिन इसमें भी कोई तालमेल नजर नहीं आ रहा है. 100 घरों पर हुए बुलडोजर एक्शन पर सवाल अब और भी गहरे हो गए हैं. 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, SMC के सेंट्रल जोन के प्रमुख और एडिशनल सिटी इंजीनियर आशीष नाइक ने माना कि नगर निगम की टीमें 30 मई को सड़क की सीमा तय करने और सफाई के काम के लिए नासिरनगर गई थीं. पुलिस को कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामान्य प्रक्रिया के तहत जानकारी दी गई थी. उन्होंने दावा किया कि घटना के बाद कुछ कर्मचारी 'मानसिक दबाव' में है. और स्वास्थ्य समस्याओं के चलते छुट्टी पर चले गए हैं.

Advertisement

लेकिन नाइक ने ये नहीं बताया कि 'घोस्ट डिमोलिशन' के पीछे कौन था. हालांकि, उन्होंने अब तक कई अहम सवालों के जवाब नहीं दिए हैं. जैसे कि जब बात सिर्फ सड़क की सीमा तय करने की हुई थी, तो भारी मशीनरी और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को क्यों तैनात किया गया?

कमिश्नर का बयान इससे अलग 

आशीष नाइक के बयान के कुछ घंटों बाद म्युनिसिपल कमिश्नर नागराजन एम ने भी मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा,

"मुझे नहीं पता कि तोड़-फोड़ किसने की. तथ्यों का पता लगाने के लिए मैंने एक जांच समिति बनाई है."

Advertisement

उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारियों की कोई गलती पाई गई, तो कानून के हिसाब से कार्रवाई होगी. लेकिन कमिश्नर ने भी तोड़-फोड़ की कार्रवाई में SMC अधिकारियों की भूमिका से इनकार किया. लेकिन डिमोलिशन के दिन से सामने आए वीडियो कुछ और ही बयां करते हैं.

घटना के दिन के वीडियो में सीनियर सिविक अधिकारी,  SMC हेडक्वार्टर के रोड डिपार्टमेंट के अधिकारी और सेंट्रल जोन के कर्मचारियों को देखा जा सकता है.

BJP विधायक ने जताई चिंता

टाइम्स ऑफ इंडिया से कतारगाम के BJP विधायक विनोद मोराडिया ने बात की. उन्होंने घटना पर चिंता जताते हुए कहा,

"यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि SMC अधिकारियों ने पहले वहां होने से इनकार किया और अब मान रहे हैं कि वे उस इलाके में गए थे. जो अधिकारी इस कार्रवाई में शामिल थे, उन्हें जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए."

उन्होंने पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए.

क्या है मामला?

सूरत के कतारगाम इलाके में स्थित नसीरनगर में 30 जून को कई घरों को गिरा दिया गया. बिना किसी कानूनी नोटिस के. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के बाद में दिए एक नोटिस ने पूरे विवाद को और बढ़ा दिया. 

SMC ने कथित तौर पर उस मालिक को नोटिस भेजा, जिनके प्लॉट पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है. जिसमें कहा गया,

"रेवेन्यू सर्वे नंबर 1267, 1267/3 और 1268 पर इमारत बनाने के लिए बेसमेंट और नींव का काम चल रहा है. इसके लिए SMC से कोई मंज़ूरी नहीं ली गई है. बेसमेंट/नींव वाली जगह पर पानी जमा होने की संभावना है, जिससे मच्छर पनप सकते हैं और आस-पास रहने वाले लोगों की सेहत को खतरा हो सकता है. इसलिए बेसमेंट या नींव वाली जगह को भरा जाए. अगर बीमारी फैलती है या जान-माल का नुकसान होता है, तो इसके लिए आपको जिम्मेदार ठहराया जाएगा."

लेकिन नगर निगम ने नोटिस में अवैध कार्रवाई का कोई जिक्र नहीं किया. जो भी है. मामले से नगर निगम अब तक अपना पल्ला झाड़ रहा है. ऐसे में सवाल अब भी कायम है कि किसके कहने पर ये कार्रवाई हुई? इस डिमोलिशन की वजह से कई परिवार बेघर हो गए. एक रिपोर्ट में बताया गया कि 100 में कई घर 40-45 साल पुराने हैं. और नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स भी देते हैं. आगे मामले की जांच चल रही है. 

वीडियो: CBSE पोर्टल हैक करने वाले निसर्ग अधिकारी को IIT कानपुर से मिला ऑफर, बनेंगे इंटेलिजेंस इंजीनियर

Advertisement