थोक मछली बाजार का नाम ‘शाकाहारी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने से विवाद हो गया. घटना गुजरात के सूरत की है. यहां सूरत मत्स्य व्यापारी संघ (Fish Merchant Association) ने सोमवार, 24 अगस्त को एक मछली बाजार का उद्घाटन किया. सूरत नगर निगम द्वारा संचालित यह शहर का पहला मछली बाजार है, जिसे ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ की मदद से बनाया गया है. यहां 80 दुकानें लगेंगी. लेकिन बाजार उद्घाटन से पहले ही तब विवादित हो गया, जब इसके एंट्री गेट पर लगे बड़े से बैनर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो के साथ अंग्रेजी में लिखा गया- श्री नरेंद्र मोदी होलसेल फिश मार्केट (श्री नरेंद्र मोदी थोक मछली बाजार).
शाकाहारी पीएम मोदी के नाम पर मछली बाजार का नामकरण कर दिया, फोटो भी लगाया, फिर...
गुजरात के सूरत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर थोक मछली बाजार का नाम रखने को लेकर विवाद शुरू हो गया है. मछली व्यापारी संघ के कुछ सदस्यों ने पीएम की शाकाहारी छवि का हवाला देते हुए नाम हटाने की मांग की है, जबकि एसोसिएशन अध्यक्ष इसे गर्व की बात बता रहे हैं.

एक तो सावन का महीना, जब ‘मांस-मदिरा का सेवन’ हिंदू धर्म के हिसाब से ठीक नहीं माना जाता. दूसरा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुद्ध शाकाहारी और व्रत-उपवास करने वाले व्यक्ति हैं. ऐसे में मछली बाजार के साथ उनके नाम का जुड़ना कुछ लोगों को रास नहीं आया. ये लोग कोई और नहीं थे बल्कि मत्स्य व्यापारी संघ के ही सदस्य थे. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एसोसिएशन के कुछ सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई.
सुरेंद्र लश्करी एसोसिएशन के सदस्य भी हैं और मछली व्यापारी भी. इस बाजार में उनका भी एक प्लॉट है. लश्करी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मछली बाजार का नाम पीएम मोदी के नाम पर रखना ठीक नहीं है. यह प्रधानमंत्री की छवि और उनकी पहचान को नुकसान पहुंचता है. मोदी शाकाहारी हैं. इसलिए उन्होंने एसोसिएशन के अध्यक्ष से पोस्टर पर से उनका नाम हटाने की अपील की है.
सूरत में फिश मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला हैं. उनका कहना है कि इस मार्केट को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के फंड से बनाया गया है. पीएम मोदी खुद ‘नीली क्रांति’ के तहत मछली पालन को बढ़ावा देते हैं. ऐसे में अगर बाजार का नाम उनके नाम पर रखा जाता है तो यह हमारे लिए गर्व की बात है. नवसारीवाला ने ये भी दावा किया कि बाजार का नाम पीएम मोदी के नाम पर रखने से पहले उन्होंने एसोसिएशन के सभी सदस्यों को भरोसे में लिया था.
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सूरत नगर निगम के एग्जीयक्यूटिव इंजीनियर राजेश गांजावाला ने बताया कि उद्घाटन से कुछ दिन पहले एसोसिएशन ने नगर निगम को एक प्रस्ताव भेजा था. इसमें सुझाव दिया गया था कि मछली बाजार का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखा जाए. उन्होंने आगे कहा,
हमने प्रस्ताव को सांस्कृतिक समिति को भेज दिया है. इस समिति के फैसले के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि, एसोसिएशन के ही लोगों के विरोध के बाद पीएम मोदी के नाम वाले पोस्टर को सफेद चादर से ढक दिया गया.
क्या है मत्स्य संपदा योजना?नरेंद्र मोदी सरकार की जिस योजना के तहत ये बाजार बना है, वह भारत में मछली पालन सेक्टर में विकास से 'नीली क्रांति' लाने की एक स्कीम है. इसी योजना का एक जरूरी प्रावधान है कि सुपरमार्केट समेत थोक मछली बाजारों, रिटेल मछली बाजारों और आउटलेट्स के अलावा मोबाइल मछली और जिंदा मछली बाजारों का विकास किया जाए. इसी कड़ी में केंद्र सरकार और गुजरात सरकार ने सूरत के इस मछली बाजार के लिए 3 करोड़ रुपये का योगदान दिया है. वहीं, सूरत नगर निगम ने इसके लिए 1.5 करोड़ रुपये दिए हैं.
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