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गुजरात में 100 घरों पर बुलडोजर एक्शन, विधायक-नगर निगम अधिकारी बोले- 'हमें नहीं थी खबर'

Surat Bulldozer Action: गुजरात में 100 घरों पर बुलडोजर चल गया है, लेकिन सूरत महानगर पालिका की स्टैंडिंग कमेटी के अध्‍यक्ष राजन पटेल का कहना है कि निगम ने वहां कोई तोड़फोड़ नहीं की है. स्थानीय BJP विधायक ने दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन की मांग की है.

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सूरत में करीब 100 घरों पर चला बुलडोजर. (ITG)

गुजरात के सूरत में बुलडोजर से करीब 100 घर गिरा दिए गए. वो भी बिना किसी सरकारी आदेश के. मजाल है कि कोई सरकारी विभाग इस बुलडोजर एक्शन की जिम्मेदारी ले? सूरत महानगर पालिका से लेकर पुलिस तक जवाबदेही लेने से बच रही है. ऐसे में अब सवाल है क‍ि अगर सरकारी आदेश नहीं था, तो 100 घर किसने गिराए? उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा? सूरत पुलिस की SOG टीम के DCP राजदीप सिंह नकुम और नगर निगम के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में घरों पर बुलडोजर चलने पर ना सिर्फ कांग्रेस, बल्कि भाजपा विधायक भी सवाल उठा रहे हैं.

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घटना 30 मई को सूरत में वेड दरवाजा के पास मौजूद पुराने नासिर नगर इलाके की है. इंडिया टुडे से जुड़े संजय सिंह राठौर की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि पुलिस बल की तैनाती के बीच लगभग 100 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया.

‘पुलिस और निगम कर्मचारियों के सामने हुई तोड़फोड़’

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ये तोड़फोड़ चल रही थी, तब वहां सूरत नगर निगम यानी सूरत महानगर पालिका के अधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था. जब घर मलबे में तब्दील हो गए और पीड़ित परिवारों का गुस्सा भड़का, तो असली ड्रामा शुरू हुआ.

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सूरत नगर निगम ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि निगम ने तोड़फोड़ का कोई आदेश जारी नहीं किया है. निगम का कहना है कि निगमकर्मी केवल जमीन की नाप के लिए गए थे और इस कार्रवाई में उनका कोई हाथ नहीं है. अगर नगर निगम ने आदेश नहीं दिया, तो पुलिस की मौजूदगी में किसकी शह पर 100 घर गिरा दिए गए?

पीड़ित परिवार पहुंचे कोर्ट

जिन लोगों का घर गिरा है, उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की है. जिसमें आरोप लगाया कि बिना किसी नोटिस के कई झुग्गियों को गिरा दिया गया है. साथ ही मांग की है कि इस बुलडोजर अभियान पर रोक लगाई जाए. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 40 साल के हुसैन अजीज शेख ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

हुसैन अजीज का घर अभी ध्वस्त नहीं किया गया है. उन्होंने इस केस में गुजरात सरकार, सूरत महानगर पालिका, सूरत पुलिस कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को पार्टी बनाया है. उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट से याचिका का निपटारा होने तक तोड़फोड़ पर रोक लगाने और जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें राहत देने की मांग की है.

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स्थानीय निवासियों और सूत्रों के मुताबिक, ये पूरी कवायद नासिर नगर के ठीक पीछे बन रहे एक प्राइवेट कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को रास्ता देने के लिए की गई थी. आरोप है कि बिल्डर के फायदे के लिए रातों-रात सड़क चौड़ी करने का प्लान बनाया गया और सालों से रह रहे लोगों के आशियाने उजाड़ दिए गए.

आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे दिया गया और कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस मूकदर्शक बनी रही.

इस घटना को लेकर अब खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक प्रशासन पर हमलावर हैं. कतारगाम से BJP विधायक वीनू मोरडिया ने कहा कि इस पूरी घटना के पीछे जो भी जिम्मेदार हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, फिर वो चाहे प्राइवेट आदमी हो या सरकारी कर्मचारी. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने भी उठाया जाएगा.

विधायक के आरोपों में जिस गड़बड़ी की ओर इशारा किया जा रहा है वो नगर निगम के अधिकारियों के बयान में भी दिख रहा है. सूरत महानगर पालिका की स्टैंडिंग कमेटी के अध्‍यक्ष राजन पटेल कह रहे हैं कि निगम ने वहां कोई तोड़फोड़ नहीं की है. उन्होंने कहा कि जांच की जा रही है कि इस तोड़फोड़ के पीछे कौन था.

वहीं म्युनिसिपल कमिश्नर एम. नागराजन कह रहे हैं कि हम तो वहां बस एक विवादित जमीन की मैपिंग के लिए गए थे. उसी दौरान, किसी तीसरे पक्ष ने कुछ निर्माण गिरा दिए. वो जमीन एक निजी संस्था की है. हो सकता है कि उन्होंने अपनी मशीनें लगाई हों. म्युनिसिपल कमिश्नर ने साफ कहा कि इस तोड़फोड़ में सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की कोई भूमिका नहीं है.

बयानों का यही विरोधाभास इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि कुछ बहुत बड़ी धांधली हुई है. अब मामला कोर्ट में है. सुनवाई के बाद जो फैसला होगा कि आखिर दोषी कौन है. लेकिन इन सब के बीच जिन लोगों का घर गिर गया उनका क्या. कड़कड़ाती धूप और आने वाले मानसून के बीच वे लोग कहां रहेंगे. इसका जवाब कौन देगा?

वीडियो: अभिषेक बनर्जी के घर पर होगा बुलडोजर एक्शन? अवैध निर्माण के नोटिस पर बवाल

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