सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp की पैरेंट कंपनी मेटा को जमकर फटकार लगाई है. कोर्ट ने साफ कहा है कि वह WhatsApp को भारतीयों के पर्सनल डाटा का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा. CJI सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आप इस देश के संवैधानिक मूल्यों का मज़ाक उड़ा रहे हैं. WhatsApp से पूछा कि आप इस तरह लोगों की प्राइवेसी के अधिकार के साथ कैसे खेल सकते हैं?
'अधिकारों के साथ खेल नहीं सकते...', CJI सूर्य कांत ने WhatsApp और Meta को जमकर लताड़ा
Supreme Court on WhatsApp Privacy: CJI सूर्य कांत ने WhatsApp को फटकार लगाते हुए कहा कि हम आपको एक भी जानकारी शेयर करने की इजाज़त नहीं देंगे. आप इस देश के अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते. एक साफ संदेश जाना चाहिए.


सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 3 फरवरी को मेटा प्लेटफॉर्म्स और WhatsApp की एक याचिका से जुड़ी सुनवाई चल रही थी. याचिका में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के एक फैसले को चुनौती दी गई थी. फैसले में NCLAT ने कॉम्पिटिशन कमिशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी पर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को सही ठहराया था.
कोर्ट ने क्या कहा?लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार CCI ने भी इस मामले में एक क्रॉस अपील दायर की थी. इसमें NCLAT के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि मेटा और WhatsApp को विज्ञापन के लिए यूजर्स का डेटा शेयर करने की इजाजत दी गई थी. दोनों अपील पर मंगलवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान मेटा और WhatsApp की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और अखिल सिब्बल पेश हुए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि कंपनी ने उस पर लगाए गए जुर्माने की रकम जमा कर दी है. इस पर CJI सूर्य कांत ने प्लेटफॉर्म की प्राइवेसी पॉलिसी पर चिंता जताई. उन्होंने कहा,
CJI ने उठाए सवालहम आपको एक भी जानकारी शेयर करने की इजाज़त नहीं देंगे. आप इस देश के अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते. एक साफ संदेश जाना चाहिए. ग्राहक के पास कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि WhatsApp एक मोनोपॉली है. आप इस देश के संवैधानिक मूल्यों का मज़ाक उड़ा रहे हैं. हम इसे (अपील को) तुरंत खारिज कर देंगे. आप इस तरह लोगों की प्राइवेसी के अधिकार के साथ कैसे खेल सकते हैं? उपभोक्ता के पास कोई विकल्प नहीं है, आपने मोनोपॉली बना ली है.
इस पर मेटा के वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी से बाहर निकलने के लिए यूजर्स के पास विकल्प होता है. तो CJI ने पॉलिसी समझने में होने वाली मुश्किलों का जिक्र किया. उन्होंने कहा,
सड़कों पर फल बेचने वाली एक गरीब महिला, क्या वह आपकी पॉलिसी की शर्तें समझेगी? कोई भी समझने के लिए उपलब्ध नहीं होगा. क्या आपकी घरेलू सहायिका इसे समझेगी? आपने लाखों लोगों का डेटा लिया होगा. यह निजी जानकारी की चोरी करने का एक सभ्य तरीका है. हम आपको इसका इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं देंगे.
इसके बाद CJI ने कहा कि जब तक WhatsApp और Meta यह लिखित में आश्वासन नहीं देते कि यूजर्स के पर्सनल डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, तब तक कोर्ट इस मामले की सुनवाई नहीं करेगा. इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि एक संविधान पीठ WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी की जांच कर रही है. उस मामले में लिखित आश्वासन भी दिया गया था. उसमें बताया गया था कि 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार न करने पर किसी भी यूज़र को WhatsApp से बैन नहीं किया जाएगा.
मुकुल रोहतगी ने कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 ने प्लेटफॉर्म को मई 2027 तक का समय दिया है. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह एक्ट अभी लागू नहीं हुआ है. इस बीच सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने कहा कि हमारा पर्सनल डेटा न सिर्फ बेचा जाता है, बल्कि उसका कमर्शियल तौर पर फायदा भी उठाया जाता है. इस पर जस्टिस बागची ने कहा,
प्राइवेसी की परवाह किए बिना, डेटा के हर हिस्से की एक वैल्यू होती है. हम यह जांच करना चाहेंगे कि डेटा शेयरिंग का किराया क्या है. हमें इस बात की चिंता है कि हमारे बिहेवियर का इस्तेमाल कैसे किया जाता है और ट्रेंड्स के लिए उसे कैसे मोनेटाइज किया जाता है. आप टारगेटेड ऑनलाइन एडवरटाइजिंग के मकसद से डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं.
इसके बाद CJI सूर्य कांत ने अपने पर्सनल अनुभव के आधार पर बताया,
अगर WhatsApp पर किसी डॉक्टर को मैसेज भेजा जाता है कि आपकी तबीयत ठीक नहीं है, और डॉक्टर कुछ दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन भेजता है, तो तुरंत आपको विज्ञापन दिखने लगते हैं.
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अगले हफ्ते फिर होगी सुनवाईइस पर मुकुल रोहतगी और अखिल सिब्बल ने जोर देकर कहा कि WhatsApp मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं और प्लेटफॉर्म भी दो यूज़र्स के बीच भेजे गए मैसेज नहीं देख सकता. इसके बाद कोर्ट में WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी और उसके रेगुलेशन को लेकर और भी बहस हुई. अंत में मेटा के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी अपनी एक्टिवटीज को समझाने के लिए एक एफिडेविट फाइल करेगी. कोर्ट उसे पढ़ने के बाद फैसला ले सकता है. इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 9 जनवरी होगी. साथ ही कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री को भी इस मामले में एक पार्टी बनाने का आदेश दिया.
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