श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर लगे 5 करोड़ रुपये के जुर्माने को वापस करने का आदेश दिया है. आर्ट ऑफ लिविंग ने ये जुर्माना 2016 के एक विवादित कार्यक्रम के लिए भरा था. इस कार्यक्रम पर दिल्ली में यमुना के बाढ़ वाले इलाकों (फ्लडप्लेन) को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा था. कोर्ट ने कहा कि इस बात का कोई सीधा सबूत नहीं है कि सांस्कृतिक उत्सव से यमुना नदी के नाजुक इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा.
5 करोड़ का जुर्माना भरने वाले आर्ट ऑफ लिविंग को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, वापस मिलेंगे पैसे
यमुना के फ्लडप्लेन में 2016 के World Culture Festival को लेकर Art Of Living पर लगा 5 करोड़ रुपये का जुर्माना अब वापस मिलेगा. Supreme Court ने कहा कि कार्यक्रम से यमुना के नाजुक इकोसिस्टम को नुकसान का कोई सीधा सबूत नहीं है.

कोर्ट ने आदेश दिया कि आर्ट ऑफ लिविंग के तहत रजिस्टर्ड पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट, व्यक्ति विकास केंद्र द्वारा जमा किया गया जुर्माना दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) वापस करे.
किसने लगाया था जुर्माना?इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जुर्माना नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने लगाया था. NGT ने दिसंबर 2017 में आर्ट ऑफ लिविंग को मार्च 2016 के एक इवेंट के लिए जुर्माना लगाया था. इस इवेंट का नाम वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल था. इस दौरान यमुना के बाढ़ वाले इलाकों को नुकसान पहुंचाने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग को जिम्मेदार ठहराया गया था लेकिन कोर्ट ने आर्ट ऑफ लिविंग को राहत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि DDA यमुना के बाढ़ वाले इलाकों की सुरक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा. कोर्ट ने शहरी योजना और विकास संस्था को NGT के निर्देशानुसार बाढ़ वाले इलाकों को फिर से ठीक करने का काम जारी रखने का भी निर्देश दिया है.
पर्यावरण पैनल आर्ट ऑफ लिविंग को यमुना के किनारे अपना बड़ा कार्यक्रम करने की मंजूरी दी थी. ये कार्यक्रम 2016 में 11-13 मार्च को हुआ था. 11 मार्च 2016 को वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल के उद्घाटन वाले दिन, आयोजकों ने NGT से संपर्क किया. उन्होंने NGT से पूरी रकम जमा करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा था. NGT ने फाउंडेशन को उस दिन 25 लाख रुपये जमा करने की इजाजत दी और बाकी रकम चुकाने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया.
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उस समय 25 लाख रुपये तो जमा कर दिए गए थे. लेकिन बाद में आर्ट ऑफ लिविंग ने अनुरोध किया कि बाकी बचे 4.75 करोड़ रुपये को बकाया रकम के भुगतान के बजाय बैंक गारंटी माना जाए. उस पैसे का इस्तेमाल इलाके में बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने के लिए किया जाए. हालांकि जुर्माना पूरा भर दिया गया, लेकिन बाद में आर्ट ऑफ लिविंग ने NGT के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. फिर एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उसे रकम वापस मिलेगी.
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