दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने पत्रकार की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है. विवेक भगत ने महिला पत्रकार पर SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत केस दर्ज कराया था.
ACP विवेक भगत को झटका, SC ने महिला पत्रकार की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने हाल में हुए विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहीं ‘महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न’ के आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी बनाने के लिए भी हामी भरी है.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में हुए विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहीं ‘महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न’ के आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी बनाने के लिए भी हामी भरी है. इन आरोपों की जांच के लिए पत्रकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच ने 15 अक्टूबर को केस की सुनवाई की.
Live and Law की रिपोर्ट के मुताबिक सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट से एक अलग जांच कमेटी बनाने की मांग की. उन्होंने सुझाव दिया कि इस कमेटी में एक रिटायर्ड महिला जज और एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी शामिल हों, जो प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न की निष्पक्ष जांच कर सकें.
रिपोर्ट के मुताबिक सीजेआई सूर्यकांत ने इंदिरा जयसिंह से कहा कि वे आज दिन के अंत तक उन महिलाओं के नाम सौंपें जो अपने आरोपों के साथ आगे आने को तैयार हैं. उन्होंने कमेटी बनाने के पक्ष में हामी भरी है.
वकील इंदिरा जयसिंह ने ये भी दलील दी कि एक महिला पत्रकार ने पुलिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई FIR दर्ज नहीं हुई. इसके उलट, पुलिस अधिकारी ने ही उस महिला पर जातिसूचक टिप्पणियां करने का आरोप लगा दिया. इसके बाद कोर्ट ने SC/ST Act के तहत केस का सामना कर रही उस पत्रकार को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे दी.
मामला क्या है?
ये विवाद 3 अक्टूबर की एक घटना से जुड़ा है. उस दिन दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार एक एक्टिविस्ट को हिरासत में लिए जाने का वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी. पत्रकार का आरोप है कि उस दौरान एसीपी विवेक भगत ने उसके साथ ‘यौन उत्पीड़न’ किया और धक्का दिया. मामले पर हंगामा मचा तो दिल्ली पुलिस ने निष्पक्ष जांच के लिए केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया था.
इसके बाद दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत ने इसी महिला पत्रकार के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था. महिला पत्रकार पर आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान जब एसीपी विवेक भगत अपनी ड्यूटी कर रहे थे, तब पत्रकार और उनके साथियों ने उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और 'जातिसूचक गालियां दीं'.
इस मामले की FIR में एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) के अलावा भारतीय न्याय संहिता की ये धाराएं भी शामिल की गई हैं.
धारा 221: सरकारी काम में बाधा डालना
धारा 356(2): मानहानि
धारा 3(5): साठगांठ के साथ कोई अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में पत्रकार की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है. सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि कोर्ट पत्रकारों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश भी तय करना चाहेगी.
इसका एक दूसरा पक्ष भी है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने महिला पत्रकारों के लिए कोई भी व्यापक आदेश जारी करने का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि वे आरोपों को कम करके नहीं आंक रहे हैं, लेकिन आज के तकनीकी दौर में मोबाइल रखने वाला हर व्यक्ति खुद को पत्रकार कहने लगता है. कई लोग खुद को फ्रीलांस पत्रकार बताकर रील बनाते और अपलोड करते हैं. किसी भी महिला के साथ गलत बर्ताव नहीं होना चाहिए, लेकिन कोई व्यापक आदेश नहीं दिया जाना चाहिए.
वहीं सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने तर्क दिया कि महिला पत्रकार एक ऐसा वर्ग हैं, जिन्हें खास तौर पर मेल पुलिस के यौन उत्पीड़न से सुरक्षा की ज़रूरत है. उन्होंने ये भी जोड़ा कि महिला पुलिसकर्मियों ने भी पत्रकारों को धक्के मारे थे.
वीडियो: एसीपी विवेक भगत ने महिला पत्रकार पर लगाया जातिसूचक टिप्पणी का आरोप, एफआईआर दर्ज













