पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने सच में कोई पार्टी जॉइन नहीं की. बल्कि अपनी ही राजनीतिक पार्टी का नाम अनाउंस कर दिया है. उनकी पार्टी का नाम होगा- ‘जन नीति भारत’. पूर्व IAS ने कहा है कि वह उत्तर प्रदेश 2027 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेंगी. उनका मुख्य उद्देश्य जनता को सीधे निर्णय प्रक्रिया से जोड़ना है.
पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने पार्टी बना ली, नाम के साथ तीन 'वचन' भी दिए
Divya Mittal Jan Neeti Bharat party: दिव्या मित्तल ने कुछ समय पहले ही अपने पद से इस्तीफा दिया था. उसके बाद उन्होंने एक लंबा वीडियो साझा कर बताया था कि वह राजनीति में आएंगी. लेकिन किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगी.

दिव्या मित्तल ने कुछ समय पहले ही अपने पद से इस्तीफा दिया था. उसके बाद उन्होंने एक लंबा वीडियो साझा कर बताया था कि वह राजनीति में आएंगी. लेकिन किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगी. अब 15 अक्टूबर को एक्स पर लगभग 8 मिनट लंबी वीडियो में उन्होंने खुद की पार्टी का नाम घोषित कर दिया. उन्होंने कहा,
“मैं अपनी पार्टी बना रही हूं. आप पूछेंगे कि पार्टियों की कमी है क्या? कमी पार्टियों की नहीं, सुनवाई की है. सुनवाई कुछ की होती है, सबकी नहीं. मेरी पार्टी का नाम है ‘जन नीति भारत’. राजनीति आप पर राज करती है. जन नीति में राज आपका होगा. और जन नीति भारत 2027 का उत्तर प्रदेश चुनाव लड़ेगी. ताकि सरकार आपके हिसाब से चल सके.”
दिव्या मित्तल ने जन नीति पार्टी के तीन वचन भी बताएं.
पहला वचन- देश की नीतियों के केंद्र में लोग होंगे और उन नीतियों को तय भी लोग ही करेंगे.
दूसरा वचन- हर फैसला जरूरत देखकर होगा, पहचान देखकर नहीं.
तीसरा वचन- हर काम का हिसाब जनता लेगी.
मोबाइल ऐप पर जानकारीपूर्व अधिकारी ने इन वचनों के बीच कई बातों का जिक्र किया. कुछ वादों का, काम का, लोगों के काम पूरा होने के इंतजार का, सुरक्षा का. उन्होंने कहा कि जब किसी बिजनेसमैन को कारखाना लगाना होता है, तो 80 दिन में रास्ता बन जाता है. लेकिन गरीब के लिए वह फाइल 80 सालों तक उसी ‘जंगल’ में घूमती है.
दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी की नीति में ‘मां की फिक्र और पिता की सोच’ दिखेगी. उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं, बजट और विकास कार्यों की हर जानकारी सीधे जनता के मोबाइल पर उपलब्ध होगी. जनता स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों की स्थिति को हरे, पीले और लाल रंगों के माध्यम से रेटिंग देकर खुद मूल्यांकन और सुधार का हिस्सा बनेगी.
एक लड़की को किसी जगह पर डर लगता है. वहां उसके कदम खुद काफी तेज हो जाते हैं, तो लड़की अपने मोबाइल ऐप से उस जगह को मार्क कर सकती है. जहां 100 नक्शे इकट्ठा हो गए. वहीं पर लाइट, गश्त और कैमरा होगा.
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घर-घर जाकर लड़ेगी चुनावदिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई किसी बड़े विज्ञापन या पैसे से नहीं, बल्कि घर-घर जाकर लड़ी जाएगी. उन्होंने कहा,
“इस पार्टी के पास ना पैसा है, ना विज्ञापन. इसलिए यह लड़ाई पोस्टर से नहीं घर-घर से लड़ी जाएगी. हर घर, एक दफ्तर और हर व्यक्ति एक प्रचारक और मैं भी आपके दरवाजे तक. मुझे अपने गांव या कस्बे में बुलाइए.”
उन्होंने जनता से आह्वान किया है कि वे इस मुहिम से जुड़ें और संदेश फैलाएं- “राजनीति नहीं, जन नीति.”
दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई की है. कुछ समय तक लंदन में कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी की. फिर भारत आकर UPSC की परीक्षा पास की और 2013 बैच की यूपी कैडर की IAS अधिकारी बनी थीं. अब सियासत में हाथ आजमाने आ गई हैं.
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