वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने की खबर सामने आने के बाद अब मंदिर प्रशासन ने सफाई दी है. मंदिर के CEO सत्यम मिश्रा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. उनका कहना है कि शिखर से कोई सोना चोरी नहीं हुआ है. अप्रैल 2026 में मंदिर के गर्भगृह के ऊपर उत्तर पश्चिम की तरफ लगा शिखर क्षतिग्रस्त हुआ था. जो हिस्सा डैमेज हुआ था, उसे मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा गया है.
काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सबके सामने गायब हुआ सोना? CEO ने बताया कहां गया
काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर से सोना गायब होने की खबर सामने आने के बाद अब मंदिर प्रशासन ने सफाई दी है. मंदिर के CEO सत्यम मिश्रा ने अब सोना गायब होने के पीछे की पूरी कहानी मीडिया से शेयर की है.

लेकिन इसकी मरम्मत अभी तक क्यों नहीं हुई? इसका भी मंदिर प्रशासन ने जवाब दिया है. प्रशासन का कहना है कि काशी विश्वनाथ मंदिर सिर्फ धार्मिक लिहाज से ही अहम नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक (Archaeological) तौर पर भी बेहद अहम है.
काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने और क्या कहा?मंदिर के शिखर की मरम्मत किसी जल्दबाजी में नहीं की जा रही. इसके लिए IIT मद्रास से तकनीकी जांच और सलाह ली जा रही है. मंदिर के CEO सत्यम मिश्रा का कहना है कि IIT मद्रास की एक्सपर्ट टीम मंदिर परिसर का दौरा कर चुकी है और जुलाई 2026 में अपनी शुरुआती रिपोर्ट भी दे चुकी है. इस रिपोर्ट में बताया गया कि नेचुरल स्टोन और लकड़ी पर पर्यावरण का असर पड़ने से उनमें समय के साथ नुकसान हो सकता है.
एक्सपर्ट ने कहा कि प्रोटेक्शन का काम शुरू करने से पहले वहां इस्तेमाल हुए मटेरियल की बारीकी से जांच और जरूरी तकनीकी टेस्ट किए जाने चाहिए. ताकि मंदिर के स्ट्रक्चर की असली स्थिति क्या है ये पता लगाया जा सके. और आगे कैसे बढ़ना है ये भी पता लगाया जा सके. मंदिर प्रशासन का कहना है कि IIT मद्रास की टीम नवंबर 2026 में दोबारा मंदिर परिसर का निरीक्षण करेगी. इस बार की जांच और जरूरी टेस्ट के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
इस रिपोर्ट में बताया जाएगा कि मंदिर की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करना जरूरी है. साथ ही मंदिर की पहचान को भी कैसे बचाए रखा जाए, इसकी सिफारिश की जाएगी.
लेकिन मामला शुरू कैसे हुआ? PMO तक शिकायत क्यों पहुंची? और अब मंदिर प्रशासन क्या कर रहा है? एक-एक करके समझते हैं.
इस पूरे मामले की शुरुआत बीते सितंबर में हुई. वाराणसी के रहने वाले नित्यानंद राय सितंबर में काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए गए थे. वो पेशे से वकील हैं. उनका दावा है कि इस दौरान उन्होंने मंदिर के स्वर्ण शिखर को देखा और उन्हें करीब 8 से 10 जगहों पर सोना गायब दिखाई दिया.
इसके बाद 23 सितंबर को उन्होंने मंदिर प्रशासन, प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO, मुख्यमंत्री कार्यालय और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टियों को रजिस्टर्ड पोस्ट से शिकायत भेजी. अपनी शिकायत में उन्होंने मांग की कि मंदिर के शिखर की स्थिति साफ की जाए, अगर सोने के हिस्से गायब हैं तो उन्हें दोबारा लगाया जाए. और ये बताया जाए कि आखिर सोना गायब कैसे हुआ.
उन्होंने इस पूरे मामले पर एक आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने की भी मांग की. मंदिर प्रशासन ने 9 अक्टूबर को अकाउंटेंट की रिपोर्ट के आधार पर उनकी शिकायत पर कार्रवाई पूरी कर दी. लेकिन शिकायतकर्ता इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए.
नित्यानंद राय का दावा है कि 23 सितंबर को शिकायत करने के बाद भी मंदिर के शिखर के पूर्वी हिस्से के उत्तरी तरफ उन्हें जिस जगह सोना गायब दिखाई दिया था, वो हिस्सा उन्हें बाद में और बड़ा नजर आया. इसके बाद मामला PMO तक भी पहुंचा. नित्यानंद राय के मुताबिक, 13 अक्टूबर को PMO के पब्लिक ग्रीवांस विभाग से उन्हें फोन आया. उन्होंने वहां भी अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई को लेकर असंतोष जताया.
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सोने की क्वालिटी पर उठा सवालशिकायतकर्ता ने सिर्फ सोना गायब होने का सवाल नहीं उठाया, बल्कि सोने की क्वालिटी पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने 2022 में मंदिर को दान में मिले सोने की क्वालिटी की जांच कराने की भी मांग की. उनकी शिकायत के मुताबिक, उस समय स्वर्ण शिखर के करीब 10 फीट हिस्से में सोने की प्लेटें लगाई गई थीं. गर्भगृह में भी सोने की प्लेटें लगाई गई थीं. अब उनका सवाल था कि दानदाताओं ने जिस कैरेट का सोना दिया था, क्या मंदिर में भी उसी क्वालिटी का सोना लगाया गया?
उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के सभी ट्रस्टियों की बैठक बुलाने और पूरे मामले की हाई लेवल न्यायिक जांच कराने की मांग की. साथ ही उन्होंने अपनी 23 और 24 सितंबर की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए मंदिर प्रशासन से श्वेतपत्र जारी करने की भी मांग की.
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