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भोजशाला विवाद: मंदिर घोषित करने के खिलाफ सभी याचिकाओं की सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

Madhya Pradesh High Court ने Bhojshala परिसर को मंदिर माना था और हिंदुओं को यहां पूजा करने का अधिकार दिया था. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की नमाज पढ़ने की इजाजत भी रद्द कर दी थी. अब Supreme Court इस आदेश के खिलाफ याचिकाएं सुनेगा.

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भोजशाला परिसर पर हिंदू-मुस्लिम पक्ष के बीच दशकों से विवाद है. (PTI)

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  • सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मंजूरी दी है, जो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा विवादित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने के आदेश के खिलाफ दायर की गई थीं।
  • धार के भोजशाला परिसर को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष दशकों से विवाद में थे, जहां हाई कोर्ट ने इसे मंदिर माना जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे मस्जिद बताया; इसी कारण मामले में अपील की गई।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, जिससे मामले की जल्द से जल्द सुनवाई संभव हो सकेगी।

भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सोमवार, 13 जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मंजूरी दे दी है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार जिले में विवादित भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किया था. मुस्लिम पक्ष ने इसी आदेश के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत का रुख किया है.

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भोजशाला पर हिंदू-मुस्लिम के दावे

बीते कई दशकों से धार के भोजशाला परिसर पर विवाद चल रहा था. हिंदू पक्ष इसे भोजशाला मंदिर बताता था, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि ये 11वीं सदी की कमाल मौला मस्जिद है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में मामला पहुंचा, तो कोर्ट ने धार के विवादित भोजशाला परिसर को मंदिर माना. धार जिले में विवादित परिसर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा संरक्षित है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में अपील की. भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की सुप्रीम कोर्ट बेंच के सामने मुस्लिम पक्ष ने मामले में तुरंत सुनवाई की अपील रखी. सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की तरफ से सीनियर एडवोकेट हुजैफा अहमद और एडवोकेट निजाम पाशा पेश हुए.

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द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, हुजेफा अहमदी और दूसरे वकीलों ने कहा कि यह केस 14 जुलाई को सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया था, लेकिन कई याचिकाएं लिस्ट में नहीं हैं. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हुजेफा अहमदी से याचिकाओं की डिटेल्स देने का निर्देश देते हुए कहा कि सभी याचिकाएं 14 जुलाई को लिस्ट की जाएंगी.

हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?

इस साल 15 मई को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर माना और ASI को ही इसका संरक्षण दिया. हाई कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं को यहां पूजा करने का अधिकार है. कोर्ट ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को भोजशाला में शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी.

यह भी पढ़ें: 'धार का भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं... ', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ये फैसला देने की वजह भी बताई

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हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि अगर मुस्लिम समुदाय धार जिले में मस्जिद निर्माण के लिए जमीन के आवंटन के लिए आवेदन करता है, तो सरकार उन्हें एक अलग जमीन देने पर विचार करे.

वीडियो: मध्य प्रदेश की वो भोजशाला जिसके चलते अक्सर हिंदू-मुस्लिम तनाव होता है

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