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चुनाव आयोग में अगर गलत हुआ होगा तो... ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने अपना रुख बता दिया

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को उन फैसलों का रिकॉर्ड सामने रखने का निर्देश दिया है, जिन्हें चुनौती दी गई. बेंच ने कहा कि वो देखना चाहती है कि ये फैसले सिर्फ ज्ञानेश कुमार ने लिए या चुनाव आयोग में सर्वसम्मति या बहुमत से लिए गए. कोर्ट ने साफ किया कि Form 6 में बदलाव को उसने अप्रूव नहीं किया.

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सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया. (Courtesy: PTI)

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  • सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग ठुकरा दी और कहा कि पहले आयोग और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सुना जाएगा, फिर ही निर्णय लिया जाएगा।
  • ज्ञानेश कुमार पर वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े एकतरफा फैसले लेने का आरोप है, जिसे लेकर याचिका दायर की गई और सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड मांगा।
  • कोर्ट ने चुनाव आयोग को एकमत या बहुमत से फैसले लेने का निर्देश दिया है और उल्लंघन पाए जाने पर फैसलों को रद्द करने की संभावना जताई है।
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अनीषा माथुर

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग ठुकरा दी है. कोर्ट ने कहा कि वो पहले चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सुनेगा, उसके बाद फैसला लेगा. सर्वोच्च अदालत के मुताबिक अगर ये पाया गया कि चुनाव आयोग में काम गैर-कानूनी तरीके से हुआ है तो कोर्ट उन कामों पर रोक लगा देगा. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से रिकॉर्ड मांगा है. कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, भारतीय चुनाव आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ.सुखबीर सिंह संधू, डॉ. विवेक जोशी, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और DG (IT) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया.

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5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की. इसमें उन पर वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े एकतरफा फैसला लेने का आरोप है. ये आरोप इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के आधार पर लगाए गए. इसमें दावा किया गया कि ज्ञानेश कुमार ने दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से 14 अहम फैसले लिए.

'Form 6 में बदलाव की मंजूरी नहीं दी'

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने चुनाव आयोग को उन फैसलों का रिकॉर्ड सामने रखने का निर्देश दिया, जिन्हें चुनौती दी गई. बेंच ने कहा कि वो देखना चाहती है कि ये फैसले सिर्फ ज्ञानेश कुमार ने लिए या चुनाव आयोग में सर्वसम्मति या बहुमत से लिए गए.

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इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग को Form 6 में विवादित बदलावों का रिकॉर्ड भी कोर्ट में पेश करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि Form 6 में बदलाव को उन्होंने अप्रूव नहीं किया. 

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की तरफ से पेश वकील सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने ध्यान दिलाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया के खिलाफ मामला बड़ी बेंच के पास पेंडिंग है. लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इसे लेकर उन्होंने कोर्ट से कुछ अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की, "क्योंकि हर नागरिक अब अपने वोट देने के अधिकार को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है."

मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों से ज्यादा छूट

एडवोकेट विकास सिंह ने ये भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ की धारा 16 मुख्य चुनाव आयुक्त को 'बेतहाशा' कानूनी छूट देती है. ऑफिशियल ड्यूटी के दौरान उनके कामकाज या फैसले को लेकर उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि ऐसी छूट तो सुप्रीम कोर्ट के जजों तक को नहीं मिलती.

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'कोई उल्लंघन हुआ, तो रद्द कर देंगे'

एडवोकेट विकास सिंह ने ज्ञानेश कुमार को तुरंत सस्पेंड करने मांग की. इस पर कोर्ट ने कहा कि पहले वो देखेगा कि कानून का उल्लंघन किया गया या नहीं. वकील ने पलटकर कहा,

"कोर्ट को कुछ अंतरिम आदेश जारी करना चाहिए, वरना देश जल जाएगा."

बेंच ने कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त को सस्पेंड कर दिया, तो चुनाव आयोग का काम कैसे चलेगा. चुनाव कैसे होंगे? एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि बचे दो चुनाव आयुक्त, चुनाव आयोग को चला सकते हैं. फिर कोर्ट ने कहा कि वो सामने वाली पार्टियों को सुने बिना आदेश नहीं देगा. इसके बाद वकील ने मांग करते हुए कहा कि फिर तो कम से कम चुनाव आयोग को एकमत या बहुमत से फैसले लेने का निर्देश दिया जाए.

इस मांग पर कोर्ट ने  कहा,

"ये एक अनिवार्य कानून है और हम उम्मीद करते हैं कि वे उसका पालन करेंगे. अगर कोई उल्लंघन होता है, तो हम उसे रद्द कर देंगे."

एडवोकेट विकास सिंह ने फिर पूछा,

"आप क्या-क्या रद्द कर सकते हैं? आप चुनाव या चुनी हुई सरकार को रद्द नहीं कर सकते."

एडवोकेट ने कहा कि एकतरफा फैसलों की वजह से वोटर लिस्ट ही खराब हो गई. फिर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा कि क्या कोर्ट जवाब देने वालों को सुने बिना ऐसा ऑर्डर एकतरफा पास कर सकता है. जस्टिस बागची ने कहा,

"अगर रिकॉर्ड दिखाते हैं कि कोई फैसला एकमत वगैरह… से नहीं लिया गया था, तो हम उन फैसलों पर रोक लगा देंगे और कहेंगे कि वे अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं. क्या हम उन्हें बिना सुने फैसला कर सकते हैं कि सभी फैसले एकतरफा थे? हम उनसे साफ और ट्रांसपेरेंट तरीके से जवाब देने की उम्मीद करते हैं."

एडवोकेट विकास सिंह ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज ने खुद न्यूज रिपोर्ट का खंडन नहीं किया. इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा न्यूज रिपोर्ट सही या गलत हो सकती है. उन्होंने कहा कि कोर्ट सिर्फ न्यूजपेपर रिपोर्ट्स के आधार पर कोई आदेश जारी नहीं कर सकता.

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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जवाब दाखिल करने के लिए कोई डेडलाइन नहीं दी है. ये तब है जब वकील विकास सिंह ने कोर्ट से चुनाव आयोग से एक हफ्ते के अंदर जवाब लेने की मांग की.

वीडियो: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किस मामले में जांच के आदेश जारी हुए?

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