दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभिजीत दिपके का एक वीडियो जारी किया था. वीडियो के जरिए पुलिस ने ये बताने की कोशिश की थी कि दिपके को उनकी दादी की मौत की खबर देने में कोई देरी नहीं की गई थी. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने इस वीडियो को ‘एडिटेड’ बता दिया है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें उनके चेचरे भाई से भी बात नहीं करने दी.
'हिम्मत है तो पूरा वीडियो डालो', अभिजीत दिपके ने दादी की मौत को लेकर पुलिस पर नया आरोप लगाया
Abhijeet Dipke detention video: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर नया आरोप लगाया है. कहा है कि पुलिस ने उनकी दादी की मौत की जानकारी देने वाला वीडियो एडिट करके जारी कियाहै.

पहले थोड़ा मामला बता देते हैं. 10 अक्टूबर को अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. उसी दिन उनकी 85 वर्षीय दादी सावित्रीबाई शंकरराव दिपके का निधन हो गया था. 11 अक्टूबर की सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया. अभिजीत ने आरोप लगाया था कि हिरासत में रहते हुए उन्हें उनकी दादी की मौत की खबर 'नहीं' दी गई थी.
बाद में पुलिस द्वारा जारी वीडियो में दिखता है कि अभिजीत को कथित तौर पर उनकी दादी के बारे में बताया गया था. क्लिप में दिपके कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं. तभी एक महिला पुलिसकर्मी उन्हें उनकी दादी के निधन की खबर देती हैं. ये सुनते ही दिपके सिर पर हाथ रखकर बैठ जाते हैं. एक अन्य व्यक्ति उन्हें पानी देता है और पूछता है कि क्या वो घर लौटना चाहते हैं.
लेकिन वीडियो में सुनाई देता है कि दिपके घर जाने से इनकार कर देते हैं और कहते हैं, 'मैं यहीं रुकूंगा.' इसके बाद पुलिस दिपके से पूछती है कि क्या वो किसी फैमिली मेंबर से बात करना चाहते हैं? इस पर दिपके कहते हैं, ‘मुझे नंबर याद नहीं है. पापा से बात नहीं हो पाएगी, उनको बोल दो कि आज ही अंतिम संस्कार कर दें.’
दिपके ने बताया वीडियो 'एडिटेड'अब इस वीडियो को लेकर अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है. कहा है कि पुलिस ने ये वीडियो ‘एडिट करके पोस्ट किया’ है. उन्होंने पुलिस को चुनौती दी है कि अगर उसमें कुछ गलत नहीं है तो पूरा वीडियो जारी किया जाए.
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक ने सवाल उठाया कि पुलिस ने उनके चचेरे भाई से बात क्यों नहीं करने दी. दिपके ने कहा कि उन्होंने पुलिस से बार-बार दो मिनट के लिए फोन देने और अपने वकील से बात कराने की मांग की थी.
दिपके ने कहा,
‘दिल्ली पुलिस की हिम्मत है तो पूरा वीडियो जारी करे. वो एडिट किया हुआ वीडियो दिखा रहे हैं ताकि लोगों को पता चले कि मुझे मेरे बुनियादी अधिकारों से कैसे वंचित रखा गया.’
उन्होंने ये भी कहा कि गिरफ्तारी या हिरासत के बाद वकील से बात करने का अधिकार कानूनी अधिकार है.
गिरफ्तारी के कागज लाई थी पुलिसदिपके के मुताबिक 11 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े 3 बजे पुलिस उनके पास उनकी गिरफ्तारी के कागजात लेकर आई थी. पुलिस उन पेपर्स पर साइन करने की मांग कर रही थी. दिपके के मुताबिक, उन्हें सुबह के समय अपने माता-पिता को फोन करके ये बताने को कहा गया कि उन्हें लंबे समय के लिए जेल जाना पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें: 'अभिजीत दिपके को दादी के निधन की तुरंत खबर दी', दिल्ली पुलिस ने वीडियो शेयर किया
दिपके का सवाल है,
'मुझे रात साढ़े 3 बजे ही ये बात बताने के लिए क्यों कहा गया? दिन में माता-पिता को क्यों नहीं बताया गया कि मुझे गिरफ्तार किया गया है या मैं कहां हूं?'
दिपके का कहना है,
'ये जानते हुए कि मैंने अभी-अभी अपनी दादी को खोया है, पुलिस ने मुझे गिरफ्तारी के कागज पर सिग्नेचर करने के लिए कहा. लेकिन मैंने तब तक साइन करने से इनकार कर दिया, जब तक मुझे अपने वकीलों से बात करने की अनुमति नहीं दी गई.’
बता दें कि करीब 23 घंटे हिरासत में रखने के बाद 11 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे दिपके को रिहा कर दिया गया था. इसके बाद दिपके अपने घर नागपुर रवाना हो गए.
वीडियो: लखनऊ में कांग्रेस मुख्यालय के अंदर जूते-चप्पल चले, अजय राय और ममता चौधरी के गुट क्यों भिड़े?












