पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला घोटाला मामले में क्लीन चिट दे दी गई है. साल 2014 में CBI ने मनमोहन सिंह के खिलाफ ठोस सबूत न होने की बात कहते हुए दो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थीं. इसके बावजूद निचली अदालत ने उन्हें समन जारी कर दिया था. अब 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूर्व पीएम के खिलाफ कथित कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में पर्याप्त सबूत नहीं हैं.
कोयला घोटाला केस में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह बेदाग साबित, CBI की क्लीन चिट रिपोर्ट SC ने मंजूर की
PM Manmohan Singh coal scam: मनमोहन सिंह के खिलाफ पहले भी कोई सबूत नहीं मिला था. 2014 में CBI ने उनके खिलाफ केस बंद करने के लिए दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. लेकिन 2015 में ट्रायल कोर्ट ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए उनको समन जारी कर दिया. इसके बाद पूर्व पीएम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच कर रही थी. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने अपने आदेश में कहा,
"हम इस बात से संतुष्ट हैं कि सेशंस जज के पास CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और मामले का संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं था. नतीजतन, हम स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) को मंजूरी देते हुए स्पेशल जज के आदेशों को रद्द करते हैं.
तीन जजों की बेंच ने कहा कि वह सीबीआई की तरफ से दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हैं और मामले को मेरिट के आधार पर बंद करते हैं. मनमोहन सिंह की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए थे.
क्या है कोयला घोटाला?यह मामला ओडिशा की तलाबीरा कोयला खदान के आवंटन से जुड़ा है. आरोप लगाया गया था कि 2004 से 2005 के बीच कोयला ब्लॉक्स को मनमाने और पारदर्शिता को अनदेखा करते हुए प्राइवेट कंपनियों को आवंटित किया गया था. सियासी हलकों से लेकर मीडिया तक मामले पर इतना हंगामा हुआ कि आरोपों की आंच तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह तक पहुंच गई.
हालांकि मनमोहन सिंह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. 2014 में सीबीआई ने उनके खिलाफ केस बंद करने के लिए दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. लेकिन 2015 में ट्रायल कोर्ट ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए सिंह को समन जारी कर दिया. इसके बाद पूर्व पीएम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
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शीर्ष अदालत ने 1 अप्रैल 2015 को पूर्व प्रधानमंत्री को जारी समन पर रोक लगा दी थी. उस समय सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, केटीएस तुलसी, अश्वनी कुमार, विवेक तन्खा और हरिन पी रावल ने उनका पक्ष रखा था.
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या तर्क दिए थे?कपिल सिब्बल ने तब तर्क दिया था कि स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश के उलट हिंडाल्को कंपनी को कोयला ब्लॉक आवंटित करने में पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यों में कुछ भी गैर-कानूनी नहीं था. उन्होंने कहा था, “यह पूरी तरह से प्रशासनिक फैसला है. इसमें गैर-कानूनी क्या है? खदान अलॉट करना गैर-कानूनी नहीं है. इसे किसी प्राइवेट पार्टी को अलॉट करना भी गैर-कानूनी नहीं है. ऐसा करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है. उन्होंने स्क्रीनिंग कमिटी के फैसले के बावजूद एक प्राइवेट पार्टी को कोल ब्लॉक अलॉट किए. इसमें कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है.”
मनमोहन सिंह के निधन को डेढ़ साल से ज्यादा हो गया है. अब जाकर उनके खिलाफ जारी हुए समन को चुनौती देने वाली याचिका मंजूर कर मामला बंद कर दिया गया. पूर्व पीएम का निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ था.
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