पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ओडिशा और झारखंड के जज भी तैनात किए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने 24 फरवरी, मंगलवार को इसकी मंजूरी दे दी. कोर्ट ने माना कि बंगाल में SIR का काम पूरा करने के लिए जजों की संख्या पर्याप्त नहीं है. इसी के साथ ही कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट रैंक के अलावा सीनियर डिवीजन जूनियर डिवीजन के सिविल जजों को भी SIR के काम में लगाने की मंजूरी दे दी. बशर्ते जजों के पास कम से कम 3 साल का अनुभव होना चाहिए.
अब बंगाल SIR के काम में लगेंगे ओडिशा और झारखंड के जज, सुप्रीम कोर्ट को क्यों देना पड़ा ये आदेश?
Supreme Court on Bengal SIR: कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट रैंक के अलावा सीनियर डिवीजन जूनियर डिवीजन के सिविल जजों को भी SIR के काम में लगाने की मंजूरी दे दी. बशर्ते जजों के पास कम से कम 3 साल का अनुभव होना चाहिए.
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इससे पहले, पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने SIR के दावों और आपत्तियों को वेरिफाई के लिए न्यायिक अधिकारी यानी जजों को नियुक्ति का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि वो बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच 'भरोसे की कमी' को देखते हुए ऐसा कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही यह भी कहा कि अगर कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लगता है कि उन्हें और अधिक जजों की जरूरत है तो वो झारखंड और ओडिशा के चीफ जस्टिस से उसी रैंक के मौजूदा या रिटायर्ड जजों को मांग सकते हैं. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की मांग के बाद यह फैसला सुनाया.
कलत्ता हाई कोर्ट ने लिखा था पत्रसुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने बताया था कि राज्य में कम से कम 50 लाख मामलों पर फैसला होना है और इसके लिए 250 न्यायिक अधिकारी ही उपलब्ध हैं. ऐसे में अगर एक अधिकारी एक दिन में 250 मामलों में भी फैसला देता है तो भी प्रक्रिया को पूरा करने में कम से कम 80 दिन लग जाएंगे.
इस समस्या को देखते हुए CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने कुछ अहम फैसले सुनाए, जिसके मुताबिक:
- न्यूनतम 3 साल के अनुभव वाले सीनियर डिवीजन और जूनियर डिवीजन रैंक के सिविल जज भी SIR के काम में लगाए जा सकते हैं.
- कलकत्ता हाई कोर्ट इन्हीं रैंक के जजों की मांग ओडिशा और झारखंड हाई कोर्ट से कर सकता है.
- कोर्ट ने ओडिशा और झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से भी इस मामले में सहयोग करने का अनुरोध किया.
- कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वेरिफिकेशन के लिए वह सभी डॉक्यूमेंट्स मान्य होंगे, जिनके बारे में बंगाल में SIR शुरू करने की घोषणा के साथ बताया गया था. साथ ही 8 सितंबर 2025 को SC की ओर से आधार कार्ड को डॉक्यूमेंट के रूप में स्वीकार करने की मंजूरी दी गई थी, वह भी मान्य होगा. साथ ही कोर्ट द्वारा 19 जनवरी 2026 को पास किए गए ऑर्डर के तहत 10वीं क्लास का एडमिट कार्ड और माध्यमिक पास का सर्टिफिकेट जमा करने की इजाजत भी दी गई थी.
- कोर्ट ने कहा कि ऐसे सभी डॉक्यूमेंट्स, जिन्हें 14 फरवरी या उससे पहले जमा किया गया हो, उन पर विचार किया जाए.
- कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दस्तावेजों के बारे में न्यायिक अधिकारियों यानी जजों को संतुष्ट करने की पूरी जिम्मेदारी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (ERO) या AERO की होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की अंतिम तारीख 28 फरवरी 2026 है. अगर तब तक भी वेरिफिकेशन का काम अधूरा रह जाता है तो चुनाव आयोग फाइनल लिस्ट जारी कर सकता है. बाद में सप्लीमेंट लिस्ट जारी की जाएगी. कोर्ट ने कहा है कि जैसे ही लंबित काम पूरे हो जाएंगे, ऐसी सप्लीमेंट लिस्ट लगातार पब्लिश की जाएंगी. साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि ये लिस्ट 28 फरवरी को जारी हुई फाइनल लिस्ट का ही हिस्सा मानी जाएंगी. कोर्ट ने कहा कि वो आर्टिकल 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये घोषणा कर रहा है.
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हालांकि कोर्ट के फैसले पर याचिकाकर्ताओं के एक वकील कल्याण बंधोपाध्याय ने चिंता जताई कि दूसरे राज्यों के जजों को बंगाली की जानकारी नहीं हो सकती. इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से झारखंड और ओडिशा के इलाके पहले बंगाल का हिस्सा थे.
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