The Lallantop

मंत्रालय ने खिलाड़ियों के लिए दिया था फंड, अधिकारियों ने उस पैसे से बना लिए अपने लिए स्विमिंग पूल

खेल मंत्रालय की ओर से खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देने के लिए NSDF फंड्स दिया जाता है. हालांकि, दिल्ली के न्यू मोती बाग इलाके में इसी पैसे का इस्तेमाल अधिकारियों की कॉलोनी में स्विमिंग पूल और दूसरी सुविधाओं के लिए कर लिया गया.

Advertisement
post-main-image
मंत्रालय से मिले फंड का इस्तेमाल अधिकारिोयों के लिए (सांकेतिक चित्र)

खेल मंत्रालय की ओर से जारी किया गया स्पेशल फंड का इस्तेमाल खिलाड़ियों के बजाय ब्यूरोक्रेट्स के लिए हो रहा है. अधिकारियों ने इन फंड्स का इस्तेमाल अपने लिए स्पोर्ट्स सुविधाओं को अपग्रेड करने में किया. एक सरकारी पैनल ने नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF) की राशि लुटियंस दिल्ली के शानदार रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में अफसरों के लिए बेहतरीन स्पोर्ट्स फैसिलिटी बनाने और उनके रख-रखाव में खर्च कर दी है. फंड की कुछ राशि सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट को भी दी गई.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यू मोती बाग स्थित इस अपस्केल रिहायशी कॉम्प्लेक्स के अंदर देश के कई सीनियर अधिकारी रहते हैं. यहां अधिकारियों के बच्चों के लिए टेंप्रेचर कंट्रोल स्विमिंग पूल है. इसके पास ही एक चमकदार टेनिस कोर्ट भी है. ये सारी सुविधाएं सार्वजनिक लगती हैं, लेकिन गेट पर गार्ड तैनात किए गए हैं और वही तय करते हैं कि कौन अंदर जा सकता है.

सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (CSOI) का स्क्वैश कोर्ट वीक डेज के दोपहर में खाली पड़ा है. हालांकि, यहां की दीवारों पर निशान बताते हैं कि शाम को यहां भीड़ रहती है. बाहर एक बोर्ड पर साफ लिखा है- बिना आईडी के प्रवेश नहीं मिलेगा.

Advertisement

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पता चला है कि देश के कुछ सीनियर अधिकारियों के लिए बनी इन विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं को बनाने और इनके रेनोवेशन के लिए नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF) से आवंटित पैसे का इस्तेमाल किया गया है. यह फंड एथलीट्स को ट्रेनिंग देने और खेल सुविधाएं बनाने के लिए आवंटित हुआ था. खास बात यह है कि इन फंड्स को जारी करने की अनुमति भी ब्यूरोक्रेट्स की एक कमेटी ही देती है.

अधिकारियों के लिए भी हुआ NSDF को इस्तेमाल

द इंडियन एक्सप्रेस ने पांच साल के सरकारी रिकॉर्ड, आरटीआई से हासिल दस्तावेजों की जांच, मौजूदा और पूर्व सरकारी अधिकारियों से बात की है. जांच में सामने आया कि NSDF का बड़ा हिस्सा तो खेल सुविधाओं पर ही खर्च किया गया है. हालांकि, इसमें से कुछ हिस्सा सिविल सर्विसेज संस्थानों और दिल्ली के ब्यूरोक्रेट्स की कॉलोनी में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए भी इस्तेमाल किया गया है. NSDF से फंडिंग पाने वाले खेल कार्यक्रमों में टॉप एथलीट्स के लिए चलाई गई फ्लैगशिप टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) शामिल है. हालांकि, इसमें कुछ ऐसे लाभार्थी भी शामिल हैं जिनकी ज्यादा चर्चा नहीं हुई. इनमें सीनियर अधिकारियों के लिए तैयार की गई सुविधाएं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में RSS से जुड़े दो संस्थान और एशिया-कैरिबियन के कुछ कम चर्चित क्रिकेट बोर्ड भी शामिल हैं.

खेल मंत्रालय जारी करता है NSDF फंड

एनएसडीएफ फंड की देखभाल खेल मंत्रालय के अधीन 12 सदस्यों वाली परिषद करती है. फंड से जुड़े प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी देने का अधिकार खेल मंत्रालय के अधिकारियों की 6 सदस्यों वाली समिति करती है. आसान शब्दों में कहें, तो यही वह सिस्टम है जो इन अनुदानों से फायदा उठा पा रहा है.

Advertisement

NSDF के फंड्स का इस्तेमाल पहले भी ब्यूरोक्रेट्स के लिए हुआ है

- बता दें कि 2021 से 2025 के बीच खेल मंत्रालय के रिकॉर्ड्स के अनुसार, सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (CSOI), सेंट्रल सिविल सर्विसेज कल्चरल एंड स्पोर्ट्स बोर्ड (CCSCSB) और न्यू मोती बाग रिहायशी कॉम्प्लेक्स को कुल 6.7 करोड़ रुपये के फंड आवंटित हुए थे. इसमें से 6.2 करोड़ रुपये से ज्यादा दिए गए.

- इसी अवधि के दौरान दो आरएसएस से जुड़े संगठनों को टूर्नामेंट कराने और सुविधाएं बनाने के लिए 5.07 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि में से करीब 2.66 करोड़ रुपये मिले.

- स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने एनएसडीएफ के जरिए मालदीव, जमैका और सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनाडाइंस के क्रिकेट बोर्ड को क्रिकेट सामान गिफ्ट करने पर भी करीब 1.08 करोड़ रुपये खर्च किए.

इतनी राशि ऐसे वक्त में खर्च की गई है, जबकि इन्हीं सालों में फंड्स लगातार कम हुए थे. 2023-24 में 85.26 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में मात्र 37.02 करोड़ रुपये रह गया है.

स्टैंडिंग कमेटी ने भी इस पर उठाए थे सवाल

NSDF फंड के इस्तेमाल का मामला संसद में भी उठ चुका है. लोकसभा में अगस्त 2025 में 'एनएसडीएफ पर सख्त नियंत्रण' की मांग करते हुए अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा:

'समिति को जानकारी मिली है कि पिछले वर्षों में इन फंड्स को आवासीय कॉलोनियों और सिविल सर्विसेज एसोसिएशन को दिया गया है. समिति सिफारिश करती है कि इस व्यवस्था को रोका जाए।'

अधिकारियों की कॉलोनी के लिए खेल मंत्रालय से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अधिकारियों के लिए हो रहा है. दिल्ली के न्यू मोती बाग में बनी शानदार सुविधाएं इस फंड के दुरुपयोग का सबसे साफ उदाहरण हैं. रिकॉर्ड्स बताते हैं कि 2024 के मध्य में एनएसडीएफ अनुदान प्रस्तावों की जांच करने वाली छह सदस्यीय समिति को देश के सबसे वरिष्ठ नौकरशाहों वाली इस आवासीय कॉलोनी में खेल सुविधाओं के विस्तार का प्रस्ताव मिला था. यह कॉलोनी दिल्ली के सेंटर में है, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं और 100 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली हुई है. यह पहला प्रस्ताव नहीं था. इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड्स दिखाते हैं कि 31 जुलाई 2019 को खेल प्राधिकरण (SAI) पहले ही ‘खेलो इंडिया’ योजना से न्यू मोती बाग कॉम्प्लेक्स में 'स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण' के लिए 2.8 करोड़ रुपये मंजूर कर चुका था।


न्यू मोती बाग रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के अध्यक्ष और संघ क्षेत्रों के चुनाव आयुक्त सुधांशु पांडे से जब इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने संसदीय समिति की रिपोर्ट नहीं पढ़ी है. पांडे ने कहा कि वह इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि RWA ने कॉलोनी विकसित करने वाली एजेंसी NBCC को इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का जिम्मा सौंपा था.

पांडे ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 
‘NBCC ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की, जिसे SAI ने मंजूरी दी. फिर खेल मंत्रालय ने इसे जांचा और पैसा मंजूर किया. पूंजीगत खर्च वहीं से हुआ. पैसा कहां से आ रहा है, यह सरकार तय करती है.’

वीडियो: प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट आई, फेफड़ों में खून का थक्का निकला, और क्या पता चला?

Advertisement