ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अब दुनिया में नहीं हैं. इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में उनकी मौत हो गई. भारत के कई नेताओं ने खामनेई की हत्या की निंदा की और उन्हें भारत का ‘एक भरोसेमंद दोस्त’ बताया. लेकिन पीएम मोदी की तरफ से अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. इसे लेकर कांग्रेस की सीनियर नेता सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि खामेनेई की टारगेटेड हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है.
'PM मोदी के लौटने के 48 घंटे बाद खामेनेई की हत्या... दुःख भी नहीं जताया', सोनिया गांधी ने उठाए सवाल
कांग्रेस की सीनियर नेता Sonia Gandhi ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि खामेनेई की टारगेटेड हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि ‘कर्तव्यहीनता’ है. इससे भारत की विदेश नीति की क्रेडिबिलिटी पर शक पैदा होता है.
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पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह भी मांग की कि जब बजट सेशन के दूसरे हिस्से के लिए संसद शुरू हो, तो सरकार की ‘परेशान करने वाली चुप्पी’ पर खुलकर और बिना किसी टालमटोल के बहस होनी चाहिए. द इंडियन एक्सप्रेस में छपे अपने आर्टिकल में, उन्होंने कहा,
“1 मार्च को, ईरान ने कन्फर्म किया कि उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की पिछले दिन अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए टारगेटेड हमलों में हत्या कर दी गई थी. बातचीत के बीच एक मौजूदा हेड ऑफ स्टेट की हत्या आज के इंटरनेशनल रिश्तों में एक बड़ी दरार दिखाती है. इस पर नई दिल्ली की चुप्पी भी उतनी ही चौंकाने वाली है.”
सोनिया गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा भारत सरकार ने न तो खामेनेई की हत्या की निंदा की है और न ही ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन की. आगे कहा,
“शुरू में, अमेरिकी-इजरायल के बड़े हमले को नजरअंदाज करते हुए, प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ने UAE पर ईरान के जवाबी हमले की निंदा करने तक ही खुद को सीमित रखा, बिना उससे पहले की घटनाओं पर बात किए. बाद में, उन्होंने बातचीत और डिप्लोमेसी की बात की.”
कांग्रेस नेता ने अपने आर्टिकल में कहा, “जब किसी विदेशी नेता की टारगेटेड हत्या पर हमारा देश संप्रभुता या इंटरनेशनल लॉ का कोई साफ बचाव नहीं करता और निष्पक्षता को छोड़ देता है, तो इससे हमारी विदेश नीति की क्रेडिबिलिटी पर शक पैदा होता है.” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में चुप्पी तटस्थता नहीं है, बल्कि ‘कर्तव्यहीनता’ है.
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इजरायल दौरे की टाइमिंग पर उठाया सवालसोनिया गांधी ने कहा, “टाइमिंग की वजह से यह बेचैनी और बढ़ गई है. खामेनेई की हत्या से 48 घंटे पहले, प्रधानमंत्री इजरायल के दौरे से लौटे थे. यहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के लिए अपने समर्थन को दोहराया था. जबकि गाजा संघर्ष में आम लोगों की मौतों से दुनिया भर में गुस्सा है.”
उन्होंने आगे पूछा कि अगर भारत आज अपने क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांत की रक्षा करने में हिचकिचा रहा है, तो ग्लोबल साउथ के देशों को कल इस पर (भारत पर) भरोसा क्यों करना चाहिए कि भारत उनकी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करेगा?
कांग्रेस नेता ने कहा कि मौजूदा सरकार को यह याद रखना चाहिए कि अप्रैल 2001 में, उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तेहरान के ऑफिशियल दौरे के दौरान, ईरान के साथ भारत के गहरे रिश्तों को गर्मजोशी से दोहराया था. उन्होंने आरोप लगाया, “उन लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को मानना हमारी मौजूदा सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखता.”
सोनिया गांधी ने कहा कि भारत ने लंबे समय से 'वसुधैव कुटुम्बकम' के आदर्श को अपनाया है, यानी दुनिया एक परिवार है. आगे कहा, "यह सिर्फ औपचारिक डिप्लोमेसी का नारा नहीं है. इसका मतलब है न्याय, संयम और बातचीत के लिए कमिटमेंट, भले ही ऐसा करना मुश्किल हो."
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