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नागरिकता मिलने से पहले वोटर कैसे बनीं? सोनिया गांधी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में दिया अपना जवाब

Congress सांसद Sonia Gandhi के खिलाफ विकास त्रिपाठी नामक शख्स ने आपराधिक कार्रवाई करने की मांग की. आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने नागरिकता लेने से तीन साल पहले भारत की वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया था.

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कांग्रेस की सीनियर नेता सोनिया गांधी. (फाइल फोटो: आजतक)
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संजय शर्मा

कांग्रेस की सीनियर नेता सोनिया गांधी ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है. यह जवाब बिना भारतीय नागरिकता लिए वोटर बनने के आरोप से जुड़े मामले में दाखिल किया गया है. इससे पहले, कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ दायर एक पिटीशन याचिका पर उनसे जवाब मांगा था. इस मामले में अब अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी.

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कहां से हुई शुरुआत?

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, विकास त्रिपाठी नामक शख्स ने सोनिया गांधी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने नागरिकता लेने से तीन साल पहले भारत की वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया. त्रिपाठी का आरोप है कि सोनिया गांधी जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके भारत की मतदाता बनी थीं.

इसके लिए उन्होंने एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी. लेकिन निचली अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी. 11 सितंबर 2025 को आए निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उन्होंने राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

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इसके बाद स्पेशल जज विशाल गोगने ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दर्ज याचिका पर नोटिस जारी किए. ये नोटिस सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को जारी किए गए. साथ ही कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा. अब सोनिया गांधी ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. 

सोनिया गांधी पर शिकायत में क्या कहा गया?

याचिकाकर्ता ने शिकायत दी कि 1980 में सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में जुड़ा, जबकि उन्हें अप्रैल 1983 में भारत की नागरिकता मिली थी. आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1982 में वोटर लिस्ट से डिलीट हुआ, लेकिन 1983 में फिर से जुड़ गया.

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACMM) वैभव चौरसिया ने 11 सितंबर को त्रिपाठी की अर्जी खारिज कर दी थी. उन्होंने कहा था कि याचिकाकर्ता ने गांधी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला बनाने की कोशिश की है. मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा था कि लेकिन कथित अपराधों को बनाने के लिए जरूरी बुनियादी चीजों की कमी है.

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मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आगे कहा था कि जरूरी जानकारी दिए बिना और बगैर सबूतों का दावा, FIR दर्ज करवाने का कारण नहीं बन सकता. मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आगे कहा कि त्रिपाठी सिर्फ इलेक्टोरल रोल के एक हिस्से पर भरोसा कर रहे हैं, जो साल 1980 के अनसर्टिफाइड इलेक्टोरल रोल के कथित हिस्से की फोटोकॉपी की फोटोकॉपी है.

ACMM वैभव चौरसिया ने ये भी कहा था कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल या बाहर करने की योग्यता तय करना पूरी तरह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का मामला है.

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