कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रोटेस्ट से पहले अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और ध्रुव राठी जैसे आंदोलन के नेताओं की गिरफ्तारी पर सोनम वांगचुक ने सरकार को ‘चेतावनी’ दी है. शनिवार, 10 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि अगर रविवार, 11 अक्टूबर तक सभी हिरासत में लिए गए नेताओं को नहीं छोड़ा गया तो वह फिर भूख हड़ताल पर जा सकते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि इसकी नौबत नहीं आएगी और इससे पहले ही सरकार मामले को सुलाझा लेगी. वांगचुक ने जुलाई 2026 में सीजेपी के मंच से दो हफ्तों से ज्यादा की भूख हड़ताल की थी. तब उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान को नीट पेपर लीक के लिए जिम्मेदार बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी, जो पूरी भी हुई.
सोनम वांगचुक फिर भूख हड़ताल करेंगे? गिरफ्तारियों पर सरकार को दे दिया अल्टिमेटम
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले नेताओं की गिरफ्तारी पर सोनम वांगचुक ने नाराजगी जताई है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रविवार, 11 अक्टूबर तक सभी हिरासत में लिए गए नेताओं को नहीं छोड़ा गया, तो वह अनशन, धरना या पदयात्रा शुरू कर सकते हैं.

सोनम वांगचुक ने एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से जुड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें पता चला है कि दिल्ली में कई गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनमें छात्र नेता, युवा नेता, वकील, पत्रकार और यहां तक कि सांसद भी शामिल हैं. वांगचुक ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले 9 अक्टूबर को आंदोलन में शांति और एकता बनाए रखने की अपील की थी, तब उन्हें लगा था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट की इजाजत तो दी ही जाएगी लेकिन अब लग रहा है, जैसे देश भर में अघोषित आपातकाल लगा है. वांगचुक ने कहा,
मैं इस बात की कड़ी निंदा करता हूं और सरकार से निवेदन करता हूं कि ये सब गिरफ्तारियां खत्म कर दी जाएं. आज (10 अक्टूबर की) शाम तक मामलों को सुलझाया जाए.
सोनम वांगचुक ने ऐलान किया कि अगर अगले 24 घंटों में भी गिरफ्तारियां खत्म नहीं की गईं तो वह भी एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर विचार करने के लिए मजबूर हो जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि यह प्रोटेस्ट एक धरना प्रदर्शन भी हो सकता है. अनशन हो सकता है या पदयात्रा भी हो सकती है. ये दिल्ली में या फिर लेह में भी हो सकती है. वांगचुक ने उम्मीद जताई कि वो चाहते हैं कि सरकार इससे पहले ही बातचीत से मसले को सुलझा ले ताकि उन्हें ये सब करने की जरूरत न पड़े.
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आंदोलन में हिस्सा लेने से मना किया थाबता दें कि सीजेपी के आंदोलन से एक दिन पहले 9 अक्टूबर को फैज अहमद फैज का शेर पढ़ते हुए सोनम वांगचुक ने कहा था कि वो जंतर-मंतर के प्रोटेस्ट में हिस्सा नहीं लेंगे. उन्होंने बताया था कि वह आने वाली सर्दियों की तैयारियों में व्यस्त हैं, जिसमें 'पानी की सुरक्षा के लिए कृत्रिम ग्लेशियर बनाने, GLOF (ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़) से सुरक्षा के लिए एक्सपेरिमेंट करने और ऊंचे हिमालय में मौजूद 200 से अधिक खतरनाक वॉटर बमों को बेअसर करने जैसे काम' शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इसी वजह से वो दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट में शामिल नहीं हो पाएंगे. फैज अहमद फैज की मशहूर नज्म 'और भी गम हैं जमाने में सियासत के सिवा' कहते हुए सोनम वांगचुक ने अपनी बात खत्म की थी.
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