केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को एक डिस्ट्रिक्ट जज की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है. जज के नाबालिग बेटे पर आरोप है कि उसने मर्सिडीज-बेंज कार एक्सीडेंट में एक स्कूटर सवार को टक्कर मारी थी. इस हादसे में स्कूटर सवार की मौत हो गई. इसी मामले में जज को भी आरोपी बनाया गया है. ये आदेश तब आया जब जज ने अदालत को बताया कि गाड़ी उनके घर से उनकी जानकारी के बिना ले जाई गई थी.
मर्सिडीज से कुचलने वाले केस में जज को राहत, HC ने अग्रिम जमानत याचिका की मंजूर
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को मर्सिडीज कार क्रैश मामले में डिस्ट्रिक्ट जज की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. जज के नाबालिग बेटे पर लग्जरी गाड़ी चलाते हुए स्कूटर सवार को टक्कर मारने का आरोप है. इस हादसे में 55 साल के स्कूटर सवार की मौत हो गई.

घटना रविवार, 25 अक्टूबर की है. एर्नाकुलम जिले के कोच्ची शहर के चेरानल्लूर इलाके में रात 2 बजे 55 साल के जयाबालकृष्णन अपने घर लौट रहे थे. वे पेशे से फ़ूड वेंडर थे. तभी एक तेज रफ़्तार मर्सिडीज कार ने उन्हें टक्कर मारी, जिससे उनकी मौत हो गई. आरोप है कि गाड़ी जज का बेटा (17 साल) चला रहा था, जो जिला जज के नाम पर ही रजिस्टर है. इसी मामले में जज ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका डाली है.
इस बीच, केरल के गृह विभाग ने चेरानल्लूर पुलिस थाने के चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. इन पर आरोप है कि उन्होंने जज के बेटे को बचाने की कोशिश की और पीड़ित के परिवार के साथ दुर्व्यवहार किया.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने कहा,
‘चूंकि आवेदक केरल राज्य में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कैडर में कार्यरत एक न्यायिक अधिकारी हैं. इसलिए उनके फरार होने या कानूनी प्रक्रिया से बचने का कोई सवाल ही नहीं उठता. दूसरे प्रतिवादी ‘(चेरानाल्लूर पुलिस स्टेशन के एसएचओ) या इस मामले की जांच से जुड़े किसी भी अन्य पुलिस अधिकारी को, अगले आदेश तक आवेदक को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए.
हाई कोर्ट के जज ने बताया कि आरोपी जज फिलहाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में कार्यरत हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है. अपने आदेश में, हाई कोर्ट ने जज को गुरुवार दोपहर 1 बजे जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही, कोर्ट ने केस की अगली सुनवाई 5 नवंबर के लिए तय कर दी है.
अग्रिम जमानत याचिका में बताया गया कि जज पुलिस के सामने पेश हुए थे और उनसे चार घंटे तक पूछताछ की गई थी. जज की तरफ से पेश हुए वकील जॉन सेबेस्टियन राल्फ ने बताया कि उनके बेटे ने घर से गाड़ी निकाल ली है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं थी. उन्हें इस बारे में तब पता चला जब रात 2:14 बजे उनके बेटे का फ़ोन आया कि गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है.
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पीड़ित परिवार ने बेल का किया विरोधअदालत ने माना कि जज के परिसर की तलाशी ली गई है और उनके डिजिटल डिवाइस को भी जब्त कर लिया गया है. जज के बेटे के खिलाफ BNS की धारा 105 और MV एक्ट की धाराओं 181 व 183 के तहत मामला दर्ज किया गया है. जज को MV एक्ट की धारा 199A के तहत आरोपी बनाया गया है. ये धारा नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों और वाहन मालिकों की जिम्मेदारी से संबंधित है.
दूसरी तरफ, पीड़ित की बेटी भद्र कीर्ति का कहना है कि जज अपना पीछा छुड़ाने के लिए सभी पैंतरे अपना रहे हैं. लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं होंगे. इसी कड़ी में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, एर्नाकुलम ने नाबालिग को ज़मानत दे दी है. मगर राज्य सरकार ने नाबालिग को मिली इस ज़मानत को रद्द कराने के लिए सेशंस कोर्ट का रुख किया है.
जयाबालकृष्णन की पत्नी ने राज्य सरकार की इस याचिका में खुद को एक पक्ष बनाने के लिए अर्ज़ी दायर की है. हाईकोर्ट ने उन्हें पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी है.
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