सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर बड़ा खुलासा किया है. एक पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस की बर्बरता के बाद पार्टी ने प्रोटेस्ट ख़त्म करने का मन बना लिया था. पुलिस एक्शन के बाद स्टेज तोड़ दिया गया था और कई प्रदर्शनकारी धरने वाली जगह छोड़ चुके थे. सोनम वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को ये बात बताने भी वाले थे. फिर क्या हुआ?
CJP प्रोटेस्ट में क्या हुआ था? सोनम वांगचुक ने खुद बताया- 'कोई उम्मीद नहीं थी, 20 जुलाई को मैसेज भेजा...'
Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक ने बताया कि 20 जुलाई को जंतर मंतर प्रोटेस्ट के बाद क्या हुआ था. उन्होंने कहा कि CJP लीडर्स ने उनसे एक मैसेज लिखने को कहा था. मैसेज में बताना था कि प्रोटेस्ट ख़त्म हो गया है और अब प्रदर्शनकारियों को घर लौट जाना चाहिए.

सोनम ने बताया कि CJP लीडरशिप ने उनसे कहा था कि वो एक मैसेज ड्राफ्ट करें जिसमें लोगों को घर जाने को कहा जाए. उन्होंने ऐसा एक मैसेज लिखा भी था लेकिन बाद में वो पोस्ट नहीं हुआ. 20 जुलाई को पुलिस एक्शन के बाद प्रदर्शनकारियों का मनोबल टूट गया था. दिन में जहां सैंकड़ों लोगों का सैलाब था शाम होते-होते सब घर लौट गए थे. इससे लीडरशिप का भी मोराल डाउन हुआ था.
सोनम बताते हैं कि ऐसा लग रहा था मानो प्रोटेस्ट दोबारा शुरू ही नहीं हो पाएगा. लेकिन घनी अंधेरी रात के बाद सुबह हुई. उन्होंने कहा, ‘सुबह की पहली किरण के साथ ही छात्र प्रोटेस्ट साइट पर वापस आना शुरू कर चुके थे. यह फिर से नई उम्मीद की तरह था.’
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क्यों मैसेज नहीं लिखा?सोनम वांगचुक ने कहा कि प्रोटेस्ट साइट की ताकत वहां मौजूद प्रोटेस्टर थे. 20 जुलाई को जो जंतर-मंतर लगभग खाली हो चुका था वो एक बार फिर छात्रों से गुलज़ार हो गया. सोनम बताते हैं कि 21 जुलाई को बहुत से छात्र वापस लौट आए. वो भी जिन्होंने एक शाम पहले पुलिस की लाठी खाई थी. छात्रों के कॉन्फिडेंस से प्रोटेस्ट साइट फिर खड़ा हुआ. छात्रों के जोश ने प्रोटेस्ट में एक बार फिर जान फूंक दी.
पॉडकास्ट में सोनम ने ये भी बताया कि कैसे उन्होंने प्रोटेस्ट ख़त्म करने के अन्य तरीके अपनाए थे. CJP ने सरकार के साथ बातचीत से पहले विपक्षी पार्टी के नेता राहुल गांधी के सामने प्रस्ताव रखा था. हमने कहा कि संसद में जाकर राहुल गांधी के हाथों से सोनम वांगचुक का अनशन तोड़ना चाहते हैं. लेकिन उनकी तरफ से पॉजिटिव रेस्पॉन्स नहीं आया. सोनम का कहना है कि सत्ता और विपक्ष दोनों ने आंदोलन की बराबर आलोचना की.
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