कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के दो महीने बाद सिद्दारमैया को ‘राजनीति से संन्यास लेने के ख्याल’ आने लगे हैं. शनिवार, 25 जुलाई को उन्होंने ऐलान किया कि वह साल 2028 में होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. इसी चुनावी साल (2028) में वह अपने राजनीतिक सफर के 50 साल पूरे करेंगे. सिद्दारमैया ने कहा कि उनके चुनाव क्षेत्र वरुणा के लोगों ने उनसे दोबारा चुनाव लड़ने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने मन बना लिया है कि अब वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. पॉलिटिक्स में ऐक्टिव रहेंगे. लोगों के साथ खड़े रहेंगे. उनके लिए आवाज भी उठाते रहेंगे लेकिन चुनाव नहीं लड़ेंगे.
सिद्दारमैया अब चुनाव नहीं लड़ेंगे, दूसरी वजह सुनकर चौंक जाएंगे
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने घोषणा की है कि वह 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, हालांकि राजनीति में सक्रिय रहेंगे. उन्होंने उम्र और सेहत को इसकी वजह बताई है.

2028 में चुनाव न लड़ने की सिद्दारमैया ने जो वजह बताई है, उनमें से पहला कारण तो ठीक है कि उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं हैं, जिसकी वजह से उन्होंने ये फैसला लिया है. दूसरा कारण जो पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया है, वो सियासी गलियारे में एक नई बहस को जन्म दे सकता है. सिद्दारमैया ने बताया कि राजनीति में भ्रष्टाचार बढ़ने के कारण वह चुनाव से दूर हो रहे हैं. मांड्या जिले में एक निजी कार्यक्रम में बोलते हुए सिद्दारमैया ने कहा,
राजनीति में भ्रष्टाचार का बोलबाला हो गया है. इसलिए मैंने 2028 के विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया है. हालांकि, मैं राजनीति में ऐक्टिव रहूंगा और लोगों के साथ खड़ा रहूंगा. उनकी परेशानियों और खुशियों के लिए आवाज उठाता रहूंगा.
सिद्दारमैया ने कहा कि उनके चुनाव क्षेत्र वरुणा के लोग उनसे दोबारा चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे थे, लेकिन उन्होंने दोबारा चुनाव न लड़ने का मन बना लिया है.
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दो महीने पहले छोड़ा था सीएम पदबता दें कि दो महीने पहले ही सिद्दारमैया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था. उनके बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया. कर्नाटक में चुनाव होने में अब दो साल से भी कम समय है. ऐसे में सिद्दारमैया का यह फैसला प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति को लेकर बड़ा झटका हो सकता है.
1978 में तालुक बोर्ड सदस्य बनकर राजनीतिक सफर शुरू करने वाले सिद्दारमैया 2028 तक राजनीति में 50 साल पूरे कर लेंगे. उन्होंने कहा कि अपने पूरे राजनीतिक करियर में मैंने जीत और हार दोनों देखी है लेकिन मुझे इस बात का संतोष है कि मैंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और न ही कभी अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम किया.
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