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"पंजाब में ही क्यों लैंड हो रही है अवैध प्रवासियों की फ्लाइट?" डिपोर्टेशन पर पंजाब के मंत्री का सवाल

15 फरवरी को उतरे वाली फ्लाइट में 119 अवैध प्रवासी होंगे. इनमें 67 पंजाब, 33 हरियाणा और 19 लोग गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के हैं. फ्लाइट सुबह 10.05 पर अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड करेगी. वहीं 16 फरवरी को फ्लाइट रात में लैंड करेगी.

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5 फरवरी को अमेरिकी सेना के विमान से अवैध प्रवासियों का पहला बैच आया था. (फोटो- फाइल)
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असीम बस्सी

अमेरिका से डिपोर्ट किए गए अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants In Amercia) को लेकर दो और फ्लाइट्स भारत आ रही हैं. पहली फ्लाइट 15 फरवरी को जबकि दूसरी फ्लाइट 16 फरवरी को लैंड करेगी. पिछली बार की तरह इस बार भी अमेरिका से आने वाली फ्लाइट्स पंजाब के अमृतसर में ही उतरेगी. डिपोर्ट किए गए अवैध प्रवासियों का पहला बैच 5 फरवरी को भारत आया था. 

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इंडिया टुडे की ख़बर में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि 15 फरवरी को लैंड करने वाली फ्लाइट में 119 अवैध प्रवासी होंगे. इनमें 67 पंजाब, 33 हरियाणा और 19 लोग गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के हैं. फ्लाइट सुबह 10.05 पर अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड करेगी. वहीं 16 फरवरी को फ्लाइट रात में लैंड करेगी. इसे लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी और राज्य सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.

विमान को अमृतसर में उतारने के फैसले पर पंजाब के मंत्री ने भारत सरकार की आलोचना की है. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जानबूझकर पंजाब को निशाना बना रही है. 

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चीमा ने कहा, 

सरकार यह सुनिश्चित करके पंजाब को बदनाम करना चाहती है कि डिपोर्ट किए गए भारतीयों को लाने वाली फ्लाइट अमृतसर में उतरे. हरियाणा या गुजरात क्यों नहीं? यह साफ तौर पर बीजेपी द्वारा पंजाब की छवि खराब करने की कोशिश है. फ्लाइट को अहमदाबाद में उतरना चाहिए. 

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पहले पुष्टि की थी कि अमेरिका ने भारत को 487 अवैध प्रवासियों के डिपोर्टेशन के आदेश आदेश जारी किए गए हैं. इससे पहले जो फ्लाइट अवैध प्रवासी भारतीयों को लेकर आई थी उसमें 104 लोग शामिल थे. इनमें सबसे ज़्यादा पंजाब, हरियाणा और गुजरात के अवैध प्रवासी भारतीय थे. यह फ्लाइट भी अमृतसर ही लैंड की थी. 

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वापस भेजे गए लोगों ने फ्लाइट में उनके साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया था. आरोप था कि उड़ान के दौरान उनके हाथ-पैरों में बेड़ियां लगाई गईं. इससे जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे. इस मुद्दे को लेकर संसद में विपक्ष ने हंगामा भी किया था. 

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने माना था कि अवैध प्रवासियों को चेन से बांधा गया था. उन्होंने कहा था कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. अमेरिका में अवैध प्रवासियों को लेकर यही नियम है. वापसी अमेरिकी नियमों के मुताबिक ही हुई है. लेकिन सरकार अपने नागरिकों के साथ सही बर्ताव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

वहीं, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अमानवीय व्यवहार के मुद्दे पर चिंता बताई थी. उन्होंने आश्वासन दिया था कि भारत सरकार इस मामले को अमेरिकी अधिकारियों के सामने उठाएगी.

सीनियर वकील के. के. मन्नान ने इंडिया टुडे से बात करते हुए बताया था कि डिपोर्ट किए गए लोगों पर भारत में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, जब तक कि वे नकली/फर्जी दस्तावेजों के साथ यात्रा न करें.

मोदी बोले- अवैध प्रवासियों को वापस लेने को तैयार

अमेरिकी दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर कहा कि सरकार उन नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार है जो अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हैं. मोदी ने बात राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही. उन्होंने कहा, 

जो लोग दूसरे देशों में अवैध रूप से रह रहे हैं, उन्हें वहां रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. जहां तक ​​भारत और अमेरिका का सवाल है, हमने हमेशा कहा है कि जो लोग वेरिफाइड हैं और वास्तव में भारत के नागरिक हैं, अगर वे अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हैं तो भारत उन्हें वापस लेने के लिए तैयार है.

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकारों को मानव तस्करी की पूरी व्यवस्था पर हमला करना चाहिए जो परिवारों को गुमराह करके अमेरिका में लाती है. हमारी लड़ाई डंकी रूट के इस पूरे सिस्टम के खिलाफ है. हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस तंत्र को खत्म करने में भारत के साथ पूरा सहयोग करेंगे.

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