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राम मंदिर का दान गिनने वाले के घर 10 लाख मिले, गोबर में छिपाकर रखे थे पैसे

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया है. मामले में चढ़ावे की गिनती करने वाले एक कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है, जिसके घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं.

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राम मंदिर के चढ़ाने में गबन का मामला गरमाया हुआ है. (फोटो- India Today)

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  • राम मंदिर के लिए मिले चंदे के गबन मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, जिसमें लखनऊ के कमिश्नर विश्वास पंत को टीम का प्रमुख बनाया गया है और रिपोर्ट पेश करने की समय सीमा निर्धारित की गई है।
  • इस मामले की शुरुआत 7 जून 2026 को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा चंदे में हेरफेर के आरोप लगाने से हुई, जिसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव ने इस आरोप का खंडन किया।
  • एसआईटी ने आरोपी लवकुश मिश्र को गिरफ्तार किया है, जिनके घर से 10 लाख रुपये बरामद हुए हैं, और आगे की जांच के तहत अन्य कर्मचारी भी हिरासत में लिए गए हैं।

राम मंदिर के लिए मिले दान के गबन मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बना दी गई है. लखनऊ के कमिश्नर आईएएस विश्वास पंत को जांच टीम का हेड बनाया गया है. उनके अलावा टीम में आईपीएस किरन एस और स्पेशल फाइनेंस सेक्रेट्री नील रतन भी शामिल किए गए हैं. इस एसआईटी को 7 दिनों के भीतर प्रिलिमिनरी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं, उसके बाद 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी. इसी बीच, गबन केस में एक शख्स की गिरफ्तारी भी हुई है. आरोपी मंदिर के चढ़ावे की गिनती करने का काम करता था और उसके घर से 10 लाख रुपये बरामद किए गए हैं.

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पूरी खबर क्या है, चलिए विस्तार से जानते हैं.  

ये पूरा विवाद 7 जून 2026 से शुरू हुआ था. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर राम मंदिर को लेकर एक पोस्ट करके हड़कंप मचा दिया था. उन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर की गई है. इस बहाने उन्होंने केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार को भी घेरा था. इसके बाद राम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को केस पर सफाई देनी पड़ी. उन्होंने कहा कि राम मंदिर के चंदे का समय-समय पर ऑडिट होता रहता है. वही काम चल रहा है.  

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चंपत राय ने तो किसी हेरफेर से इनकार किया है लेकिन इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े मयंक शुक्ला की रिपोर्ट के मुताबिक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने रुदौली से लवकुश नाम के एक शख्स को पकड़ा है, जो राम मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने का काम करता था. लवकुश के घर से तकरीबन 10 लाख रुपये भी बरामद किए गए हैं. इनमें से कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी. वहीं, कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी.

आरोपी लवकुश के पिता बच्चूलाल ने बताया कि वो 4-5 महीने से राम मंदिर में नौकरी कर रहा था. इसी दौरान वहां चोरी की घटना हुई. जांच के सिलसिले में कुछ लोग लवकुश के घर आए और तलाशी ली और जगह-जगह से पैसे बरामद किए. हालांकि, बरामद पैसे के सोर्स के बारे में कोई अंतिम जानकारी नहीं दी गई है. इसकी जांच जारी है.

बताया गया कि लवकुश के घर पहुंची जांच टीम में 6 सदस्य शामिल थे. इनमें दो पुलिसकर्मी वर्दी में और 4 सिविल ड्रेस में थे. गांव के लोगों का कहना है कि राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद लवकुश मिश्रा की आर्थिक स्थिति तेजी से बदली थी.

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एक और कर्मचारी हिरासत में

रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कामों की थी. बताया जा रहा है कि दोनों को हर महीने लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में कथित तौर पर उनकी प्रॉपर्टी में हैरान करने वाली बढ़ोतरी हुई. ये बढ़त जांच एजेंसियों के रडार पर है. 

जानकारी के मुताबिक, एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन खरीदी. जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है. आरोपी लवकुश मिश्र के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि उनका बेटा बेकसूर है. उन्होंने माना कि जांच टीम को उनके घर से 10 लाख रुपये मिले हैं लेकिन फैजाबाद में किसी बन रहे मकान से उनके बेटे का कोई संबंध नहीं है. उनका दावा है कि मकान बनाने के लिए उन्होंने अपनी खेती की जमीन गिरवी रखी है.

नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या पहुंचे

इधर, चंदे का मामला गरमाया तो राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के अंदर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि, उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कामों की निगरानी करना है.

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