अगर ट्रेन के AC कोच में आपके साथ लूटपाट होती है और कोई जबरदस्ती आपका सामान छीन लेता है, तो इसमें किसकी गलती है? आपकी या भारतीय रेलवे की? आपकी आसानी के लिए हम एक ट्रेन लूटपाट का केस बता रहे हैं. ये 8 साल पुराना मामला है, जिसमें रेलवे की लापरवाही सामने आई. कंज्यूमर कमीशन ने इस मामले में रेलवे को पीड़ित यात्री को मुआवजा देने का आदेश दिया है.
ट्रेन के AC कोच में लूटपाट, रेलवे की एक गलती ने अब यात्री को दिलाया बड़ा मुआवजा
शिकायत के मुताबिक, वीना डोभाल नाम की यात्री जब ट्रेन की बर्थ पर सो रही थीं, तो कोच में घुसे एक शख्स ने उनका पर्स छीन लिया. उनके परिवार के लोगों और साथी यात्रियों ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वो चलती ट्रेन से कूद गया.

उत्तराखंड स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने देहरादून डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन का फैसला बरकरार रखा. 2 जुलाई 2018 को मथुरा के पास मेवाड़ एक्सप्रेस के रिजर्व्ड एसी कोच में एक परिवार के साथ लूटपाट की घटना हुई. चोर तड़के कोच में घुसे और परिवार का सामान लूटकर फरार हो गए. पीड़ित परिवार ने FIR दर्ज कराई.
कितना मुआवजा मिलेगा?FIR के बाद भी कुछ राहत नहीं मिली, तो देहरादून डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन में शिकायत की गई. जिला कमीशन ने मामले में रेलवे की लापरवाही मानी. 11 मई 2022 को जिला कमीशन ने रेलवे को आदेश दिया कि वो शिकायत करने वालों को नुकसान की भरपाई के लिए 37,222 रुपये, मानसिक पीड़ा के लिए 25,000 रुपये और मुकदमा खर्च के लिए 10,000 रुपये अदा करे.
जिला कमीशन के फैसले के खिलाफ भारत सरकार और भारतीय रेलवे ने अपील की. उत्तराखंड स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन की प्रेसिडेंट कुमकुम रानी और मेंबर बीएस मनराल ने भी जिला कमीशन के फैसले को सही माना.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अक्टूबर के आदेश में स्टेट कमीशन ने रेलवे को शिकायतकर्ता को कुल 47,222 रुपये अदा करने का आदेश दिया. इसमें 37,222 रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये का कानूनी खर्च शामिल है. इसके अलावा, 37,222 रुपये पर 31 जुलाई 2020 से पेमेंट होने तक 7 फीसदी सालाना ब्याज भी देने का आदेश दिया.
क्या है पूरा मामला?पीड़ित परिवार 1 जुलाई 2018 को राजस्थान के उदयपुर से नई दिल्ली जाने के लिए मेवाड़ एक्सप्रेस के रिजर्व्ड एसी कोच में सफर कर रहा था. 2 जुलाई को ट्रेन दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंची. परिवार के मुताबिक, सफर के दौरान जब सुबह 4 बजे ट्रेन मथुरा पहुंची, तो कुछ लोग कोच में घुसे और जबरन दो यात्रियों का सामान छीन लिया.
शिकायत के मुताबिक, वीना डोभाल नाम की यात्री जब ट्रेन की बर्थ पर सो रही थीं, तो कोच में घुसे एक शख्स ने उनका पर्स छीन लिया. उनके परिवार के लोगों और साथी यात्रियों ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वो चलती ट्रेन से कूद गया.
यात्रियों ने कोच अटेंडेंट, RPF और TTE को खोजा, लेकिन उस समय कोच में कोई नहीं मिला. बाद में TTE से संपर्क कर चोरी की घटना बताई. 2 जुलाई 2018 को सुबह 7:50 बजे हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने जीरो FIR दर्ज कर ली गई. पीड़िता का आरोप है कि जांच के नतीजों की जानकारी उन्हें नहीं दी गई. इसके बाद वे कंज्यूमर कमीशन गए.
भारतीय रेलवे ने अपने अपनी लापरवाही नहीं मानी. तर्क दिया कि यात्री खुद अपने सामान की हिफाजत करने के लिए जिम्मेदार हैं. रेलवे ने सामान खोने या नुकसान पर रेलवे एक्ट प्रावधानों पर जोर दिया. रेलवे ने कहा कि परिवार ने ना तो रेलवे में लगेज बुक किया, ना ही कीमती सामान साथ ले जाने की जानकारी दी.
रेलवे की ये गलती पकड़ गईरेलवे ने कमीशन को बताया कि यात्रियों को समझाया गया था कि कोच में चेन के जरिए अपने सामान की सुरक्षित कर लें, लेकिन परिवार ने उनकी बात नहीं मानी. रेलवे ने ये जरूर माना कि रिजर्व्ड कोच केवल अथोराइज्ड पैसेंजर्स के लिए ही होता है, और कोच अटेंडेंट और TTE रात को ट्रेन कोच के गेट बंद करने के लिए जिम्मेदार होते हैं.
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कंज्यूमर कमीशन ने रेलवे की यही बात पकड़ ली. यात्रियों ने भी मामले में यही पक्ष रखा कि रात में गेट बंद करने की जिम्मेदारी रेलवे की थी, जिसमें वो नाकाम रहा. इसी आधार पर जिला और राज्य कमीशन ने रेलवे की लापरवाही मानते हुए शिकायतकर्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया.
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