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दीक्षा-दर्शन पर रोक, प्रेमानंद महाराज के आश्रम के सेवक-सेविकाओं की ड्रेस क्यों बदली गई?

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद प्रेमानंद महाराज के आश्रम में काफी कुछ बदल गया है. यमुना विहार कुंज बेलवान में दीक्षित भक्तों (जिसने गुरु से दीक्षा ली हो) के दर्शन की व्यवस्था रोक दी गई है. केली कुंज में दीक्षा कार्यक्रम भी बंद कर दिया गया है.

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आश्रम के सेवादार ने माइक के जरिए भक्तों को दीक्षा बंद की जानकारी दी. (Photo: ITG)

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  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद केली कुंज आश्रम में दीक्षा कार्यक्रम और टोकन से दर्शन अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं।
  • रसिक दुलारी शरण ने 25 सितंबर को केली कुंज की चार मंजिला बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या की थी, जिससे आश्रम प्रशासन ने सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था में बदलाव किए।
  • आश्रम में दर्शन व्यवस्था और सेवा से जुड़े साधकों की वेशभूषा में बदलाव किया गया है, साथ ही पुलिस घटना की जांच के लिए फोरेंसिक जांच और कैमरा फुटेज का विश्लेषण कर रही है।

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद आश्रम में काफी कुछ बदल गया है. सबसे पहले तो केली कुंज में दीक्षा देने का कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है. साथ ही टोकन से होने वाले दर्शन भी बंद कर दिए गए हैं.

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इसके अलावा यमुना विहार कुंज बेलवान में दीक्षित भक्तों (जिसने गुरु से दीक्षा ली हो) के दर्शन की व्यवस्था भी रोक दी गई है. यानी फिलहाल आश्रम पहुंचने वाले लोगों के लिए पहले जैसी व्यवस्था नहीं रहेगी. फिलहाल इसे अनिश्चितकालीन रोक ही माना जा रहा है.

दूसरा बड़ा बदलाव दर्शन व्यवस्था में हुआ है. टोकन के जरिए होने वाले दर्शन को भी अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है. यह बदलाव इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग आश्रम की दर्शन व्यवस्था के तहत पहुंचते हैं. टोकन व्यवस्था बंद होने का मतलब है कि लोगों को पहले की तरह टोकन लेकर दर्शन की सुविधा फिलहाल नहीं मिलेगी.

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यमुना विहार कुंज बेलवान में भी रोक 

बदलाव सिर्फ केली कुंज तक सीमित नहीं है. यमुना विहार कुंज बेलवान वाले आश्रम में, दीक्षित लोगों के दर्शन की जो व्यवस्था चल रही थी, उसे भी बंद कर दिया गया है. यानी केली कुंज में दीक्षा और टोकन दर्शन पर रोक लगा दी गई है. साथ ही, दीक्षित भक्तों के लिए यमुना विहार कुंज बेलवान में होने वाले दर्शन भी फिलहाल बंद हैं.

आश्रम की व्यवस्थाओं में एक और बदलाव देखने को मिला है. सेवा व्यवस्था में लगे सेवादारों की वेशभूषा में भी बदलाव किया गया है. आश्रम से जुड़े साधक-साधिकाओं की ड्रेस बदली गई है. सफेद कपड़े पहनने वाले साधक अब इस पहनावे में नजर नहीं आ रहे हैं. 

वहीं, पीला अचला पहनने वाले अधिकांश साधकों ने भी अचला पहनना बंद कर दिया है. हालांकि, आश्रम प्रबंधन की ओर से अभी ड्रेस कोड में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. पर आश्रम से जुड़ा एक मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें पूज्य महाराज की आज्ञा का हवाला देते हुए नई वेशभूषा में आने के लिए कहा गया है.

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कैसे हुई शिष्य की मौत?

ये सारे फैसले रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद लिए गए है. 25 सितंबर को दीपक लोधी ने चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी. वो वरहा घाट इलाके की 4 मंजिला गुरु कृपा कुंज बिल्डिंग में 3 महीने से रह रहे थे. बिल्डिंग प्रेमानंद के ट्रस्ट केली कुंज की है. इसमें प्रेमानंद के आश्रम से जुड़े 50 से ज्यादा शिष्य और सेवादार रहते हैं. यह बिल्डिंग प्रेमानंद महाराज के पुराने केली कुंज आश्रम से 500 मीटर दूर है. इसी बिल्डिंग के चौथे फ्लोर से कूदकर रसिक दुलारी ने जान दे दी.

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले कमरे में क्या हुआ था. इसी के लिए अपार्टमेंट का डीवीआर, ब्लड सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं. घटना से पहले रसिक दुलारी की किससे बातचीत हुई थी. प्रेमानंद के शिष्य की मौत मामले में अभी तक आधिकारिक तौर पर आश्रम प्रबंधन की ओर से कैमरे के सामने कोई बयान सामने नहीं आया है. पर हां, आश्रम में सेवा से जुड़े सेवादारों ने जरूर माइक के जरिए भक्तों को नई व्यवस्थाओं की जानकारी दी. 

वीडियो: यूपी बुलेटिन: प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की मौत कैसे हुई?

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