क्या देश में अब कोचिंग संस्थानों की ही क्लास लग रही है? हालिया मामला देश के चर्चित कोचिंग ब्रांड्स में से एक, फिजिक्सवाला (Physics Wallah) का है. आरोप है कि संस्थान ने छात्रों की जेब से चुपके-चुपके पैसे निकालने का तरीका अपनाया था. इसे देखने के बाद Central Consumer Protection Authority यानी CCPA ने 5 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया.
फिजिक्सवाला पर CCPA ने लगाया जुर्माना, फीस वसूलने के नाम पर चल रहा था 'गेम', समझें केस
PhysicsWallah fined: फिजिक्सवाला पर आरोप है कि संस्थान ने छात्रों की जेब से चुपके-चुपके पैसे निकालने का ऐसा तरीका अपनाया, जिसे देखने के बाद CCPA ने 5 लाख का जुर्माना लगा दिया है. हाल ही में अथॉरिटी ने कई कोचिंग संस्थानों पर जुर्माना लगाया है.


बताया गया कि स्टूडेंट कोर्स खरीदने पहुंचे थे, लेकिन उनकी जानकारी के बिना उनकी फीस में एक्स्ट्रा अमाउंट वसूला जा रहा था. अब जिसने ध्यान दिया, वो बच गया, लेकिन जिसकी नजर नहीं गई, उसे चपत लगी. तो लाखों स्टूडेंट्स से करोड़ों रुपये कैसे वसूले गए? CCPA ने इसे गैरकानूनी क्यों माना? और आखिर ये डार्क पैटर्न नाम का खेल क्या है, जिसके कारण देश के बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान निशाने पर हैं? पूरी कहानी सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं.
क्या आरोप लगे?फिजिक्सवाला पर आरोप लगे कि ये संस्थान अपनी वेबसाइट और मोबाइल एप पर डार्क पैटर्न का इस्तेमाल कर, भ्रामक विज्ञापन दे रहा है. साथ ही, बड़ी चालाकी से छात्रों को ठग रहा है. इसके बाद अथॉरिटी ने मामले का स्वत: संज्ञान ले लिया.
फिजिक्सवाला ने अपनी वेबसाइट पर ‘डोनेट फॉर PW फाउंडेशन’ का एक ऑप्शन रखा था. ये 10 रुपये अमाउंट का प्री सेलेक्टेड चेकबॉक्स था. ये स्टूडेंट्स पर छोड़ा गया कि वे चाहें तो इसे अनचेक कर दें. लेकिन ये पहले से ही सेलेक्ट हो जाता था, ऐसे में बहुत कम लोगों का ध्यान इसपर गया. आरोप है कि बहुत से स्टूडेंट्स ने अपने कोर्स की फीस के साथ डोनेशन के पैसे भी दे दिए.
14 फरवरी 2024 से 24 दिसंबर 2025 तक यानी मोटा-माटी करीब 2 साल तक ऐसा चलता रहा. इस दौरान 21 लाख कंज्यूमर्स से करीब 2.5 करोड़ रुपए वसूले गए. CCPA की चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा ने 1 जून को मामले में फैसला सुनाया और, इसे गैरकानूनी बताया.
CCPA ने क्या बताया?Central Consumer Protection Authority यानी CCPA का काम क्या है? तो CCPA उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने वाली सरकारी संस्था है. ये भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करती है.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में फिजिक्सवाला ने दलील दी कि हमने तो डिस्क्लोज कर दिया था, लेकिन अथॉरिटी ने अपने फैसले में कहा कि महज डिस्क्लोज़ करना काफी नहीं है, बल्कि कंज्यूमर की क्लियर कंसेंट होना भी जरूरी है. कंज्यूमर डोनेशन देना चाहता है या नहीं ये उसका कॉल होगा, उसकी सहमति होगी, इसे पहले से अप्लाई नहीं किया जा सकता. CCPA ने ये भी पाया कि जिन कोर्सेज़ को ‘फ्री’ बोलकर प्रचारित किया जा रहा था, उसमें यूजर्स से ईमेल और मोबाइल नंबर लिए गए.
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फिजिक्स वाला का पक्षअथॉरिटी ने इन चीजों को Guidelines for Prevention and Regulation of Dark Patterns, 2023 का उल्लंघन माना. डार्क पैटर्न का मतलब है, वेबसाइट पर यूजर को मैन्युपुलेट करके उससे कुछ पर्चेज करवा लेना, जानकारी ले लेना या फिर कोई सर्विस सबस्क्राइब करवाना. कंपनी की तरफ से एडवोकेट प्रशांत मिश्रा और एडवोकेट राहुल दलीलें दे रहे थे. बचाव में कहा गया,
‘डोनेशन देना पूरी तरह वैकल्पिक था, कुल भुगतान राशि को वेरिफाई किए बिना कोई पेमेंट पूरी नहीं हो सकती. साथ में ये कहा गया कि नोटिस मिलने के बाद उसने एहतियातन कंपनी ने pre-ticked डोनेशन ऑप्शन को हटा दिया है.’
हालांकि, CCPA ने इस दलील को नहीं माना. अथॉरिटी ने कहा कि नोटिस जारी होने के बाद फीचर हटा देना इस बात का बचाव नहीं हो सकता कि पहले जो नियमों का उल्लंघन हुआ, उसकी जिम्मेदारी खत्म हो जाए.
CCPA का डंडा सिर्फ फिजिक्स वाला पर नहीं चला, बल्कि इसी फैसले में एक और कंपनी McAfee Software India Private Limited को डार्क पैटर्न के इस्तेमाल का दोषी माना गया. हालांकि कोचिंग संस्थानों के खिलाफ हाल के दिनों में CCPA के एक्शन का ये इकलौता मामला नहीं है. 30 मार्च 2026 को वाजीराव एंड रवि IAS स्टडी सेंटर के खिलाफ 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था.
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