बिहार के भरत भूषण तिवारी केस में सिंगर और बीजेपी नेता पवन सिंह का बयान आया है. उन्होंने कहा कि भरत समाज के लिए काम करने वाले इंसान थे और उनकी मौत की जांच होनी चाहिए. 17 जून को भरत तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी. पुलिस की गोली लगने से ठीक पहले तक भरत फेसबुक पर लाइव थे.
भरत तिवारी ने समाज के लिए काम किया, सच सामने आए... एनकाउंटर पर पवन सिंह ने उठाए सवाल
Bharat Tiwari Encounter: बिहार में 17 जून को भरत तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी. पुलिस की गोली लगने से ठीक पहले तक भरत फेसबुक पर लाइव थे. पवन सिंह ने कहा कि भरत समाज के लिए जागरूक व्यक्ति थे और गरीब, दलितों और जरूरतमंदों के लिए आवाज उठाते थे.


पवन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि भरत समाज के लिए जागरूक व्यक्ति थे और गरीब, दलितों और जरूरतमंदों के लिए आवाज उठाते थे. उन्होंने लिखा,
“भरत सिर्फ इतना चाहते थे कि नेता और प्रशासन जनता की समस्याओं का समाधान करें. वो चाहते थे कि गरीब, वंचित और बाढ़ पीड़ित परिवारों को उनके अधिकार मिल सकें. वो समाज के लिए जागरूक और संवेदनशील व्यक्ति थे. हमेशा गरीबों, असहाय, दलितों और जरूरतमंदों के लिए आवाज उठाने का काम किया.”
बीजेपी नेता ने आगे कहा कि कोरोना महामारी, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं और दूसरी कठिन परिस्थितियों में भी भरत ने अपनी क्षमता से बढ़कर समाज की सेवा की. पवन सिंह ने पुलिस के एनकाउंटर पर भी सवाल उठाए. उन्होंने लिखा,
“उनकी मौत ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है. इस घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. जो जानकारी और वीडियो चलाए जा रहे हैं, अगर वो सच हैं तो ये जरूरी है कि पूरे केस की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए. ताकि सच जनता के सामने आ सके. लोकतंत्र में हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है. कानून का शासन तभी मजबूत माना जाता है जब हर घटना की जांच निष्पक्ष रूप से हो. दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए. न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए.”
इसके बाद पवन सिंह ने लिखा कि इस केस की सख्त जांच होनी चाहिए. साथ में यह भी कहा कि वो जल्द ही भरत तिवारी के परिवार से मिलेंगे.
क्या है मामला?यह घटना 17 जून को हुई. भोजपुर जिले के शाहपुर थाना इलाके के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी और पुलिस के बीच मुठभेड़ हो गई थी. पुलिस का दावा है कि वो हथियार लेकर घूम रहे थे और पुलिस पर फायरिंग कर रहे थे. घटना से पहले भरत ने फेसबुक लाइव किया था. इसी लाइव में दिखता है कि भरत अपनी पिस्टल पुलिस की तरफ फेंक कर सरेंडर कर देते हैं. यहां लाइव बंद हो जाता है.
पुलिस का दावा है कि उसने फायरिंग करने की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने पैर में गोली मारी. इसके बाद इलाज के दौरान भरत की मौत हो गई थी. पुलिस ने बताया था कि भरत मानसिक तौर पर अस्वस्थ है. दूसरी तरफ, भरत के परिवार ने पुलिस पर 'फर्जी एनकाउंटर' करने का आरोप लगाया है. परिवार का कहना है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था. इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी.
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पुलिस ने भरत के परिवार पर भी FIR दर्ज की है. इसमें अवैध हथियार रखने, पुलिस पर फायरिंग करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगे हैं. मौत से कुछ दिन पहले भरत ने अपना एक वीडियो बनाया था. इस वीडियो में दावा किया था कि मौत के बाद उनका फोन सिर्फ उनके परिजनों को दिया जाए, क्योंकि उनके फोन में कई संवेदनशील चीजें हैं. अब वो कौन सी चीजें हैं, फिलहाल इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.
वीडियो: बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर का सच क्या है?


















