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परविंदर झोटा हत्याकांड: आरोपी के मेडिकल स्टोर पर 10 बार छापेमारी हुई थी, फिर भी चलता रहा धंधा

Parminder Singh Jhota murder: एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में आरोपी अश्विनी कुमार नेथ को गिरफ्तार किया गया था. बताया गया कि उसकी केमिस्ट की दुकान पर लगभग 10 बार छापेमारी की गई थी

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आरोपी अश्विनी कुमार नेथ की दुकान पर पुलिस ने 10 बार छापेमारी की थी. (Courtesy-इंडिया टुडे/ANI)

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  • पंजाब में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के आरोप में केमिस्ट शॉप के मालिक अश्विनी कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जो पहले भी नशीले पदार्थों के मामलों में जांच में रहा है।
  • अश्विनी कुमार के मेडिकल स्टोर पर पिछले चार वर्षों में लगभग 10 बार छापेमारी हुई थी और उस पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मामले चल रहे थे, उसके खिलाफ लाइसेंस सस्पेंड करने के दावे विवादित हैं।
  • घटना के बाद राज्य में नशाखोरी के खिलाफ नियमों को सख्त करने और अवैध दवा बिक्री रोकने के लिए सरकारी जांच और केमिस्टों के लिए नई एडवाइजरी जारी की गई है।

एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में नशाखोरी का मुद्दा फिर से चर्चा में है. परविंदर सिंह ड्रग्स बेचने का खुलासा करने एक केमिस्ट दुकान पर गए थे. तभी उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई. उनकी हत्या के आरोप में केमिस्ट शॉप के मालिक अश्विनी कुमार को गिरफ्तार किया गया.

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अब खबर है कि अश्विनी के स्टोर पर पुलिस पहले 10 बार छापेमारी कर चुकी थी. वह हाल ही में एक मामले में जेल से बरी होकर बाहर आया था. दावा है कि इन सबके बावजूद उसका लाइसेंस सस्पेंड नहीं किया गया.

ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसा के ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने बताया कि अश्विनी पर 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' के तहत एक मामला चल रहा था. इसमें उसे हाल ही में बरी कर किया गया था.

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तीन बार स्टोर से मिले नशीले पदार्थ

उन्होंने बताया कि पिछले चार सालों में उसके मेडिकल स्टोर पर लगभग 10 बार छापेमारी की गई थी. उसके लाइसेंस को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं. कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि आरोपी का मेडिकल स्टोर का लाइसेंस तीन बार सस्पेंड किया गया था. हालांकि, कुछ पुलिस सूत्रों का कहना है कि उसका लाइसेंस रद्द नहीं किया गया, मगर तीन बार उसके स्टोर से नशीले पदार्थ बरामद किए गए थे.

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पंजाब केमिस्ट्स एसोसिएशन (PCA) के महासचिव जीएस चावला ने सवाल किया कि अश्विनी का लाइसेंस क्यों रद्द नहीं हुआ था. ऐसे लोग पूरे फार्मास्युटिकल कारोबार को बदनाम कर रहे हैं. जीएस चावला ने कहा,

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“इस व्यक्ति को 2023 में पकड़ा गया था. प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की अवैध बिक्री के लिए जेल भेजा गया था. उसका लाइसेंस रद्द क्यों नहीं हुआ? उसे हथियारों का लाइसेंस कैसे मिल गया? उसने अपने अवैध दवाओं का कारोबार कैसे जारी रखा? ये ऐसे सवाल हैं जिनकी जांच होनी चाहिए.”

'सरकार को काली भेड़ की जानकारी'

डॉ. चावला ने आरोप लगाया कि सरकार को हर शहर की दो-तीन 'काली भेड़ों' के बारे में पता है. लेकिन उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही. उन्होंने कहा,

"हमने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है. हमने राज्य भर के केमिस्टों के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की है. इसमें कहा गया है कि वे सही रिकॉर्ड रखें और यह सुनिश्चित करें कि दवाएं केवल डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जाएं."

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह ने भी आरोप लगाया कि कुछ डीलर्स, स्वास्थ्य संस्थानों को अलग-अलग सरकारों का संरक्षण मिला हुआ है. इस कारण उनकी अवैध गतिविधियां चलती रही हैं.

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पंजाब में कोडीन-बेस्ड कफ सिरप की लगभग 9 लाख बोतलें जब्त की गईं. ये देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक है. वहीं, 2025 में ही राज्य में 2,086 किलोग्राम हेरोइन जब्त किया गया था. 

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