उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक महिला अपनी पाकिस्तानी नागरिकता को करीब 30 साल तक छिपाकर सरकारी प्राथमिक स्कूल में टीचर की नौकरी करती रही. मामला सामने आया तो डिपार्टमेंट ने उसे नौकरी से सस्पेंड कर दिया. पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पाकिस्तानी महिला ने 30 साल तक छिपाई असली पहचान, UP सरकार ने किया बर्खास्त
महिला ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर फर्जी निवास प्रमाण पत्र (फेक रेजिडेंस सर्टिफिकेट) के आधार पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल कर ली. लगभग तीन दशकों तक उसने किसी को शक होने नहीं दिया, और नौकरी करती रही.


महिला की पहचान माहिरा अख्तर उर्फ फरजाना के रूप में हुई है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार माहिरा ने 1979 में एक पाकिस्तानी नागरिक से शादी की थी. शादी के बाद वो पाकिस्तान चली गई और वहां की नागरिकता ग्रहण कर ली. करीब तीन साल बाद तलाक होने के बाद वो पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लौट आई.
भारत में शादी, और फिर नौकरी1985 में उसने रामपुर में एक स्थानीय व्यक्ति से शादी कर ली. इसके बाद माहिरा ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर फर्जी निवास प्रमाण पत्र (फेक रेजिडेंस सर्टिफिकेट) के आधार पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल कर ली. वो रामपुर के ग्राम कुम्हरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के पद पर तैनात रही. लगभग तीन दशकों तक उसने किसी को शक होने नहीं दिया, और नौकरी करती रही.
हाल ही में बेसिक शिक्षा विभाग ने आंतरिक जांच (इंटरनल इंक्वायरी) शुरू की, जिसमें महिला की असली पहचान और पाकिस्तानी नागरिकता का खुलासा हुआ. जांच में पाया गया कि उसने फर्जीवाड़ा करके डॉक्यूमेंट्स तैयार कराए थे. इस खुलासे के बाद विभाग ने पहले उन्हें निलंबित किया और फिर सेवा से बर्खास्त कर दिया.
विभाग की शिकायत पर अजीम नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं. रामपुर के अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि आरोपी महिला पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद फर्जी निवास प्रमाण पत्र के जरिए शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल करने में सफल रही. मामले की जांच जारी है और सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं. पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
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