एक वेबसाइट/एप है, नाम है फ्लाइटरडार. ये वेबसाइट फ्लाइट्स को ट्रैक करती है. बीते दिनों फ्लाइटरडार ने हर जगह की तरह पाकिस्तान में उड़ रही फ्लाइट्स को भी ट्रैक किया. वैसे तो सब नॉर्मल था, लेकिन फिर सबकी नजर गई एक प्लेन पर. ये तुर्किए एयरफोर्स का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट था. इसके बाद एक और प्लेन दिखा. पर इस बार प्लेन की डिटेल्स नहीं मिली. बस इतना पता चला कि ये प्लेन चीन से आ रहा है. करीब 60 घंटे तक लगातार प्लेनों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा. इसकी टाइमिंग भी काफी दिलचस्प थी.
पाकिस्तान के आसमान में दिखे चीन-तुर्किए के मिलिट्री विमान, भारत के खिलाफ चल रहा बड़ा खेल?
7 अगस्त को Pakistan, Turkiye और Saudi Arabia ने Mecca Joint Defence Agreement पर दस्तखत किए. पाकिस्तानी एयरस्पेस में Turkish Air Force के A400M aircraft और चीन से जुड़े एक Military Transport Aircraft की गतिविधि देखने को मिली. क्या भारत के खिलाफ कोई बड़ा खेल चल रहा है?

कुछ ही समय पहले पाकिस्तान ने तुर्किए और सऊदी अरब के साथ एक पैक्ट (Mecca Joint Defence Agreement) साइन किया है. ये एक डिफेंस पैक्ट है जिसमें को-ऑपरेशन से लेकर एक-दूसरे की मदद वगैरह की बातें हैं. दिलचस्प बात ये है कि पैक्ट साइन होते ही अचानक पाकिस्तान में तुर्किए-चीन के मिलिट्री जहाज घूमते दिखे. ये जहाज लगभग 60 घंटों तक आसमान में घूमते नजर आए.

अब यहां एक सवाल आता है कि इस पाकिस्तान-तुर्किए-सऊदी अरब की तिकड़ी में चीन कहां से आया. क्योंकि इस पैक्ट के बाद कहा जा रहा था कि पाकिस्तान 'इस्लामिक NATO' जैसा कुछ बनाना चाह रहा है. इसे समझने के लिए भारत के पूर्व DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई का एक स्टेटमेंट काफी है. आर्मी डे 2026 पर उन्होंने कहा था,
'ये फैक्ट है कि पाकिस्तान का 80 परसेंट मिलिट्री इक्विपमेंट चीन से आता है. ये फैक्ट है कि चाहे वो तुर्किए हो, पाकिस्तान या चीन हो, हम समझते हैं कि एक ही बॉर्डर पर तीन दुश्मनों से लड़ रहे हैं.'
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के DGMO थे. इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान को सबक तो सिखाया. पर खुद भारत को भी एक सीख मिली. वजह, LoC पर पाकिस्तान ने लगातार ऐसे ड्रोन्स भेजे जो चीन या तुर्किए मेड थे. इसके अलावा, पाकिस्तान के एयर डिफेंस से लेकर फाइटर जेट्स तक चीन के हैं. अब 2026 में पाकिस्तान ने इस दोस्ती को और विस्तार दे दिया है. इसलिए पाकिस्तानी एयरस्पेस में तुर्किए-चीन के जहाजों की मौजूदगी चिंता का कारण है.

न्यूज 18 के पत्रकार मनोज गुप्ता ने पाकिस्तानी एयरस्पेस में घूम रहे तुर्किए-चीन के विमानों पर एक रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट कहती है कि ये हेवी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट थे. इनमें तुर्किए एयरफोर्स का Airbus A400M Atlas ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट था. 60 घंटों के अंदर इन्होंने कई बार पाकिस्तान का चक्कर लगाया. ये एयरक्राफ्ट रावलपिंडि के नूर खान एयरबेस और कराची के मसरूर एयरबेस पर दिखे. सूत्रों का कहना है कि विमानों की आवाजाही का ताल्लुक मिलिट्री इक्विपमेंट्स जैसे कि ड्रोन और डिफेंस से जुड़े दूसरे मैटेरियल्स के ट्रांसपोर्ट से था.

दरअसल पाकिस्तान लंबे समय से सैन्य साजो-सामान, जैसे कि लड़ाकू विमान, एयर-डिफेंस सिस्टम जैसे HQ-9 और बिना पायलट वाले विमान (अनमैन्ड प्लेटफॉर्म) के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से तो चीन-पाकिस्तान का रिश्ता और भी गहरा हुआ है. चीनी एविएशन इंडस्ट्री के कर्मचारियों ने मई 2025 में पाकिस्तान को तकनीकी मदद भी दी थी.
वहीं, तुर्किए भी पाक के लिए डिफेंस सेक्टर में एक अहम पार्टनर बनकर उभरा है. खासकर ड्रोन्स, नेवल सिस्टम्स और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी के मामले में तुर्किए ने पाकिस्तान की खूब मदद की है. मई 2026 में पाकिस्तान के एयर चीफ ने तुर्किए में डिफेंस, एयरोस्पेस इनोवेशन, बिना पायलट वाले सिस्टम्स और नई टेक्नोलॉजी से जुड़ी कई हाई-लेवल बैठकें भी की थीं. पाकिस्तान ने भारत पर तुर्किए के YIHA और Asisguard Songar जैसे ड्रोन्स दागे थे.

भारत लगातार अपने पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट, AMCA पर काम कर रहा है. भारत के पास अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 के ऑफर भी हैं. लेकिन भारत ने इन ऑफर्स पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है. जानकार बताते हैं कि भारत अपने स्वदेशी जेट AMCA पर फोकस कर रहा है. अब py भारत अपने जेट पर फोकस कर रहा है, तो पड़ोसी यानी पाकिस्तान भी रेस में कूद गया है. पर वो स्वदेशी ऑप्शंस की तो सोच ही नहीं रहा. इसके लिए भी वो तुर्किए-चीन के भरोसे है.
इस महीने की शुरुआत में तुर्किए और पाकिस्तान ने फाइटर जेट्स के डेवलपमेंट में को-ऑपरेशन बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं. तुर्किए के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोग्राम KAAN प्रोजेक्ट में पहले से ही लगभग 200 पाकिस्तानी इंजीनियर और अधिकारी शामिल हैं. हालांकि, अब तक KAAN प्रोजेक्ट पर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.
भारत ने जापान से कहा - पाकिस्तान से सावधान रहेंअगस्त में ही जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइजूमी भी भारत दौरे पर आए. अब डिफेंस मिनिस्टर की ट्रिप हुई. इसलिए उन्होंने वेस्टर्न नेवल कमांड, मुंबई का दौरा भी किया. इस बीच भारत ने जापान को पाकिस्तान और दुनिया में फैले उसके दोस्तों से जुड़े खतरे के लिए आगाह किया. अब जियोपॉलिटिक्स में एक कहावत है कि दुश्मन का दुश्मन, अपना दोस्त होता है. और यहीं एंट्री होती है नॉर्थ कोरिया की.

19 अक्टूबर 2002 को गार्डियन की एक रिपोर्ट छपी. ये रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान ने नॉर्थ कोरिया को यूरेनियम एनरिचमेंट की तकनीक मुहैया कराई थी. पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान ने कई बार नॉर्थ कोरिया का दौरा किया. पाकिस्तान ने ही नॉर्थ कोरिया को सेंट्रीफ्यूज, डिजाइन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई थी.
(यह भी पढ़ें: पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की की डिफेंस डील कैसे अमेरिका-इजरायल का तगड़ा नुकसान कराएगी?)
वर्तमान सिनैरियो को देखें तो नॉर्थ कोरिया लगातार जापान को परेशान करता रहता है. कभी वो जापान के तट के पास बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट करता है, कभी समुद्र में कोई टेस्ट करता है. इसके पीछे किम-जोंग-उन का मकसद होता है 'पावर का प्रदर्शन'. और आसान भाषा में कहें तो खौफ बनाने और उसे मेंटेन रखने के लिए ऐसा किया जाता है. इसी चीन-पाकिस्तान के गठजोड़ को लेकर भारत ने जापान को चेताया है. दिल्ली में हुई हाई-लेवल बैठकों में भारत ने जापान से कहा है कि वह पाकिस्तान को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी या तकनीकी जानकारी न दे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने चेतावनी दी है कि ऐसी क्षमताएं आखिरकार उत्तर कोरिया तक पहुंच सकती हैं.

फिलहाल पाकिस्तान लगातार अपनी सेना को अपग्रेड कर रहा है. ऑपरेशन सिंदूर में एयर डिफेंस की नाकामी से लेकर LoC की शेलिंग से उसे काफी नुकसान हुआ. लिहाजा पाकिस्तान हर वो काम करने को तैयार है जिससे वो भारत से लड़ सके. इसीलिए उसने स्मार्ट चाल चलने की कोशिश की है. उसने डिफेंस पैक्ट में सऊदी अरब को भी शामिल किया. ये कर के वो भारत को सऊदी अरब से दूर ले जाने की अपनी लॉन्ग टर्म योजना पर काम कर रहा है. साथ ही वो चीन से हथियार, फाइटर जेट्स का सौदा भी कर रहा है जिससे वो अगली बार भारत को घेर सके.
वीडियो: दुनियादारी: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए की नई डील ईरान के खिलाफ साजिश?











