भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई टिप्पणी से पाकिस्तान तिलमिला उठा है. दोनों नेताओं ने पाकिस्तान को अपनी सीमा क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों को पनाह नहीं देने की अपील की. इसपर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें बयान को एक तरफा और भ्रामक बताया गया है.
पाकिस्तान बुरी तरह चिढ़ गया, अमेरिका-भारत ने सबके सामने ऐसी क्या बात कह दी?
भारत अमेरिका ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान इस बात को सुनिश्चित करे कि उसकी धरती का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए न हो. और ऐसा क्या कहा गया जिससे पाकिस्तान चिढ़ गया.


पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफाकत अली खान ने 14 फरवरी को भारत-अमेरिका की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अपनी प्रतिक्रिया दी. पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,
“भारत-अमेरिका की 13 फरवरी को हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के संदर्भ में कही गई बातें भ्रामक और राजनयिक मापदंडों पर विरोधाभासी हैं. हमें आश्चर्य हो रहा है कि अमेरिका के साथ आतंकवाद विरोधी अभियान में सहयोग के बावजूद दोनों नेताओं के संयुक्त बयान में इस तरह की बातें की गईं.”
शफाकत अली ने उलटे भारत पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा,
“इस तरह के बयानों से भारत खुद को आतंकवादी गतिवधियों और गैर न्यायिक हत्याओं में अपनी संलिप्ता को बचा नहीं सकता. इसके अलावा अंतर्राष्टीय समुदाय का ध्यान इस मुद्दे से भी नहीं हटाया जा सकता कि भारत मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार कर रहे लोगों को पनाह देने वाली एक महफूज जगह बन चुका है.”
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अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 फरवरी को भारतीय समयानुसार तड़के 4 बजे एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान दोनों नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए. दोनों नेताओं ने कहा कि पाकिस्तान इस बात को सुनिश्चित करे कि उसकी धरती का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए न हो.
भारत और अमेरिका ने साझा बयान में कहा कि पाकिस्तान को 26/11 और पठानकोट हमले के गुनहगारों को न्याय के कटघरे में लाना चाहिए. इसके साथ ही पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश में होने वाली आतंकी गतिविधियों के लिए न हो.
संयुक्त बयान में कहा गया कि पाकिस्तान को मुंबई से लेकर पठानकोट में हुए हमले के दोषियों को सजा देनी चाहिए. दोनों नेताओं ने इन आतंकी हमलों को रोकने के लिए अलकायदा, जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है.
डॉनल्ड ट्रंप पहले ही पाकिस्तान में कई परियोजनाओं के लिए 845 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग को रोकने का एलान कर चुके हैं.
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