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GST के कागज पूरे, फिर भी 300 ट्रक बॉर्डर पर क्यों फंसे? 30 करोड़ का माल अटका

असम की चार रिफाइनरियों से कच्चा पेट्रोलियम कोक (RPC) लेकर आ रहे 300 से ज्यादा ट्रक 17 सितंबर से पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर में फंसे हैं.

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ट्रकों में रॉ पेट्रोलियम कोक (RPC) लदा है. (सांकेतिक फोटो- India Today)

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  • अलीपुरद्वार के श्रीरामपुर में 17 सितंबर से असम की चार रिफाइनरियों से कच्चा पेट्रोलियम कोक (RPC) ले जा रहे 300 से ज्यादा ट्रक रुके हुए हैं, जबकि उनके पास सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं।
  • ट्रकों के फंसे रहने का कारण पुलिस द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से दिए गए 'ऊपर से आए आदेश' बताये जा रहे हैं, जिससे लगभग 30 करोड़ रुपये के माल पर असर पड़ा है और ट्रांसपोर्टर्स को भारी डिटेंशन चार्ज देना पड़ रहा है।
  • RPC की आपूर्ति रुकने से कैल्साइंड पेट्रोलियम कोक (CPC) उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है, जिससे कई एल्युमीनियम कंपनियां और ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड निर्माता कच्चे माल की कमी का सामना कर रहे हैं और समाधान के लिए अधिकारियों से बातचीत जारी है।

असम के नुमालीगढ़, बोंगईगांव, गुवाहाटी और डिगबोई रिफाइनरियों से कच्चे पेट्रोलियम कोक (RPC) ले जा रहे 300 से ज्यादा ट्रक 17 सितंबर से अलीपुरद्वार के श्रीरामपुर में रुके हैं. बताया गया कि सभी ट्रकों के पास GST इनवॉइस, ई-वे बिल और चालान जैसे सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज हैं. उन्हें रोकने का कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया है. वजह पूछने पर मौके पर मौजूद पुलिस के लोग ‘ऊपर से आए आदेश’ का हवाला दे रहे हैं. बताया गया कि इस रोक से लगभग 30 करोड़ रुपये का माल फंसा हुआ है. 

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TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, बरौनी कैल्सिनर्स एसोसिएशन के कैलाश अग्रवाल ने कहा कि ट्रांसपोर्टर्स को हर दिन 4-5 लाख रुपये का डिटेंशन चार्ज देना पड़ रहा है. ये चार्ज अब 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो चुका है. सैकड़ों ड्राइवर तीन हफ्ते से ज्यादा वक्त से बॉर्डर पर फंसे हैं. महालया और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के मौके पर वो अपने परिवार से दूर हैं और खाने-पीने की चीजें जुटाना भी उनके लिए मुश्किल हो रहा है. 

क्या है आरपीसी?

इन फंसे ट्रकों में जो माल लदा है वो RPC यानी रॉ पेट्रोलियम कोक है. यह एक तरह का कच्चा माल है, जिसे प्रॉसेस करके कैल्साइंड पेट्रोलियम कोक (CPC) बनाया जाता है. CPC का इस्तेमाल एल्युमीनियम बनाने वाली फैक्ट्रियों में होता है. इससे खास तरह के पुर्जे बनाए जाते हैं, जिन्हें ‘एनोड’ कहते हैं. एल्युमीनियम बनाने के प्रॉसेस में इन एनोड का इस्तेमाल होता है.

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माल फंसे होने की वजह से CPC प्लांट अपना प्रोडक्शन कम कर रहे हैं. NALCO, हिंडाल्को और वेदांता जैसी एल्युमीनियम बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड बनाने वालों को भी कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है. कैलाश अग्रवाल ने बताया कि एसोसिएशन ने पीएमओ, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, IOCL के चेयरमैन, मुख्य सचिव और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री के सामने इस मामले को उठाया है. पश्चिम बंगाल के कमर्शियल टैक्स कमिश्नर से भी मुलाकात की गई. उन्होंने एक-दो दिन में समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन ट्रक अभी भी नहीं चल पाए हैं.

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