समाज में एक ओर जातिवाद को खत्म करने की बात कही जाती है. वहीं, दूसरी ओर जाति का दंभ खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. ओडिशा का एक आंगनबाड़ी केंद्र लगभग 3 महीनों से सिर्फ इसलिए बंद पड़ा है क्योंकि यहां एक दलित महिला को कुक के तौर पर नियुक्त किया गया. दलित महिला के विरोध में ग्रामीणों ने अपने बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्र में जाना ही बंद करा दिया है.
दलित महिला को आंगनबाड़ी का कुक बनाया, मां-बाप ने बच्चों को भेजना ही बंद कर दिया
मामला केंद्रपाड़ा जिले के नुगांव गांव का है. यहां के एक आंगनबाड़ी केंद्र पर 21 साल की शर्मिस्ता सेठी को कुक के तौर पर नियुक्त किया गया था. शर्मिस्ता दलित समुदाय से आती हैं. इसी वजह से ग्रामीणों ने उनकी नियुक्ति का विरोध शुरू कर दिया. आरोप है कि उन्होंने अपने बच्चों के आंगनबाड़ी में जाने तक से रोक लगा दी.


मामला केंद्रपाड़ा जिले के नुगांव गांव का है. यहां के एक आंगनबाड़ी केंद्र पर 21 साल की शर्मिस्ता सेठी को कुक के तौर पर नियुक्त किया गया था. शर्मिस्ता दलित समुदाय से आती हैं. इसी वजह से ग्रामीणों ने उनकी नियुक्ति का विरोध शुरू कर दिया. आरोप है कि उन्होंने अपने बच्चों के आंगनबाड़ी में जाने तक से रोक लगा दी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मिस्ता ग्रेजुएट हैं और वह इस नौकरी के लिए अपने गांव से आवेदन करने वाली एकमात्र महिला थीं. इस नौकरी से उन्हें मात्र 5,000 रुपये की मासिक सैलरी मिलती है. अखबार ने बताया कि मामले को लेकर उनसे बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.
ग्रामीणों ने शर्मिस्ता की नियुक्ति पर जैसा रोष दिखाया, ठीक उसी तरह लिजारानी पांडव की नियुक्ति भी ग्रामीणों को रास नहीं आई. वो शर्मिस्ता के पहले से आंगनबाड़ी में काम कर रही हैं. लिजारानी भी दलित समाज से ताल्लुक रखती हैं. उन्होंने बताया कि जब उनकी नियुक्ति हुई हैं, तब भी कई गांव वाले इससे नाराज थे. उन्होंने आगे बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने और शर्मिस्ता ने बच्चों के माता-पिता को समझाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने.
इसके बाद उन्होंने इसकी सूचना सीनियर ऑफिसर को दी. साथ ही लिखित में शिकायत दी. इसके बाद आंगनबाड़ी केंद्र से संबंधित ब्लॉक और तहसील के ऑफिसर्स ने ग्रामीणों के साथ कई बैठकें कीं.
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मामले पर बात करते हुए केंद्रपाड़ा की बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) दीपाली मिश्रा ने बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारी 11 फरवरी को गांव का दौरा करने गए थे. इसी वजह से कुछ ग्रामीण अपने बच्चों को केंद्र पर भेजने के लिए राजी हो गए. हालांकि, कुछ लोगों ने इस पर फैसला लेने के लिए 3 दिनों का समय मांगा है.
मामले का संज्ञान केंद्रपाड़ा के DM रघुराम अय्यर ने भी लिया. उन्होंने बताया कि डिप्टी-कलेक्टर इस मामले को देख रहे हैं. उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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