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पूर्व मदरसा टीचर भारत की नागरिकता छोड़ने के बाद यूपी चुनाव में वोट कर गया, सैलरी-पेंशन भी डकारी

शम्सुल हुदा खान साल 1984 से 2013 तक एक मदरसे में टीचर और इस्लाम के उपदेशक के तौर पर कार्यरत रहे. बाद में उन्होंने ब्रिटिश नागरिकता ले ली. कानूनी नियम है कि भारत में वोट करने के लिए आपका भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. लेकिन मौलाना शम्सुल हुदा खान पर आरोप है कि उन्होंने नागरिकता त्यागने के बाद भी उन्होंने 2017 के यूपी चुनाव में मतदान किया.

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प्रगति पांडे
| मुनीष पांडे
12 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 12 फ़रवरी 2026, 11:54 PM IST)
Lucknow
शख्स पर ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद यूपी चुनाव 2017 में वोट डालने के आरोप लगे. (फोटो- आज तक)
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ED (Enforcement Directorate) ने एक पूर्व भारतीय नागरिक पर 2017 के यूपी चुनाव में मतदान करने का आरोप लगाया है. शम्सुल हुदा खान नाम के इस शख्स ने साल 2013 में भारत की नागरिकता छोड़कर ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी. आरोप है कि इसके बाद भी उसने सालों तक न सिर्फ सरकारी वेतन और पेंशन सेवाओं का लाभ लिया, बल्कि यूपी चुनाव में वोट भी किया.

इंडिया टुडे से जुड़े मुनीष पांडे की रिपोर्ट के मुताबिक, शम्सुल हुदा खान साल 1984 से 2013 तक एक मदरसे में टीचर और इस्लाम के उपदेशक के तौर पर कार्यरत रहे. बाद में उन्होंने ब्रिटिश नागरिकता ले ली. कानूनी नियम है कि भारत में वोट करने के लिए आपका भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. लेकिन मौलाना शम्सुल हुदा खान पर आरोप है कि उन्होंने नागरिकता त्यागने के बाद भी उन्होंने 2017 के यूपी चुनाव में मतदान किया. जिसके लिए वह खास तौर पर ब्रिटेन से भारत आए थे.

इंडिया टुडे ने ईडी के सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है. अगर मौलाना पर लगे आरोप सच साबित होते हैं, तो यह भारतीय चुनाव प्रक्रिया और वोटर के तौर पर यहां के नागरिकों की पहचान को सत्यापित करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.

ED को मौलाना की सैलरी और पेंशन से जुड़ी जानकारी तब मिली, जब एजेंसी लखनऊ में मौलाना के रुपयों के लेन-देने की जांच की. ED ने बुधवार, 11 फरवरी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मौलाना के दो घरों पर छापेमारी की थी. यह दोनों घर संत कबीर नगर और आजमगढ़ में हैं.

एजेंसी ने इस मामले की जांच उस वक्त शुरू की, जब उत्तर प्रदेश पुलिस के पास मौलाना को लेकर 3 FIR दर्ज की गईं. इन FIR में मौलाना पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश में जुड़े रहने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

मौलाना पर यह भी आरोप है कि उसने NGO की आड़ में गैर कानूनी पैसों का ट्रांसफर किया, साथ ही उन पैसों का इस्तेमाल कथित तौर पर मदरसों के निर्माण और नई प्रॉपर्टी को खरीदने में किया. जांच के दौरान पता चला कि 2013 और 2017 के बीच मौलाना के बैंक अकाउंट और उनसे जुड़ी कंपनियों में 5.28 करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन किया गया. इसमें से 3.83 करोड़ उनके पर्सनल अकाउंट में, 1.72 लाख रुपये रजा फाउंडेशन नाम के NGO के अकाउंट में और 1.43 करोड़ रुपये कुल्लियातुल बनातिर रजविया नाम की दूसरी कंपनी में जमा किए गए.

ये सारे ट्रांजैक्शन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, HDFC बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बने अकाउंट के जरिए किए गए. एजेंसी को आरोपी के घरों से तलाशी के दौरान प्रॉपर्टी से जुड़े 17 पेपर्स मिले हैं.

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ED ने जब मौलाना की ट्रैवल हिस्ट्री की जांच की तो पता चला उसने  पाकिस्तान, बांग्लादेश और कई दूसरे इस्लामिक देशों में यात्राएं की थीं. अभी तक उनकी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है.

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