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इतिहासकार एस इरफान हबीब से DU में बेहूदगी, भाषण के बीच पीछे से कूड़ेदान फेंका

दिल्ली यूनिवर्सिटी में ‘पीपुल्स लिटरेचर फेस्टिवल’ के दौरान इतिहासकार इरफान एस हबीब के साथ अज्ञात लोगों ने शर्मनाक हरकत की. प्रोफेसर एस इरफान हबीब एक जाने माने इतिहासकार हैं. वो आधुनिक राजनीतिक इतिहास लेखन में सक्रिय रहे हैं.

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में इतिहासकार इरफान एस हबीब पर हमला किया गया. (एक्स)

चर्चित इतिहासकार प्रोफेसर एस इरफान हबीब से दिल्ली यूनिवर्सिटी में बेहूदगी की गई. यूनिवर्सिटी के आर्ट्स फैकल्टी में समता दिवस के मौके पर प्रोफेसर हबीब मंच पर बोल रहे थे. इसी दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर पीछे से पानी और कूड़ेदान फेंक दिया.

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यह घटना ‘पीपुल्स लिटरेचर फेस्टिवल’ के दौरान हुई है. जिसे लेफ्ट स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आयोजित कराया था. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है. इसमें देखा जा सकता है कि जब प्रोफेसर हबीब स्पीच दे रहे थे, उसी दौरान अचानक से स्टेज के पीछे से पानी से भरी बाल्टी और एक डस्टबिन उनके ऊपर फेंका गया. बाल्टी पानी के साथ छात्रों के बीच गिर गया.

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के महासचिव डी राजा ने इस घटना की निंदा की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 

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सीपीआई प्रोफेसर एस. इरफान हबीब पर हुए हमले की कड़ी निंदा करती है. यह कोई असहमति या बहस नहीं है. बल्कि कायरतापूर्ण धमकी और डराने की कोशिश है. विचारों का मुकाबला विचारों से होना चाहिए. हिंसा, धमकी या गुंडागर्दी से नहीं. ऐसे काम दक्षिणपंथी ताकतों की गहरी असुरक्षा दिखाते हैं, जो आजादी से सोचने और खुली बहस से डरती है.

D Raja
एक्स

इतिहासकार रुचिका शर्मा ने भी इस घटना को लेकर नाराजगी जताई है. उन्होंने लिखा, 

यह बेहद शर्मनाक है कि सिर्फ अपने विचार रखने के लिए इरफान हबीब साहब पर हमला किया गया. वो भी दिल्ली यूनिवर्सिटी के दिल में. इतिहासकारों के लिए भारतीय इतिहास और शिक्षा पर खुलकर बात रखना आसान नहीं है. इरफान साहब बहुत साहसी हैं. उन्होंने हमले के बावजूद अपना भाषण बिना रुके जारी रखा.

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प्रोफेसर इरफान एस हबीब एक जाने माने इतिहासकार हैं. वो आधुनिक राजनीतिक इतिहास लेखन में सक्रिय रहे हैं. ‘टु मेक द डेफ़ हियर : आइडोलॉजी एंड प्रोग्राम ऑफ़ भगतसिंह एंड हिज कॉमरेड्स’, ‘जिहाद ऑर इज्तिहाद : रिलीजियस ऑर्थोडॉक्सी एंड मॉडर्न साइंस इन कंटेम्पररी इस्लाम’ और ‘मौलाना आज़ाद : ए लाइफ़’ उनकी चर्चित पुस्तकें हैं.

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