एक वीडियो में पानी से भरी एक पार्किंग है. पार्किंग भी ऐसी-वैसी नहीं है. ये नोएडा एयरपोर्ट की पार्किंग है. वही एयरपोर्ट जिसे बनाने में 10 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक लगे हैं. हफ्ते भर पहले हमने 4800 करोड़ में पंखे की हवा खाते लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को देखा था. अब 11,200 करोड़ में बने नोएडा एयरपोर्ट के फेज 1 का आनंद लीजिए. सुविधाएं सारी हैं, हवा में उड़ने वाले प्लेन तो दिखेंगे ही. लेकिन अगर बारिश हो जाए तो नाव भी चला सकते हैं. एयरपोर्ट का ये वीडियो 11 अगस्त का है.
11 हजार करोड़ में बने नोएडा एयरपोर्ट की खुली पोल, पार्किंग-टर्मिनल में सब पानी-पानी हो गया
Noida में हुई बारिश के कुछ देर बाद ही Jewar Airport की Parking और Terminal Area में पानी भर गया. हालांकि एयरपोर्ट कर्मचारियों ने मिलकर कुछ देर में पानी हटा दिया. कई कर्मचारी वाइपर लेकर भी पानी निकालते दिखे. इसका वीडियो आया, तो फिर एयरपोर्ट वालों की सफाई भी आई.

इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार अरुण त्यागी की रिपोर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट मैनेजमेंट को जैसे ही पानी भरने की जानकारी मिली, उन्होंने पानी हटाने का काम शुरू कर दिया. पानी तो हटा दिया गया. लेकिन सवाल है कि जिस एयरपोर्ट का उद्घाटन ही 4-5 महीने पहले हुआ था, उसकी इतनी दुर्दशा कैसे हो गई? ऐसा कौन सा अद्वितीय मैटेरियल इस्तेमाल किया गया? और किस इंजीनियर के नेतृत्व में बना ये एयरपोर्ट?
एययरपोर्ट पर क्या हुआ?रिपोर्ट के मुताबिक बारिश के कुछ देर बाद ही एयरपोर्ट के पार्किंग और टर्मिनल एरिया में पानी भर गया. यात्रियों को काफी दिक्कत हुई. इसके बाद बात मैनेजमेंट तक पहुंची. फिर करीब 30 मिनट के अंदर पानी हटाया गया. वीडियो में साफ दिख रहा है कि एयरपोर्ट के कर्मचारी वाइपर लेकर पानी निकालने में लगे हैं. पानी से भरे नोएडा एयरपोर्ट का वीडियो आम आदमी पार्टी के X हैंडल से भी शेयर किया गया. 11 अगस्त की रात करीब सवा आठ बजे लिखा,
‘नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से बना है, और जिसका उद्घाटन महज 6 महीने पहले प्रधानमंत्री मोदी ने किया था, आज पहली बारिश में ही मोदी सरकार के भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की पोल खोलता नजर आया.’
एयरपोर्ट ने क्या कहा?इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर जब थोड़ी और फजीहत हुई तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट मैनेजमेंट का प्रेस नोट भी आया. ANI के मुताबिक एयरपोर्ट ने कहा,
‘बहुत कम समय में हुई भारी बारिश की वजह से टर्मिनल और पार्किंग एरिया को जोड़ने वाले रास्ते में पानी भर गया था. एयरपोर्ट की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 30 मिनट से भी कम समय में पानी निकाल दिया. इस दौरान ट्रैफिक को दूसरे रास्ते से भेजा गया और यात्रियों को सीधे टर्मिनल के बाहर से पिकअप करने की सुविधा दी गई. इस वजह से एयरपोर्ट के कामकाज पर बहुत कम असर पड़ा और किसी भी फ्लाइट में कोई रुकावट नहीं आई. हमारी टीम इस घटना की जांच कर रही है और जरूरत पड़ने पर सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.’
शुरू से खबरों में रहा जेवर एयरपोर्टजेवर एयरपोर्ट उद्घाटन से पहले ही काफी ज़्यादा चर्चा में था. जिस ज़मीन पर एयरपोर्ट बना है, उसके लिए सरकार ने लोगों को काफी मुआवज़ा दिया था. सरकार को अपनी जमीन देने वाले कई किसान रातों रात करोड़पति बन गए थे. जब पहली फ्लाइट ने उड़ान भरी तो इसके यात्री भी उसी गांव के किसान थे. कुल मिलाकर एयरपोर्ट शुरू से ही खबरों में था.
28 मार्च 2026 को इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. लेकिन उद्घाटन के 5 महीने बाद पानी भरी ये तस्वीरें आने लगीं. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, एयरपोर्ट फेज़ 1 को 11,200 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था. लेकिन ये बात सिर्फ एयरपोर्ट तक सीमित नहीं है. बीते हफ्ते लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का वीडियो भी सामने आया था. इस एक्सप्रेसवे को 4800 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था. लेकिन उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही पैचवर्क का काम करना पड़ा. यही वजह है कि 63 किमी के एक्सप्रेसवे में हर थोड़ी दूर पर एक पैचवर्क मिलता है.
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एक्सप्रेसवे की लीपा-पोती चल ही रही थी कि एयरपोर्ट का वीडियो सामने आ गया. हालांकि ये व्यंग्य से हटकर चिंता की बात है. आखिर इतने पैसों से हमारे लिए जो सड़कें और एयरपोर्ट बन रहे हैं, उसमें ऐसा कौन सा घटिया माल इस्तेमाल होता है, जो साल भर तो दूर कुछ महीने भी नहीं टिक पा रहा.
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