नेपाल में आए फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 475 लोगों को शव मलबे में मिले हैं. 600 से अधिक लोग लापता है. इस बीच नेपाल में 517 विदेशी नागरिक भी लापता है. लिहाजा कई देशों ने सर्च और रेस्क्यू में मदद के लिए टीमें भेजने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन नेपाल ने इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया है. सरकार का कहना है कि नेपाली सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को संभाल सकती हैं. किसी और मदद के बजाय नेपाल 'वन-डोर मैकेनिज्म' यानी एक ही जगह से मदद लेने की व्यवस्था पर राजी है. यानी वो नकद पैसे की मदद चाहता है. अधिकारियों का कहना है कि तबाह हुए इलाकों को वापस बनाने में अतिरिक्त आर्थिक मदद और दूसरी तरह की सहायता मांगी जाएगी.
भारत, चीन, अमेरिका... तबाही झेल रहे नेपाल ने सबकी रेस्क्यू टीम लौटा दी, वजह ये बताई
Nepal में Flash Floods ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 475 लोगों की मौत और 600 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है. 500 से ज्यादा विदेशी नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं. भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने Search and Rescue Teams भेजने की पेशकश की, लेकिन नेपाल ने विदेशी टीमों की मदद लेने से इनकार कर दिया.

कुछ देशों ने आर्थिक मदद तो कुछ ने खोज, बचाव, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के कामों में नेपाल की मदद करने की इच्छा जताई है. नेपाल पुलिस के मुताबिक, बुधवार से 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 51 मलेशियाई, 53 यूक्रेनी, 33 ब्रिटिश, 35 ऑस्ट्रेलियाई, 25 कनाडाई और तीन दर्जन से ज्यादा दूसरे देशों के नागरिक लापता हैं. चीनी अधिकारियों ने बताया कि नेपाल में मौजूद कम से कम 100 चीनी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बाढ़ में फंसे 200 से अधिक भारतीय नागरिक वहां से निकलने में मदद चाहते हैं.
क्यों मदद ठुकराई?काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने मदद ठुकराने को लेकर उनसे बात की है. अधिकारी ने बताया कि सरकार को कई देशों और संगठनों से अपनी सर्च और रेस्क्यू टीम भेजने के लिए कई आधिकारिक और अनौपचारिक अनुरोध मिले हैं. हालांकि, सरकार ने उनसे कहा है कि नेपाल की अपनी सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को संभालने में सक्षम हैं. भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश के अधिकारियों ने सरकार के सामने प्रस्ताव रखा है. इन देशों ने अपनी सर्च और रेस्क्यू टीमों को भेजने का प्रस्ताव रखा है लेकिन अधिकारी के मुताबिक सरकार अपने पुराने अनुभव को देखते हुए इससे बचना चाह रही है.
उनके मुताबिक सरकार ने यह फैसला 2015 के भूकंप के अनुभव के बाद लिया. उस समय विदेशी सर्च और रेस्क्यू टीमें बड़ी संख्या में आई थीं. उनके आने के बाद टीम्स के बीच कंपटीशन होने लगा. साथ ही तालमेल और मैनेजमेंट से जुड़ी काफी दिक्कतें हुई थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला नेपाली सेना और पुलिस की सिफारिश पर लिया गया है.
भारत के सैकड़ों नागरिकों नेपाल में लापता हैं. कईयों से संपर्क टूट गया है. भारत सरकार ने नेपाल में अपनी नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) को तैनात करने की अनुमति मांगी थी. सरकार ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया. विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा,
हमें चीन और अन्य देशों से भी ऐसे ही अनुरोध मिले थे, लेकिन हमें उन अनुरोधों को ठुकराना पड़ा.
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रेस्क्यू ऑपरेशन रोका गया, फिर से अलर्ट जारीचीन और नेपाल बॉर्डर पर रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया है. चीन ने चेताया है कि छोछेन खोला और त्सांगपो नदी के संगम के पास एक झील बन गई है. इस झील का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है. चीन ने चेतावनी दी है कि अगर ये पानी ऐसे ही बढ़ता रहा तो फिर से नेपाल में बाढ़ आ सकती है. इस बार ये और भी घातक हो सकती है. इसी के चलते चीन ने तिब्बत-नेपाल बॉर्डर के पास बचाव अभियान रोक दिया है. उधर नेपाल ने भी रेस्क्यू टीम से लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए कहा.
चीन ने कहा कि गिरिओंग बॉर्डर पर ये झील बनी है, जिसका पानी अब ओवरफ्लो कर रहा है. इस बीच चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि तिब्बत के पड़ोसी प्रांत सिचुआन के कुछ हिस्सों में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया. हालांकि इसका एपीसेंटर बाढ़ पीड़ित क्षेत्र से काफी दूर है.
नेपाल पुलिस अधिकारी पी चौधरी का कहना है कि नई बाढ़ पिछली वाली से ज्यादा घातक साबित हो सकती है. उनका कहना है कि पानी का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है इसलिए लोगों को हटाया जा रहा है.
वीडियो: नेपाल में 3 दिन में फिर आएगी बाढ़? चीन ने क्या बताया?













