केंद्र सरकार ने सीनियर IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव बनाया है. इससे पहले वे पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव थे. उस दौरान उनकी फैमिली के तीन लोगों को खीरे की खेती के लिए करीब 1.16 करोड़ रुपये की सरकारी सब्सिडी मिली थी. इस बात का खुलासा 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी एक रिपोर्ट में किया.
खीरे की खेती के लिए फैमिली को मिली 1 करोड़ सब्सिडी, नए शिक्षा सचिव को कितना जानते हैं?
Naresh Pal Gangwar IAS: केंद्र सरकार ने नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया है. उनकी फैमिली के तीन लोगों - उनकी मां, पत्नी और बेटे - को खीरे की खेती के लिए सरकार से करीब 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिली. इस वजह से वो काफी चर्चा में भी रहे थे. नरेश पाल गंगवार के बारे में आज सब जान लीजिए.

भारत सरकार ने 23 जुलाई को नोटिस जारी कर बताया कि उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय भेज दिया गया है. उनकी जगह नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. गंगवार इससे पहले पशुपालन और डेयरी विभाग में काम कर रहे थे, जो मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत आता है.

नरेश पाल गंगवार 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी हैं. साल 1970 में उत्तराखंड के नैनीताल में इनका जन्म हुआ. उन्होंने रुड़की यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में B.Tech. किया. इसके बाद IIT दिल्ली से कम्युनिकेशन में M.Tech. किया. नरेश पाल ने साल 1993 में UPSC का सिविल सर्विस एग्जाम पास किया. प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में M.A. की डिग्री भी हासिल की.
उन्होंने राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाली है. राजस्थान सरकार की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, नरेश पाल गंगवार राजस्थान में कई जिलों के कलेक्टर रह चुके हैं. लगभग ढाई दशक तक राजस्थान सरकार में काम करने के बाद 2020 में उन्हें केंद्र में नियुक्त किया गया.
दिसंबर 2020 में नरेश पाल को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया. जनवरी 2022 में उन्हें इसी मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी बनाया गया. इसके बाद अगस्त 2025 में उन्हें पशुपालन और डेयरी विभाग में सचिव नियुक्त किया गया था. अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में सचिव बनाया गया है.
नरेश पाल गंगवार चर्चा में क्यों रहे?केंद्र सरकार की एक स्कीम का फायदा उठाने वालों में नए उच्च शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार की मां, पत्नी और बेटा भी शामिल हैं. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े हरिकिशन शर्मा की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, जब नरेश पाल पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव थे, तब परिवार के इन तीन सदस्यों को इस स्कीम के तहत पांच सालों में कुल मिलाकर 1.16 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी मिली.
केंद्र सरकार ने 2014-15 में चुनिंदा सब्जियों और फूलों की ‘कमर्शियल फार्मिंग’ को बढ़ावा देने के लिए एक स्कीम लॉन्च की थी. यह स्कीम 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर' (MIDH) के तहत आती है. इसे 'नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड' (NHB) चलाता है, जो केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नियंत्रण में एक स्वायत्त (ऑटोनॉमस) संस्था है. भागीरथ चौधरी इस बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं.
परिवार को 1 करोड़ की सब्सिडी कैसे मिली?इस स्कीम के तहत शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर, और गुलाब, एंथुरियम और ऑर्किड समेत 8 तरह के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट की अधिकतम 50 फीसदी सब्सिडी दी जाती है, जो हर परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये तक हो सकती है. रिकॉर्ड बताते हैं कि नरेश पाल गंगवार के परिवार को मिली सभी सब्सिडी जयपुर जिले के प्रोजेक्ट्स के लिए थीं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक,
- IAS अफसर नरेश की मां बिंदुमती को एक प्रोजेक्ट के लिए जनवरी 2025 में 46.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. प्रोजेक्ट का एरिया 8,880 वर्ग मीटर और लागत 99.38 लाख रुपये है. उस समय नरेश पर्यावरण मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी थे.
- खीरे की खेती के लिए नरेश के बेटे कुमार ऋत्विक के एक प्रोजेक्ट को मार्च 2023 में 46.49 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. एरिया 8,736 वर्ग मीटर और प्रोजेक्ट की लागत 97.94 लाख रुपये है. तब नरेश पाल गंगवार पर्यावरण मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी थे.
- नरेश की पत्नी डॉ. रंजीता सिंह और ‘अन्य’ के नाम पर लिस्टेड एक प्रोजेक्ट को 2021-22 में खीरे की खेती के लिए 24.36 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. प्रोजेक्ट का एरिया 4,048 वर्ग मीटर और लागत 49.31 लाख रुपये है. मई 2020 में जब एप्लीकेशन प्रोसेस शुरू हुआ, तब नरेश पाल राजस्थान सरकार में एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कमिश्नर और प्रिंसिपल सेक्रेटरी थे.
ये भी पढ़ें: केंद्रीय मंत्री को अपने ही विभाग से 99 लाख की सब्सिडी मिली, बोले, ‘कुछ छिपाकर थोड़े किया’
नरेश पाल गंगवार ने क्या बताया?'द इंडियन एक्सप्रेस' के ईमेल से पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा सचिव ने कहा,
“AIS (आचरण) नियम, 1968 की धारा 2 (b) में परिवार के सदस्य की परिभाषा दी गई है. इसके मुताबिक, सरकारी कर्मचारी पर पूरी तरह से निर्भर लोग (जिनमें माता-पिता या बेटा/बेटी शामिल हैं) परिवार के सदस्य की परिभाषा में आते हैं.”
उन्होंने कहा,
"इस संबंध में, मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरी मां और मेरा बेटा मुझ पर निर्भर नहीं हैं. मेरे सर्विस रिकॉर्ड में भी यह साफ तौर पर लिखा है कि वे मुझ पर निर्भर नहीं हैं. चूंकि वे मुझ पर निर्भर नहीं हैं, इसलिए AIS (आचरण) नियम, 1968 के मुताबिक, उनसे जुड़ी जानकारी 'वार्षिक संपत्ति विवरण' (Annual Property Return) में भरने की जरूरत नहीं है."
रिकॉर्ड के मुताबिक, नरेश पाल गंगवार ने 2021-22 के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) को दी गई अचल संपत्ति जानकारी में इस स्कीम के तहत मंजूर किए गए सिर्फ एक प्रोजेक्ट की जानकारी दी. यह प्रोजेक्ट उनकी पत्नी और ‘अन्य’ के नाम पर लिस्टेड है.
वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: सरकार ने उज्ज्वला योजना के सिलेंडर पर सब्सिडी क्यों कम की?












