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नाना पाटेकर के निधन के बाद मेडिको-लीगल केस दर्ज, क्या संदिग्ध है एक्टर की मौत?

Nana Patekar Death: एक्टर नाना पाटेकर के निधन के बाद हॉस्पिटल ने Medico Legal Case दर्ज कराया है. यह एक कानूनी प्रक्रिया होती है. आइए जानते हैं कि किन हालात में ये केस दर्ज किया जाता है और वेटरन एक्टर के मामले में क्या हुआ था?

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नाना के निधन के बाद मेडिको लीगल केस दर्ज. (Courtesy- ITG)

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  • बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा स्थित अपने घर पर कार्डियक अरेस्ट की वजह से निधन हो गया, और चिकित्सकों ने उन्हें CPR देने का प्रयास किया.
  • नाना पाटेकर की मौत के बाद मणिपाल अस्पताल में मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया, जो कानूनी प्रक्रियाओं के तहत मौत के कारण और परिस्थिति का सत्यापन करने के उद्देश्य से होता है.
  • मेडिको-लीगल केस दर्ज होने के कारण मौत संदिग्ध नहीं मानी गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम मेडिकल निष्कर्ष जारी किए जाएंगे।

बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया. नाना पाटेकर को गोवा के अपने घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ था. उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR द‍िया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका. अस्पताल ने कानूनी प्रक्रिया के तहत मेडिको-लीगल केस दर्ज करवाया. मेडिको लीगल केस क्या होता है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी? 

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खबर में जानेंगे लेकिन पहले जानते है कि नाना की मौत कैसे हुई? इसे लेकर गोवा के मणिपाल अस्पताल में Oncology डिपार्मेंट के हेड डॉक्टर शेखर सालकर ने जानकारी दी है. डॉक्टर ने कहा, 

‘उनका केयरटेकर हॉस्पिटल आया था. वह एंबुलेंस और मेडिकल टीम को लेकर एक्टर के घर गया. जब मेडिकल टीम ने उनको देखा, तो वह रिस्पॉन्स नहीं कर रहे थे. इसके बाद हमारी टीम ने CPR देना शुरू किया. उन्हें CPR देते हुए ही हॉस्पिटल लाया गया.’

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डॉक्टर शुरुआती तौर पर कार्डियक अरेस्ट को मौत की वजह बता रहे हैं. अब मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इसका मतलब नाना पाटेकर की मौत संदिग्ध है? मेडिको लीगल केस हमेशा संदिग्ध मामलों में ही दर्ज नहीं होता है.

मेडिको-लीगल केस का होना अपने आप में किसी अपराध या संदिग्ध मौत का सबूत नहीं है. कई परिस्थितियों में अस्पताल कानूनी प्रक्रिया के तहत एमएलसी दर्ज करता है. मौत की परिस्थितियों और उसके कारण का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करने के उद्देश्य से ऐसा किया जाता है.

कानूनी जांच की जरूरत?

मेडिको-लीगल केस वो मामला होता है जिसमें किसी व्यक्ति की बीमारी, चोट या मौत से जुड़े फैक्ट की कानूनी जांच की जरूरत पड़ सकती है. इसमें डॉक्टर केवल मरीज का इलाज या मौत का मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करते हैं. साथ ही, जरूरत पड़ने पर पुलिस को भी सूचना दी जाती है. ऐसे मामलों में अस्पताल को मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, अस्पताल पहुंचने की स्थिति, इलाज के दौरान हुई घटनाओं और मौत से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना होता है. मौत होने पर शव को भी तय कानूनी प्रक्रिया के तहत रखा जाता है. जरूरत पड़ने पर पोस्टमार्टम कराया जाता है. केंद्र सरकार के अस्पताल मैनुअल में भी मेडिको-लीगल मौत के मामलों में पुलिस को तत्काल सूचना देने और शव की पहचान व सुरक्षित रखने के प्रोसेस का जिक्र है.

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MLC सिर्फ संदिग्ध मामलों तक सीमित नहीं

यहां एक जरूरी बात समझनी होगी. MLC दर्ज करने का मतलब यह नहीं है कि डॉक्टरों को उनकी मौत में किसी साजिश या अपराध का शक है. यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है. खासकर तब जब मौत अस्पताल के बाहर हुई हो और मौत की परिस्थितियों का ऑफिशियल डॉक्यूमेंट तैयार करना जरूरी हो. इसलिए अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण पर Medical Findings सामने आएगी. लेकिन शुरुआती तौर पर नाना पाटेकर की मौत को संदिग्ध नहीं माना जा रहा है. 

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