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मुर्शिदाबाद हिंसा में हुई थी पिता और बेटे की हत्या, एक महीने बाद गिरफ्तार हुआ आरोपी अकबर अली

नए वक्फ कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जिलों में बड़ी तादाद में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था. लेकिन बाद में हिंसा भड़क गई. 11 अप्रैल को मुर्शिदाबाद के जाफराबाद इलाके में हरगोबिंदो दास (70) और उनके बेटे चंदन दास (40) के शव बरामद किए गए.

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मुर्शिदाबाद जिले में पिता-पुत्र हत्याकांड के मुख्य आरोपी अकबर अली को गिरफ्तार किया गया है. (तस्वीर-इंडिया टुडे)

पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुर्शिदाबाद हिंसा से जुड़े पिता-पुत्र हत्याकांड के मुख्य आरोपी अकबर अली को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी झारखंड के गोड्डा से हुई है. इस कार्रवाई में पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स और झारखंड पुलिस संयुक्त रूप से शामिल थी. मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में अब तक 12 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

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इंडिया टुडे से जुड़े राजेश साहा की रिपोर्ट के मुताबिक अकबर अली समसेरगंज का रहने वाला है. उसकी उम्र 30 साल है. पुलिस ने बताया कि पिता-पुत्र हत्याकांड में अकबर के खिलाफ नामजद FIR दर्ज थी. वह हत्या को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपियों में शामिल है. 11 अप्रैल को 70 साल के हरगोबिंदो दास और उनके 40 साल के बेटे चंदन की हत्या के बाद से ही अकबर अली फरार था. अब जाकर उसको गिरफ्तार किया गया है.

राज्य पुलिस और STF की टीम मामले की जांच कर रही हैं. गिरफ्तारी के बाद उन्होंने आरोपी को 12 मई को ही जंगीपुर के कोर्ट में पेश किया. जहां से उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. पुलिस ने बताया कि मुर्शिदाबाद हिंसा के आरोप में अब तक 12 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है.

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पिछले महीने केंद्र सरकार के नए वक्फ कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जिलों में बड़ी तादाद में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था. लेकिन बाद में हिंसा भड़क गई. 11 अप्रैल को मुर्शिदाबाद के जाफराबाद इलाके में हरगोबिंदो दास (70) और उनके बेटे चंदन दास (40) के शव बरामद किए गए. दोनों के शरीर पर चाकू से कई वार के निशान थे. 

इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई. प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में हिंदू समुदाय के कई घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई. बाद में कई परिवारों को घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी. इसके अलावा हालात को काबू पाने के लिए जिले भर में BSF को तैनात करना पड़ा था.

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